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सरदार पटेल क्‍या RSS विरोधी थे, संघ को क्‍यों किया था बैन?

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नई दिल्‍ली

सरदार वल्‍लभभाई पटेल आजादी के आंदोलन का बड़ा चेहरा थे। वह देश के पहले गृहमंत्री और उपप्रधानमंत्री बने। उनके नेतृत्‍व में ही तमाम स्‍वतंत्र रियासतों को भारत के साथ मिलाया गया। उनकी आक्रामकता को पूरा देश सराहता है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) भी लौह पुरुष को अपना आदर्श मानती है। हालांकि, वह सरदार पटेल ही थे जिन्‍होंने कभी राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ (RSS) पर बैन लगाया था। सवाल उठता है कि पटेल ने ऐसा क्‍यों किया? क्‍या वह संघ विरोधी थे?

आज सरदार पटेल की जयंती है। 31 अक्‍टूबर 1875 में गुजरात में उनका जन्‍म हुआ। उन्‍होंने बतौर बैरिस्‍टर अपना करियर शुरू किया। फिर राजनीति में कदम रखे। वह बाद में कांग्रेस अध्‍यक्ष भी बने। देश को एक करने में उन्‍होंने अहम भूमिका अदा की। पटेल को लौह पुरुष के नाम से भी जाना जाता है।

पटेल ने संघ पर लगाया था बैन
मौजूदा केंद्र सरकार पटेल के साथ खुद को जोड़ती है। उनके आदर्शों पर चलने की बात करती है। लेकिन, यह भी सच है कि 4 फरवरी 1948 को पटेल ने ही संघ पर प्रतिबंध लगाया था। तब वह देश के गृहमंत्री होते थे। महात्‍मा गांधी की हत्‍या के बाद पटेल ने यह कदम उठाया था। पटेल वैसे तो संघ विरोधी नहीं थे। लेकिन, संघ की हिंदू राष्‍ट्र या मुस्लिम विरोधी विचारधारा से भी बहुत सहमत नहीं थे। जब उन्‍होंने संघ पर रोक लगाई थी तब एक चिट्ठी भी लिखी थी। इसमें उन्‍होंने माना था कि बेशक संघ ने हिंदू समाज की सेवा की है। जब-जब समाज को जरूरत पड़ी उसने आगे बढ़कर हिस्‍सा लिया। हालांकि, उसका एक और चेहरा है। वह मुस्लिम विरोधी है।

पटेल ने नेहरू को ल‍िखी थी च‍िट्ठी?
यह भी सच है कि महात्‍मा गांधी की हत्‍या और संघ पर रोक लगाने के एक महीने बाद पटेल ने तत्‍कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को चिट्ठी लिखी थी। इसमें उन्‍होंने कहा था कि संघ का महात्‍मा गांधी की हत्‍या में सीधा हाथ नहीं है। हालांकि, उनकी हत्‍या का वे जश्‍न मना रहे थे। पटेल ने माना था कि गांधी की हत्‍या में हिंदू महासभा के उग्रपंथी समूह का हाथ था। जुलाई 1948 में जनसंघ के संस्‍थापक श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी ने पटेल को चिट्ठी लिखी थी। इस खत में उन्‍होंने तत्‍कालीन गृहमंत्री से संघ पर से रोक हटाने की अपील की थी। इसका पटेल ने जवाब भी दिया था। उन्‍होंने बताया था कि संघ का जरूर गांधी की हत्‍या में हाथ नहीं है। लेकिन, उसके कारण देश का माहौल खराब हुआ। यह महात्‍मा गांधी की हत्‍या का कारण बना। उन्‍होंने संघ की गतिविधियों को सरकार के लिए जोखिमभरा बताया था। 15 दिसंबर 1950 में पटेल का बॉम्‍बे (मुंबई) में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था

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