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एक झटके में बर्बाद कर दिया… जिस सिंधु जल समझौते को भारत ने रोका, वो कैसे बना देगा पाकिस्‍तान को मोहताज?

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नई दिल्‍ली:

पहलगाम आतंकी हमले के बाद मोदी सरकार ने बड़ा कदम उठा दिया है। भारत ने सिंधु जल समझौते को रोकने का फैसला किया है। यह कदम पाकिस्तान के लिए आर्थिक रूप से बेहद गंभीर होगा। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर करता है। वह सिंधु नदी बेसिन के पानी पर बहुत अधिक निर्भर है। समझौते के तहत पाकिस्तान को सिंधु नदी और उसकी पश्चिमी सहायक नदियों (सिंधु, झेलम और चिनाब) का पानी आवंटित किया गया है। भारत सरकार का ताजा कदम पाकिस्‍तान को बड़ी चोट पहुंचाएगा। आइए, यहां समझते हैं कैसे।

पाकिस्तान का कृषि क्षेत्र सिंचाई के लिए सिंधु नदी और उसकी पश्चिमी सहायक नदियों पर बहुत ज्‍यादा निर्भर है, जो संधि के तहत पाकिस्तान को आवंटित की गई हैं। निलंबन से भारत को इन नदियों के प्रवाह को कंट्रोल करने की ताकत मिल सकती है। इससे पाकिस्तान में सिंचाई के लिए उपलब्ध पानी में काफी कमी आ सकती है।

खाद्य सुरक्षा को खतरा
सिंचाई में कमी से गेहूं, चावल, गन्ना और कपास जैसी प्रमुख फसलों की पैदावार पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। यह पाकिस्तान की खाद्य सुरक्षा और निर्यात के लिए महत्वपूर्ण हैं। कम पैदावार और कृषि उत्पादन में कमी से किसानों को भारी आय का नुकसान होगा। ये पाकिस्तान की आबादी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

कृषि उत्पादन में भारी कमी से खाद्य पदार्थों की कमी हो सकती है और आयात पर निर्भरता बढ़ सकती है। इससे पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ेगा। उपभोक्ताओं के लिए खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं। कृषि पाकिस्तान के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में महत्वपूर्ण योगदान देता है। पानी की कमी के कारण इस क्षेत्र में गंभीर गिरावट से समग्र आर्थिक विकास दर नकारात्मक रूप से प्रभावित होगी।

कृषि कच्चे माल पर निर्भर उद्योग, जैसे कपड़ा उद्योग (कपास), खाद्य प्रसंस्करण और चीनी मिलें भी कृषि उत्पादन में कमी से प्रभावित होंगे। पाकिस्तान के कार्यबल का एक बड़ा हिस्सा कृषि क्षेत्र में कार्यरत है। कृषि गतिविधियों में कमी से नौकरी जा सकती हैं। साथ ही बेरोजगारी बढ़ सकती है।

जल संकट में फंस सकता है पाक‍िस्‍तान
कृषि उत्पाद और संबंधित औद्योगिक सामान पाकिस्तान के निर्यात के लिए महत्वपूर्ण हैं। उत्पादन में कमी से निर्यात आय में गिरावट आने की आशंका है। इससे देश के भुगतान संतुलन पर और दबाव पड़ेगा। इसके अलावा पाकिस्तान ने संधि के गारंटीकृत पानी की उपलब्धता के आधार पर सिंचाई के बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण निवेश किया है। निलंबन से यह बुनियादी ढांचा कम प्रभावी हो जाएगा। इससे निवेश का नुकसान होगा।

पानी की कमी के कारण आर्थिक कठिनाई, विशेष रूप से कृषि समुदायों में, सामाजिक अशांति और राजनीतिक अस्थिरता का कारण बन सकती है। पाकिस्तान के विभिन्न प्रांतों के बीच जल वितरण पहले से ही एक संवेदनशील मुद्दा है। समग्र उपलब्धता में कमी से ये तनाव और बढ़ सकते हैं।

क्‍या है स‍िंंधु जल समझौता?
सिंधु जल समझौता, 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित एक जल-बंटवारा समझौता है। इसमें विश्व बैंक ने मध्यस्थता की थी। इस समझौते का उद्देश्य सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के पानी के उपयोग को लेकर दोनों देशों के बीच विवादों को रोकना था। इस संधि के तहत, सिंधु नदी की छह नदियों को दो भागों में बांटा गया है। पूर्वी नदियों ब्यास, रावी और सतलुज का नियंत्रण भारत को दिया गया। पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब का कंट्रोल पाकिस्तान के पास आया।

आतंकी हमले के बाद फैसला
पहलगाम में 22 अप्रैल को आतंकवादी हमले के बाद मोदी सरकार ने यह कदम उठाया है। आतंकियों ने दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के पहलगाम के पास बाईसरन घाटी में पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलीबारी की थी। इस हमले 26 लोगों की मौत हो गई थी। इनमें ज्यादातर पर्यटक थे। कई अन्य घायल हो गए थे।

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