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पर्रिकर का विकल्प: BJP में चल रहा है मंथन

नई दिल्ली

गोवा के चीफ मिनिस्टर मनोहर पर्रिकर लंबे समय से स्वास्थ्य की समस्या से जूझ रहे हैं और इन दिनों एम्स में उपचार के लिए एडमिट हैं। कहा यह भी जा रहा कि उन्हें एक बार फिर से इलाज के लिए अमेरिका जाना पड़ सकता है। इस बीच सूबे की सत्ता में बीजेपी के साथ गठबंधन में शामिल दलों ने उनके रिप्लेसमेंट के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है। सहयोगी दलों का कहना है कि पर्रिकर राज्य को समय नहीं दे पा रहे हैं, ऐसे में उनके रिप्लेसमेंट की तलाश की जानी चाहिए। बीजेपी ने भी इस पर विचार करते हुए सूबे के विधायकों से अगले कदम के लिए बातचीत करने का फैसला लिया है।

बीजेपी के संगठन महामंत्री रामलाल समेत केंद्रीय पर्यवेक्षक रविवार को गोवा पहुंचे थे। उन्होंने राज्य के नेतृत्व और सहयोगी दलों महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी, गोवा फॉरवर्ड पार्टी एवं निर्दलीय विधायकों से बातचीत की। इस बातचीत में गोवा के लिए संभावित विकल्पों को लेकर चर्चा हुई। 40 सदस्यीय गोवा विधानसभा में बीजेपी के 14 विधायक हैं, इसके अलावा वह महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी के 3, गोवा फॉरवर्ड के 3 और 3 ही निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सरकार चला रही है।

बता दें कि गोवा में चुनाव के बाद क्षेत्रीय दलों ने बीजेपी को इसी शर्त पर समर्थन दिया था कि मनोहर पर्रिकर को ही सीएम बनाया जाना चाहिए। यहां तक कि महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी के लीडर रामकृष्ण धावलिकर ने लक्ष्मीकांत पार्सेकर को सीएम बनाए जाने के प्रस्ताव का विरोध भी किया था, जिन्हें पिछले कार्यकाल में पर्रिकर के डिफेंस मिनिस्टर बनने पर जिम्मेदारी दी गई थी।

बीजेपी के एक सीनियर लीडर ने कहा, ‘यह पर्रिकर का कदम और करिश्मा ही था कि बीजेपी महज 13 विधायकों के साथ ही सरकार का गठन कर सकी। बीजेपी में उनके जैसा नेता मिलना मुश्किल है, जो सभी को अपने साथ लेकर चलने की क्षमता रखता हो।’ इस बात की भी खबरें हैं कि सरकार में शामिल विधायकों में सबसे सीनियर धावलिकर खुद को पर्रिकर के विकल्प के तौर पर देख रहे हैं। हालांकि सूत्रों का कहना है कि बीजेपी को यह स्वीकार नहीं है। उनके अलावा गोवा फॉरवर्ड पार्टी के विजय सरदेसाई भी सीएम की पोस्ट के लिए दावा ठोक रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक बीजेपी पर्रिकर को ही सीएम बनाए रखने के मूड में है। हालांकि वह दैनिक मामलों के निपटारे के लिए किसी अंतरिम व्यवस्था को भी बनाने की कोशिश कर रही है। विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने में अभी तकरीबन साढ़े तीन साल का वक्त बाकी है। ऐसे में विधानसभा चुनाव होने तो मुश्किल हैं, लेकिन असंभव भी नहीं है।

पार्टी के सूत्रों ने सहयोगी दलों की ओर से बीजेपी सरकार गिराने की कोशिश पर राष्ट्रपति शासन की संभावनाओं से भी इनकार नहीं किया है। सूबे में कांग्रेस के 16 विधायक हैं और वह सबसे बड़ी पार्टी है। अस्थिरता की स्थिति में वह विधायकों को अपनी ओर लुभाकर सरकार गठन का प्रयास कर सकती है।

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