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Wednesday, April 29, 2026
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दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व सीईओ ने बंगला बनाने के लिए गिराई थी ऐतिहासिक इमारत, जल्द खाली कराने के आदेश

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नई दिल्ली,

दिल्ली में सीएम केजरीवाल के बंगले पर कथित 40 करोड़ से ज्यादा के खर्चे का बवाल अभी थमा भी नहीं था कि दिल्ली जल बोर्ड सीईओ के आवास का मामला विवादित हो गया है. दरअल दिल्ली सरकार के विजिलेंस विभाग के नोटिस के बाद मामला चर्चा में आया. कहा जा रहा है कि एक ऐतिहासिक इमारत को गिराकर दिल्ली जलबोर्ड के सीईओ का सरकारी बंगला बनाया गया है.

आपको बता दें कि निर्माण के वक्त दिल्ली जल बोर्ड के सीईओ उदित प्रकाश (आईएएस) थे. आज के वक्त में उनकी तैनाती मिजोरम में है. सतर्कता विभाग ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है. अधिकारी को दो सप्ताह में नोटिस का जवाब देने के लिए कहा गया है. आरोप है कि नियमों के खिलाफ जाकर जल बोर्ड का सीईओ रहते सरकारी बंगला बनाने की मंजूरी दी गई.

महल ऑफ पठान का हिस्सा तोड़ा गया !
आपको बता दें कि दिल्ली सरकार के पुरातत्व विभाग ने 11 दिसंबर 2020 में महल ऑफ पठान को ऐतिहासिक इमारत के रूप में संरक्षित करने के लिए चिह्नित किया था. जमीन के उस हिस्से को 19 जनवरी 2021 को जल बोर्ड को पत्र लिखकर देने के लिए भी कहा. आरोप है कि जल बोर्ड के सीईओ रहते हुए आईएएस उदित प्रकाश ने बंगला बनाने की मंजूरी दी.

बंगले में आइएएस का परिवार रहता है कि जबकि उनका स्थानांतरण मिजोरम हो चुका है. पुरातत्व विभाग, जल बोर्ड व सतर्कता विभाग ने 9 जनवरी 2023 को उसका दौरा किया था. पुरातत्व विभाग का मानना है कि महल ऑफ पठान की दो संरचनाएं थी, जिसमें से एक को तोड़ दिया गया है.

जल बोर्ड में हुए घोटाले की भी जांच जारी
वहीं, जल बोर्ड में हुए घोटाले को लेकर भी जांच जारी है. ईडी ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है. ईडी ने दिल्ली जल बोर्ड की टेंडरिंग प्रोसेस में मानदंडों के उल्लंघन और अनियमितताओं के संबंध में दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी), एनबीसीसी और निजी संस्थाओं के अधिकारियों पर दिल्ली-एनसीआर, चेन्नई और केरल में छापेमारी की है. संबंधित अधिकारियों से जुड़े 16 परिसरों में PMLA-2002 के तहत तलाशी ली गई है. ईडी दिल्ली जल बोर्ड की टेंडरिंग प्रक्रिया में अनियमितता के दो अलग-अलग मामलों में जांच कर रही है.

इलेक्ट्रो मैग्नेटिक फ्लो मीटर की इंस्टालेशन में हुआ घपला
ईडी ने सीबीआई, नई दिल्ली द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की, जिसमें आरोप लगाया गया कि दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों ने एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड के अधिकारियों की मिलीभगत से इलेक्ट्रो मैग्नेटिक फ्लो मीटर की सप्लाई, इंस्टालेशन, टेस्टिंग और कमीशनिंग के लिए कंपनी को टेंडर देते समय एनकेजी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को अनुचित लाभ दिया.

यह पूरा मामला पानी के बिल के भुगतान से जुड़ा है. इसके लिए यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को बिल कलेक्शन का जिम्मा दिया गया था. यह बिल पेमेंट ई-कियोस्क के जरिए लिया जाना था. इसके बाद बैंक ने Fresh Pay IT Solutions नाम की एक कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट दिया. इसके बाद Fresh Pay IT Solutions ने Aurrum e-Payments Pvt Ltd नाम की एक अन्य कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट दिया था.

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