राम मंदिर पर सियासी उबाल, आज से सुप्रीम कोर्ट में शुरू होगी सुनवाई

नई दिल्ली,

भारतीय राजनीति की धुरी बन चुके राम मंदिर विवाद पर देश की सबसे बड़ी अदालत सोमवार से सुनवाई करने जा रही है, लेकिन उससे ठीक पहले इस मसले पर सियासत और तेज हो गई है.सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर विवाद पर सुनवाई शुरू होने के लिए गिने चुने घंटे बचे हैं, उससे पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के बयान से राजनीतिक गहमागहमी तेज हो गई है.

राम मंदिर मसले पर सीएम योगी का कहना है कि अगर सुप्रीम कोर्ट सबरीमाला मंदिर पर फैसला दे सकता है, तो उसे राम मंदिर पर भी फैसला देना चाहिए. राम मंदिर हिंदुओं की आस्था का मामला है. यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले ही कह दिया है कि अयोध्या में राम मंदिर ही बनेगा.

शनिवार को केरल के कन्नूर में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी सबरीमला के बहाने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाए थे. अमित शाह ने कहा था कि अदालत को ऐसे फैसले ना देने चाहिए जो धार्मिक आस्था के खिलाफ हो और जिसे लागू करवा पाना मुश्किल हो.

विजयदशमी उत्सव पर RSS के सरसंघचालक मोहन भागवत ने राम मंदिर निर्माण को लेकर बड़ा बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि किसी भी रास्ते से राम मंदिर का निर्माण जरूर होना चाहिए, इसके लिए सरकार को कानून लाना चाहिए. उन्होंने कहा था कि राम सिर्फ हिंदुओं के नहीं हैं, बल्कि पूरे देश के हैं. हिंदू-मुस्लिम दोनों के लिए आदर्श हैं. संविधान की किताब में भगवान राम का चित्र है. अगर राम मंदिर बनता है तो देश में सद्भावना का माहौल बनेगा.

विपक्ष के सुर अलग
वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस ने राम मंदिर पर बीजेपी की बयानबाजी को दखलअंदाजी करार दिया. अब यहां बड़ा सवाल यह है कि अास्था बड़ी है या देश का कानून. वहीं, इन सबके बीच सुप्रीम कोर्ट में सोमवार से राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद की सुनवाई शुरू हो रही है.

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के नेतृत्व में तीन जजों की नई बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी. इसमें बेंच में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस कौल और जस्टिस केएम जोसेफ शामिल हैं. इससे पहले इस मामले में पूर्व चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, अशोक भूषण और अब्दुल नजीर की बेंच सुनवाई कर रही थी.दरअसल, साधु-संतों ने राम मंदिर को लेकर दबाव बढ़ा दिया है. कुंभ में धर्म संसद होने वाली है. ऊपर से साल 2019 का लोकसभा चुनाव सिर पर है. ऐसे में बीजेपी जल्द से जल्द इस मामले का हल चाहती है.

मायावती ने अमित शाह के बयान की कड़ी निंदा की
बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह द्वारा सबरीमला मामले पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर की गई टिप्‍पणी की कड़ी निन्‍दा की है. साथ ही कहा कि अदालत को इसका संज्ञान जरूर लेना चाहिए.मायावती ने कहा कि शाह का केरल के कन्नूर में सुप्रीम कोर्ट को हिदायत देते हुए यह कहना अति-निन्दनीय है कि अदालत को ऐसे फैसले नहीं देने चाहिए, जिनका अनुपालन नहीं किया जा सके और न्‍यायालय को आस्था से जुड़े मामले में फैसला देने से बचना चाहिए.

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