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मुझे कई फोन कॉल आए… साइबर फ्रॉड पर क्या बोले इसरो चीफ एस सोमनाथ

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नई दिल्ली:

भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो प्रमुख डॉ. सोमनाथ ने बढ़ती डिजिटल दुनिया से जुड़े खतरों से आगाह किया। उन्होंने बताया कि भारत डिजिटल दुनिया में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन इससे साइबर सुरक्षा के खतरे भी बढ़े हैं। उन्होंने बेंगलुरु में ‘साइबर नालंदा’ नाम की साइबर सिक्युरिटी सर्विस की नींव रखी। यह SISA नामक कंपनी का प्रोजेक्ट है। इसरो चीफ ने कहा कि स्पेस एजेंसी भारी सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजने के लिए विशाल रॉकेट बनाने पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि फिलहाल सैटेलाइट लॉन्चिंग बाजार में बहुत मांग है क्योंकि दुनिया में पर्याप्त रॉकेट नहीं हैं।

इसरो चीफ को करना पड़ता है स्पैम कॉल का सामना
डॉ. सोमनाथ ने बताया कि उन्हें भी स्पैम कॉल और फ्रॉड से जुड़े कॉल का सामना करना पड़ता है। लेकिन जागरूकता और ज्ञान के कारण वह साइबर फ्रॉड का शिकार होने से बच गए हैं। निजी न्यूज चैनल एनडीटीवी ने डॉ सोमनाथ के हवाले से कहा कि मैं अभी तक साइबर फ्रॉड का शिकार नहीं बना हूं। लेकिन बहुत कोशिश हुई हैं, जैसे आप सभी के साथ होते हैं। मुझे कई फोन कॉल आए… लेकिन उनमें से कोई भी सफल नहीं हुआ।

भारत डिडिटल दुनिया में तेजी से बढ़ रहा आगे
डॉ. सोमनाथ ने कहा कि भारत में डिजिटल दुनिया का विकास अभूतपूर्व है। पिछले कुछ सालों में डिजिटल पेमेंट, शिक्षा, व्यापार और कमर्शियल क्षेत्र में डिजिटल तकनीक का उपयोग बहुत बढ़ा है। इससे साइबर अपराध भी बढ़े हैं। डिजिटल इकोसिस्टम को बढ़ाने के साथ-साथ साइबर खतरों, जो ज्यादातर देश के बाहर से आते हैं, से निपटने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा को मजबूत करना बेहद जरूरत है, यह निजी क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण है।

नई सर्विस का नाम साइबर नालंदा रखने के बारे में डॉ. सोमनाथ ने कहा कि यह अन्य संस्थानों और शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर साइबर सुरक्षा में रिसर्च और विकास का काम करेगा। नालंदा वह जगह थी जहां विचारों का आदान-प्रदान होता था

‘रॉकेट कम हैं सैटेलाइट ज्यादा’
उन्होंने कहा, “… दुनिया में पर्याप्त रॉकेट नहीं हैं। रॉकेट की तुलना में सैटेलाइट ज्यादा हैं। लेकिन लॉन्चिंग बाजार एक भू-राजनीतिक मुद्दा है। सिर्फ संख्या ही मायने नहीं रखती। लागत, राजनीतिक प्रभाव, क्षेत्रीय मांग, ये सभी चीजें मायने रखती हैं। इसलिए हम और ज्यादा रॉकेट बनाने और उन्हें कमर्शियल कामों के लिए उपलब्ध कराने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।”

कई स्टार्टअप भी कर रहे रॉकेट बनाने पर काम
इसरो प्रमुख ने आगे बताया कि छोटे सैटेलाइट की डिमांड है, इसलिए बहुत सारे स्टार्टअप इस पर काम कर रहे हैं। मध्यम स्तर पर हमारे पास पीएसएलवी है, जो बहुत अच्छा काम कर रहा है। उच्च स्तर पर हमारे पास पर्याप्त क्षमता नहीं है। हम इसे विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने के आगामी प्रमुख मिशन के बारे में पूछे जाने पर डॉ. सोमनाथ ने कहा कि बिल्कुल भी घबराने की जरूरत नहीं है।

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