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पूर्व पीएम के मीडिया एडवाइजर बोले- ‘मनमोहन सिंह ने भी विदेशी मदद ली थी’

नई दिल्ली

देश की पिछली यूपीए सरकार ने प्राकृतिक आपदा के दौरान ‘इमीडिएट रेस्क्यू ऑपरेशन’ में विदेशी एजेंसियों की मदद नहीं ली थी. हालांकि, आपदा प्रभावित इलाकों में पुनर्निर्माण कार्यों के लिए उन्होंने बाद में विदेशी मदद ली थी. मनमोहन सिंह के पूर्व मीडिया सलाहकार संजय बारू ने यह दावा किया है. बाढ़ प्रभावित केरल के लिए यूएई की मदद ठुकराने के मुद्दे पर न्यूज18 की एक डिबेट में उन्होंने यह बात कही.

संजय बारू ने कहा, “विकास मदद संबंधी नियम अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के वक्त बदले गए थे. मनमोहन सिंह द्वारा 2004 में कही बात का मतलब था कि वह मदद के नाम पर भारत में विदेशी एजेंसियों की मौजूदगी रोकना चाहते थे.”उन्होंने कहा, “ऐसा कुछ नहीं है जो सरकार को विदेशी मदद लेने से रोकता है. केरल को लंबे समय तक पुनर्वास कार्यक्रम चलाने होंगे और इसके लिए विदेशी मदद की ज़रूरत होगी. यूएई की मदद मंजूर करने में परेशानी क्या है?”

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने बुधवार को बाढ़ प्रभावित केरल के लिए विदेशी आर्थिक मदद लेने से इनकार कर दिया है. संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने बाढ़ पीड़ितों के लिए 700 करोड़ रुपये देने का ऐलान किया था. बता दें कि यूएई में तकरीबन 28 लाख भारतीय रहते हैं, जिनमें अधिकतर केरल के लोग हैं.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने बुधवार को कहा कि केरल में राहत और बचाव अभियान की जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और वह घरेलू स्तर पर ही इसका समाधान करेगी. हालांकि, भारत ने केरल में बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता का प्रस्ताव देने के लिए विदेशी देशों की सराहना की.संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर और मालदीव समेत कई देशों ने केरल में बाढ़ राहत के लिए सहायता पैकेज देने की घोषणा की है.

बता दें कि बाढ़ प्रभावित केरल की सहायता के लिए संयुक्त राज्य अमीरात ने 700 करोड़, कतर ने 35 करोड़ और मालदीव ने 35 लाख रुपये दाने देने की घोषणा की है. वहीं केरल सरकार ने राज्य में बाढ़ राहत कार्यों के लिए विदेशी सरकारों से दान स्वीकार न करने के केंद्र के फैसले पर अपनी नाखुशी जाहिर की है.

मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन ने कहा कि राज्य सरकार संयुक्त अरब अमीरात द्वारा घोषित राहत पैकेज को प्राप्त करने में आ रही बाधा को दूर करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी से संपर्क करेगी. भारत में थाईलेंड के राजदूत चुटिंटर्न सैम गोंगस्कादी ने एक ट्वीट के जरिए सूचित किया है कि भारत सरकार केरल में बाढ़ राहत कार्यों के लिए विदेशी दान को स्वीकार नहीं करेगी.

आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि नई दिल्ली विदेशी सरकारों को संदेश दे रही है कि वह केरल में बाढ़ के कारण होने वाले नुकसान का व्यापक मूल्यांकन कर रहा है और राज्य की आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम है. सूत्रों ने बताया कि प्रवासी भारतीयों से तथा निजी चंदा स्वीकार करने में कोई पाबंदी नहीं है.

यूएई ने केरल से अपने संबंधों को लेकर 700 करोड़ रुपये की मदद की पेशकश की है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक करीब 30 लाख भारतीय यूएई में रहते हैं और वहां काम करते हैं जिनमें से 80 फीसदी केरल से हैं. केरल में आई बाढ़ में 231 लोगों की जानें गई हैं और 14 लाख से अधिक लोग बेघर हुए हैं.

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