11.5 C
London
Friday, March 20, 2026
Homeराष्ट्रीयपहलगाम का ये संयोग या पाक प्रायोजित प्रयोग?, तब 25 साल पहले...

पहलगाम का ये संयोग या पाक प्रायोजित प्रयोग?, तब 25 साल पहले क्लिंटन के दौरे पर 35 सिखों को मार दिया था

Published on

नई दिल्ली

पहलगाम की वारदात ने 25 साल पहले की उस आतंकी घटना की याद ताजा कर दी है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिटंन भारत दौरे पर थे और आतंकियों ने 35 सिखों को मौत के घाट उतार दिया था। अभी जब अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस भारत दौरे पर हैं तो एक और बड़े हमले को अंजाम दिया गया है जिसमें 28 लोगों की जान चली गई।

बहरहाल, पहलगाम आतंकी हमले से जिस तरह पूरा देश हिल गया है, उसी तरह आज से ठीक 20 साल पहले, 20 मार्च 2000 को, दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के चित्ती सिंहपुरा गांव में सशस्त्र हमलावरों ने 35 सिख पुरुषों को मौत के घाट उतार दिया था। गांव में लगभग हर किसी को वह शाम ठीक उसी तरह याद है। हमलावर शाम करीब 7:30 बजे आए। उन्होंने गांव के पुरुषों को गुरुद्वारे के सामने लाइन में खड़ा किया। फिर उन्हें गोली मार दी।

गांव वालों के लिए मार्च का महीना दुखभरा होता है
रिसर्च स्कॉलर खुशदीप मल्होत्रा लिखते हैं, हरे-भरे सेब के बागों के बीच छिपे हुए इस गांव को ढूंढना मुश्किल है। सिवाय इसके कि प्रवेश द्वार पर एक पीला बैनर लगा है। इसे ‘शहीदों दा पिंड’ यानी शहीदों का गांव के रूप में जाना जाता है। पचीस साल के बानी (बदला हुआ नाम) कहते हैं कि वे इसे बस भूल रहे हैं, वे इसे भूलने की कोशिश कर रहे हैं। बानी के पिता उन लोगों में से एक थे जिनकी हत्या कर दी गई थी। मार्च का महीना इस गांव के लिए एक मुश्किल महीना होता है। लेकिन बानी को ऐसा लगता है कि लोग आगे बढ़ गए हैं।

यादों को बनाए रखने की कवायद जारी
गुरुद्वारा समुंद्री हॉल के अंदर के दृश्य तकलीफ देते हैं। यहीं पर ‘शहीदों’ का अंतिम संस्कार किया गया था। गांव के लोग उन्हें शहीदों के रूप में याद करते हैं। बादी का कहना है कि गुरुद्वारा के सामने 35 में से 17 पुरुषों को लाइन में खड़ा करके गोली मार दी गई थी। अभी गुरुद्वारा पर केवल दीवार में गोलियों के निशान हैं, जिन्हें पीले रंग से हाइलाइट किया गया है।

2018 की शुरुआत में, बिजली की खराबी के कारण लगी आग ने गुरुद्वारा समुंद्री हॉल के लगभग सभी हिस्सों को अपनी चपेट में ले लिया। इसमें वह दीवार भी शामिल थी जिस पर शहीदों की तस्वीरें थीं। गांव वालों ने इसे दूसरा ‘शहीदी’ माना। चित्ती सिंहपुरा नरसंहार को स्मृति में बनाए रखने के लिए एक ‘ऐतिहासिक’ गुरुद्वारा बनाने के उद्देश्य से इसके मुख्य अग्रभाग के पुनर्निर्माण का काम चल रहा है।

पीड़ित मांग रहे इंसाफ
खुशदीप कुमार मल्होत्रा कहते हैं कि पिछले तीन वर्षों से वह उन पुरुषों और महिलाओं, बूढ़े और जवानों के साथ लगातार बातचीत कर रहे हैं जिन्हें यह घटना याद है। चित्ती सिंहपुरा ने नरसंहार के बाद ‘विकास’ देखा है, जैसा कि कई स्थानीय लोग अक्सर कहते हैं। लेकिन दरबारा सिंह (बदला हुआ नाम) कहते हैं कि आप बताएं, सड़कें तो बन ही जानी थीं, लेकिन उनकेपिता की मौत का जवाब कौन देगा?

Latest articles

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 207 नवीन बसों को दिखाई हरी झण्डी: राजस्थान में सुदृढ़ होगी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को राजधानी में 207 नवीन बसों को हरी झण्डी...

भक्ति और उत्साह के साथ नव संवत्सर 2083 का आगाज: भेल में स्थापित हुई प्रदेश की सबसे ऊंची 31 फीट की गुड़ी

भोपाल राजधानी में गुरुवार को भारतीय नववर्ष विक्रम संवत 2083 और चैत्र नवरात्रि का पर्व...

गैस संकट से भोपाल के उद्योग बेहाल: उत्पादन 40% तक घटा, सैकड़ों यूनिट बंद होने की कगार पर

भोपाल मप्र के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में लिक्विफाइड नेचुरल गैस और कमर्शियल एलपीजी की भारी...

जल पाइपलाइन कार्य में देरी पर बवाल, पार्षद प्रतिनिधि ने सुपरवाइजर के चेहरे पर पोती कालिख

भोपाल भोपाल के बैरसिया में अमृत 2.0 जलप्रदाय योजना के तहत पाइप लाइन बिछाने के...

More like this

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 207 नवीन बसों को दिखाई हरी झण्डी: राजस्थान में सुदृढ़ होगी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को राजधानी में 207 नवीन बसों को हरी झण्डी...

भेल के निदेशक कृष्ण कुमार ठाकुर कार्यमुक्त, अब एनएमडीसी में संभालेंगे नई जिम्मेदारी

नई दिल्ली | सार्वजनिक क्षेत्र की महारत्न कंपनी भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) में एक...

भेल की बोर्ड बैठक में बड़ा फैसला: वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के रखरखाव के लिए टिटागढ़ रेल के साथ बनेगा नया जॉइंट वेंचर

नई दिल्ली | देश की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की इंजीनियरिंग और विनिर्माण कंपनी, भारत हैवी...