Friday , October 30 2020

3 तलाक अध्यादेशः सरकार ने सोनिया को सुनाया

नई दिल्ली

केंद्र सरकार ने तीन तलाक पर अध्यादेश लाने के कारण बताते हुए कहा कि मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए इसे लाना जरूरी था। केंद्र ने इस मसले पर कांग्रेस और सोनिया गांधी पर वोटबैंक की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए उन्हें लपेटा। बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को तीन तलाक अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। अब यह अध्यादेश लागू होने के लिए राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए जाएगा।

रविशंकर प्रसाद ने बोला कांग्रेस पर हमला
केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर तीन तलाक बिल को संसद से पास नहीं होने देने का आरोप लगाया। प्रसाद ने कहा, ‘कांग्रेस ने वोटबैंक की राजनीति के कारण राज्यसभा से इस बिल को पास नहीं होने दिया। मैंने इसे पास कराने के लिए राज्यसभा में कांग्रेस के नेता गुलामनबी आजाद से 5 बार आग्रह किया लेकिन उन्होंने ऊपर से बात करने की बात कहकर इसे टाल दिया। फिर कांग्रेस ने कहा कि इसपर बाकी पार्टियों की भी राय ली जाए।’ कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के होने बाद भी महिलाओं पर दमनकारी तीन तलाक चलता रहा और वह चुप रहीं। प्रसाद ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी जैसी एक वरिष्ठ महिला नेता और कांग्रेस की मुख्य लीडर होने के बाद भी वोटबैंक की राजनीति के कारण अमानवीय तीन तलाक को खत्म करने के लिए संसद से कानून बनाने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि कई मुस्लिम मुल्कों में तीन तलाक पर रोक है लेकिन भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र होते हुई भी इसपर रोक नहीं लगा पा रहा था। कांग्रेस ने वोटबैंक की राजनीति के कारण इसे रोका।

बताया तीन तलाक के कितने मामले
प्रसाद ने कहा कि तीन तलाक पर अध्यादेश लाना जरूरी हो गया था। उन्होंने कहा कि इसे लाना बेहद जरूरी था। देश की मुस्लिम महिलाएं इससे परेशान हैं। एससी ने तीन तलाक को रद्द करते हुए कहा था कि इस मामले पर छह महीने में केंद्र कानून बनाए। सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट से पहले 229 तीन तलाक के मामले सामने आए थे और जजमेंट के बाद 201 मामले सामने आए। ये संख्या जनवरी 2017 से 13 सितंबर 2018 तक हैं।’ उन्होंने कहा कि तीन तलाक के सबसे अधिक मामले यूपी में सामने आ रहे हैं। यूपी में जनवरी 2017 से जजमेंट से पहले 126 केस और जजमेंट के बाद 120 केस सामने आए हैं।

‘रोटी काली तो तीन तलाक’
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि छोटी-छोटी बातों पर मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक का दंश झेलना पड़ रहा है। रोटी काली तो तीन तलाक, लेट से उठी तो तलाक, विदेश से वॉट्सऐप पर तीन तलाक। उन्होंने कहा, ‘आजादी के 70 साल बाद और संविधान में मौलिक अधिकारों का जिक्र होने के बाद भी महिलाओं को तीन तलाए दिया जाना शर्मनाक है। उन्होंने कहा अध्यादेश को लाना इसलिए भी जरूरी था क्योंकि इसपर कोई कानून नहीं है। जब तीन तलाक से पीड़ित कोई महिला थाने जाती थी तो पुलिस इसपर कोई कार्रवाई नहीं कर पाती थी क्योंकि इसपर कोई कानून ही नहीं था।

तीन तलाक के मसौदे में 3 अहम संशोधन
-अगर पीड़ित महिला स्वयं इसके बारे में शिकायत करे। इसके साथ ही शादी के रिश्ते वाले सदस्यों के पास भी केस दर्ज करने का अधिकार रहेगा। पड़ोसी या कोई अनजान शख्स इस मामले में केस दर्ज नहीं कर सकता है।
-पत्नी की पहल पर समझौता हो सकता है। मजिस्ट्रेट इसे उचित शर्तों के साथ मंजूरी दे सकते हैं।
-मजिस्ट्रेट पत्नी के आरोप की सुनवाई के बाद इस मामले में बेल दे सकते हैं।

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