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कौन है वो अफसर, जिसे सौंपी गई कतर में मौत की सजा पाए 8 भारतीयों को बचाने की जिम्मेदारी

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नई दिल्‍ली

कतर में भारतीय नौसेना के 8 पूर्व अधिकारियों को मौत की सजा सुनाई गई है। इस आदेश ने पूरे देश को हिला दिया है। इन पूर्व अधिकारियों के परिजन केंद्र से हस्‍तक्षेप की मांग कर चुके हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को इनसे मुलाकात भी की थी। अब सभी को सरकार के अगले कदम का इंतजार है। इस बीच सरकार की ओर से बड़ा कदम उठाने की खबर आई है। इसके अनुसार, नौसेना के 8 पूर्व अधिकारियों की मदद के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेहद भरोसेमंद डिप्‍लोमैट को जिम्‍मेदारी दी गई है। उनका नाम दीपक मित्‍तल है। दीपक मित्‍तल को यह जिम्‍मेदारी बहुत सोच-समझ कर दी गई है।

कतर में भारत के राजदूत रहे हैं दीपक म‍ित्‍तल
मित्‍तल कतर में भारत के राजदूत रहे हैं। वह 1998 बैच के आईएफएस (भारतीय विदेश सेवा) अधिकारी हैं। वर्तमान में वह प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में पोस्‍टेड हैं। कतर में भारतीय राजदूत होने के कारण माना जाता है कि उनके वहां पर शीर्ष स्‍तर पर अच्‍छे संबंध हैं। यही कारण है कि उन्‍हें जिम्‍मेदारी दी गई है। उन्‍हें 2020 में कतर में भारत का दूत नियुक्‍त किया गया था। उनकी उपलब्धियों की फेहरिस्‍त काफी लंबी है। कतर में भारतीय राजदूत रहते हुए उन्‍होंने ही 2021 में तालिबान के नंबर 1 नेता शेर मोहम्‍मद अब्‍बास स्‍तानेकजई से बातचीत की थी। यह कई मायनों में अहम था। अफगानिस्‍तान की सत्‍ता पर तालिबान के काबिज होने के बाद पहली बार यह ऑफिशियल डिप्लोमैटिक चैनल से बातचीत थी।

पाक‍िस्‍तान को याद द‍िलाई थी औकात
2019 में मित्‍तल काफी सुर्खियों में आए थे। तब हेग में अंतरराष्‍ट्रीय न्‍यायालय में कुलभूषण जाधव मामले की सुनवाई थी। इस दौरान पाकिस्‍तान के वरिष्‍ठ अधिकारी ने उनकी ओर हाथ मिलाने के लिए बढ़ाया था। इसका जवाब उन्‍होंने नमस्‍ते से दिया था। यह लम्‍हा कैमरों में कैद हो गया था। इस तस्‍वीर की खूब चर्चा हुई थी।

प्रधानमंत्री मोदी के हैं बेहद भरोसेमंद
दीपक मित्‍तल को बेहद कुशल वार्ताकार माना जाता है। वह पीएम मोदी के बेहद भरोसेमंद अफसरों में हैं। बीते साल अगस्‍त में जब इन 8 पूर्व नौसेना अधिकारियों की कतर में गिरफ्तारी हुई थी तब दीपक मित्‍तल दोहा में ही थे। इस गिरफ्तारी के बाद दीपक मित्‍तल ने कतर को छोड़ दिया था। उन्‍हें अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर संवेदनशील मुद्दों को निपटाने में महारत है। पूर्व अधिकारियों को बचाने के लिए भारत के पास विकल्‍प भी सीमित हैं। इस समय सबसे अच्‍छा विकल्‍प कतर के साथ अपने शानदार रिश्‍तों को भुनाने का ही है। कतर में 6 से 7 लाख भारतीय काम करते हैं। वहां भारतीय कंपनियों ने बड़ा निवेश भी किया हुआ है। मित्‍तल इन संबंधों के सहारे भारत का पक्ष रख सकते हैं।

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