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दिल्ली में तेज़ी से फैल रहा है आई फ्लू, डॉक्टर्स की सलाह- आंख लाल हुई तो नहीं डालें कोई भी ड्रॉप

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नई दिल्ली

हर साल फैलने वाला आई फ्लू इस बार बहुत ज्यादा तेजी से फैल रहा है। लेकिन अमूमन एक हफ्ते से दस दिनों के अंदर ये ठीक हो जाता है। इस बार भी अधिकतर लोग इसी समय में ठीक हो रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कई बार लोग अपने मन से स्टेरॉयड ले लेते हैं या बिना डॉक्टर की सलाह के ड्रॉप डाल लेते हैं, जिसकी वजह से कॉर्निया सहित आंख के अन्य हिस्से पर असर होने का खतरा रहता है और ऐसे मामले पहले आते रहे हैं। इसलिए स्टेरॉयड के इस्तेमाल से बचें। वहीं डॉक्टर का यह भी कहना है कि आंख का लाल होना और पानी निकलना जब बंद हो जाए तो लोग अपने काम पर जा सकते हैं।

शार्प साइट आई हॉस्पिटल के एक्सपर्ट डॉक्टर समीर सूद ने कहा कि पिछले साल की तुलना में सबसे बड़ा अंतर यही है कि इस बार बहुत ज्यादा तेजी से फैल रहा है और ज्यादा लोगों को संक्रमण हो रहा है। वहीं प्राइमस हॉस्पिटल के आई एक्सपर्ट डॉक्टर सौरभ वार्ष्णेय ने कहा कि कुछ मामले में आंख को बचाने वाली मेमब्रेन के नीचे ब्लीडिंग हो रही है। लेकिन यह रेयर है। समय पर अस्पताल पहुंचाने पर इसका इलाज संभव है। जरूरी है कि लक्षण आने पर इग्नोर न करें। बाकी सभी लक्षण पुराने हैं। डॉक्टर सौरभ ने कहा कि आमतौर पर सभी मरीज एक हफ्ते से 10 दिन के बीच ठीक हो जा रहे हैं। जब किसी को आई फ्लू होता है तो उसे खुद को आइसोलेट करके आराम करना चाहिए, ताकि उनकी वजह से दूसरे को संक्रमण नहीं हो। इस दौरान लोगों को आराम करना चाहिए। हाइजीन मेंटेन करनी चाहिए। आमतौर पर संक्रमण हल्का ही होता है और अपने आप ठीक हो जाता है, फिर भी लक्षणों का अनुभव करने वाले व्यक्तियों के लिए डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

डॉक्टर समीर सूद ने कहा कि कई बार लोग अपने मन से इलाज करते हैं। आंख लाल हुई है, दुकान से सुनी सुनाई ड्रॉप खरीद लेते हैं। कई बार लोग बिना डॉक्टर की सलाह के स्टेरॉयड इस्तेमाल करने लगते हैं। इसका असर तो होता है, लेकिन यह आंख को नुकसान कर देती है। डॉक्टर सौरभ ने कहा कि एक बार आई फ्लू हो गया तो दोबारा नहीं होता है। क्योंकि वायरस के खिलाफ शरीर में एंटीबॉडी बन जाती है। एक सीजन में एक ही बार इसका संक्रमण होता है। लेकिन यह एंटीबॉडी शॉर्ट टर्म होती है। अगले साल तक नहीं। इसलिए जब दोबारा संक्रमण फैलता है तो संक्रमण का खतरा रहता है। हालांकि, डॉक्टर का कहना है कि इसके कई स्ट्रेन होते हैं और म्यूटेशन भी होता है। लेकिन एक सीजन में दो बार संक्रमण का खतरा बहुत कम होता है।

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