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सेना में पेंशन के क्या बदलेंगे नियम? जवान और ऑफिसर्स लिए एक रूल लागू करने की तैयारी

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नई दिल्ली

भारतीय सेना ने सिफारिश की है कि सैनिक के जाने के बाद पत्नी और पैरंट्स दोनों को आर्थिक मदद मिलती रहे इसके लिए पेंशन के नियमों में बदलाव किया जाए। सेना ने अपनी सिफारिश रक्षा मंत्रालय को भेजी है और आखिरी फैसला मंत्रालय को लेना है। सूत्रों के मुताबिक सिफारिश में कहा गया है कि फैमिली पेंशन का एक हिस्सा सैनिक के पैरंट्स को भी मिले। साथ ही जवान और ऑफिसर्स के केस में जो अलग अलग नियम हैं उनमें भी समानता लाई जाए।

क्यों पड़ी जरूरत
करीब दो महीने पहले सियाचीन में शहीद कैप्टन अंशुमान सिंह के माता-पिता ने पेंशन के नियमों को लेकर सवाल उठाया था। कैप्टन अंशुमान को कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया, जिसके बाद उनके माता पिता ने बयान दिया कि उनकी पत्नी मायके चली गई और सबकुछ अपने साथ ले गई। उन्होंने सरकार से मांग की कि एनओके (नेक्स्ट ऑफ किन यानी निकटतम परिजन) के नियमों में बदलाव किया जाए। ये पहली बार नहीं था जब एनओके को पेंशन के मामले में सवाल उठे हैं। कई बार इस तरह के मामले भी सामने आए जब किसी जवान की विधवा पत्नी को मदद की गुहार लगानी पड़ी।

क्या है मौजूदा नियम
नियमों के मुताबिक जब सेना में कोई भी अफसर या जवान भर्ती होता है तो उन्हें एक डिटेल फॉर्म भरना होता है जिसे- आफ्टर मी फोल्डर कहते हैं। इसमें एनओके (नेक्स्ट ऑफ किन यानी निकटतम परिजन)की पूरी जानकारी होती है। अगर सैनिक की शादी नहीं हुई है तो उनके माता या पिता में से कोई उनका एनओके हो सकता है। शादी होने के बाद उनकी पत्नी ही एनओके होती है। अगर सैनिक की मौत हो जाती है या शहादत होती है तो उस स्थिति में अलग अलग आर्थिक मदद है। तीन तरह की फैमिली पेंशन होती है। पहली है ओर्डिनरी फैमिली पेंशन। यह उस स्थिति में एनओके को मिलती है जब किसी बीमारी की वजह से या सामान्य स्थिति में सैनिक की मौत होती है। यह आखिरी सैलरी का 30 पर्सेंट होता है। दूसरी पेंशन है स्पेशल फैमिली पेंशन। यह उस स्थिति में एनओके को मिलती है जब सैनिक की ड्यूटी के दौरान या ड्यूटी की वजह से मौत होती है। यह सैलरी का 60 पर्सेंट होता है। तीसरी पेंशन होती है लिब्रलाइज्ड फैमिली पेंशन। यह बैटल कैजुवल्टी होने पर एनओके को मिलती है। यह सैलरी का 100 पर्सेंट होता है।

जवान और ऑफिसर के लिए अलग नियम
मौजूदा नियमों के मुताबिक जवान और जेसीओ की मौत के मामले में ऑर्डिनरी फैमिली पेंशन के हकदार एनओके ही होते हैं। यही नियम ऑफिसर्स के लिए भी है। लेकिन स्पेशल फैमिली पेंशन के केस में जेसीओ और जवान की पत्नी और पैरंट्स के बीच में स्पेशल फैमिली पेंशन बांटी जा सकती है। यानी पेंशन का कुछ हिस्सा पत्नी और कुछ हिस्सा पैरंट्स को मिलता है। इसी तरह लिब्रलाइज्ड फैमिली पेंशन मिलने पर जेसीओ और जवान के केस में यह सिर्फ एनओके को जाएगी लेकिन ऑफिसर्स के केस में ये पत्नी और पैरंट्स की बीच बंट सकती है। सूत्रों के मुताबिक सेना ने इस नियम में भी एकरूपता लाने की सिफारिश की है ताकि जवान या ऑफिसर्स की मौत के बाद उनकी पत्नी और पैरंट्स दोनों को ही मदद मिलती रहे।

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