Wednesday , September 23 2020

अयोध्या: ‘सुप्रीम’ फैसले से पार्टियां पसोपेश में

नई दिल्ली

राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से शुक्रवार को दिए गए फैसले के बाद इसके सियासी असर को लेकर भी राजनीतिक दलों में मंथन शुरू हो गया है। जिस तरह सुप्रीम कोर्ट ने अगले 8 हफ्ते तक आम राय से हल तलाशने के लिए रास्ता बनाया है, उसके बाद राजनीतिक दलों को अपनी रणनीति बदलनी पड़ सकती है। बीजेपी अक्रामक तौर पर इस मुद्दे को चुनाव में उठाने की तैयारी कर रही थी। वहीं विपक्ष की उलझन इस बात को लेकर थी कि वह किस तरह इस मुद्दे का सामना करे।

एनबीटी ने जब अलग-अलग दलों के नेताओं से बात की तो सभी ने यह बात मानी कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह मामला पूरी तरह एक अलग ही दिशा में मुड़ गया है। इस चुनावों में मुद्दा बनाना किसी भी पार्टी के लिए आसान नहीं होगा। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से विपक्ष को थोड़ी राहत जरूर मिली है। वहीं दूसरी तरफ बीजेपी इस बात का क्रेडिट ले सकती है कि उनके कार्यकाल में यह मुद्दा मुकाम तक पहुंच रहा है।

बता दें कि पीएम मोदी इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरते हुए जानबूझकर इस टालने का आरोप लगाते रहे हैं। कुंभ के दौरान भी हिंदूवादी संगठनों ने अलग-अलग कार्यक्रम के माध्यम से सरकार और बीजेपी पर दबाव भी बनाया था। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ भी सरकार पर चुनाव से पहले राम मंदिर से जुड़ा बिल या ऑर्डिनेंस लाने का दबाव बना रहा था, लेकिन पुलवामा आतंकी हमले और एयर स्ट्राइक के बाद पहले ही बीजेपी ने राम मंदिर मुद्दे से अधिक राष्ट्रवाद की थीम पर चुनाव लड़ने के संकेत दे दिए थे। बीजेपी के सभी नेताओं को इसी मुद्दे पर अधिक से अधिक बात करने का संदेश भी दिया जा चुका है।

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