Wednesday , October 28 2020

‘अनलकी’ खिलाड़ी को खेलमंत्री ने दिया सम्मान, बोले- हमारे चैंपियन खिलाड़ी

नई दिल्ली

जब चैंपियन निराश हों, तो उनका मनोबल बढ़ाने के लिए उनकी पीठ थपथपाने की जरूरत होती है। इससे खिलाड़ी का हौसला मजबूत होता है और अपनी अगली परफॉर्मेंस में वे वही जी-जान लगा देते हैं, जो उनको विजेता बना दे। खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने ऐसा ही उदाहरण पेश किया है। गुरुवार को उन्होंने एशियाई खेलों की 10,000 मीटर दौड़ स्पर्धा में नाटकीय अंदाज में डिस्क्वॉलिफाइ होने वाले खिलाड़ी गोविंदन लक्ष्मणन को 10 लाख रुपये की राशि से सम्मानित किया। खेल मंत्रालय ने लक्ष्मणन को उतनी ही राशि दी है, जितनी उसने इन खेलों में ब्रॉन्ज मेडल हासिल करने वाले खिलाड़ियों को इनाम के रूप में दी है। इस दौड़ में लक्ष्मणन तीसरे स्थान पर थे, लेकिन तकनीकी आधार पर उन्हें डिस्क्वॉलिफाइ होना पड़ा।

हाल ही जकार्ता में संपन्न हुए एशियंस गेम्स की ऐथलेटिक्स की 10,000 मीटर दौड़ स्पर्धा से एक और ब्रॉन्ज मेडल आता, लेकिन तकनीकी आधार पर भारत को यह मेडल गंवाना पड़ा। भारत के गोविंदन लक्ष्मणन इस रेस में तीसरे स्थान पर थे। लेकिन अपनी दौड़ के दौरान वह भूलवश अपनी लेन से भटक गए और बाद में रेफरियों ने विडियो फुटेज देखकर उन्हें डिस्क्वॉलिफाइ कर दिया। लक्ष्णन के साथ-साथ पूरे देश के लिए यह छोटी सी भूल निराशाजनक रही। हालांकि खेल मंत्रालय ने इसके बावजूद लक्ष्णन की मेहनत और जज्बे की सराहना की है।

खेल मंत्री ने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी। अपने ट्वीट में राठौड़ ने लिखा, ‘एशियाई खेलों की 10,000 मीटर दौड़ स्पर्धा में गोविंदन लक्ष्मणन ने मेडल-विनिंग परफॉर्मेंस दी, लेकिन एक छोटी सी तकनीकी गलती से उन्हें डिस्क्वॉलिफाइ होना पड़ा।’

‘इसके बावजूद, वह हमारे लिए चैंपियन हैं और हम अपने चैंपियन के हैं। उनसे मिलना और उन्हें सम्मानित करना यह मेरे लिए गर्व का क्षण है।’ इस मौके पर खेल मंत्री ने लक्ष्मणन को 10 लाख रुपये का चेक दिया है। भारत ने इन खेलों में अब तक का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए अधिक पदक अपने नाम किए हैं। इन खेलों में भारत के नाम 15 गोल्ड, 24 सिल्वर और 30 ब्रॉन्ज मेडल समेत कुल 69 पदक मिले।

बता दें लक्ष्मणन ने अपनी रेस तीसरे स्थान पर रहते हुए 29 मिनट 44.91 सेकंड का समय निकाला था। इस दौड़ में वह बेहरीन के चानी हसन (गोल्ड मेडल) 28 मिनट 35.54 सेकंड और बेहरीन के ही चेरोबेन अब्राहम (सिल्वर मेडल) 29 मिनट 00.29 सेकंड के बाद तीसरे स्थान पर थे। लक्ष्मणन के बाद चीन के चांगहोंग झाओ चौथे स्थान पर थे, जिन्हें लक्ष्मणन के डिस्क्वॉलिफाइ होने के बाद तीसरा स्थान और ब्रॉन्ज मेडल मिला। भले ही लक्ष्मणन इस बार मेडल से चूक गए हों, लेकिन आगामी स्पर्धाओं में उनसे मेडल की उम्मीद होगी।

भारत को इस बार सबसे ज्यादा पदक ऐथलेटिक्स से ही मिले, जहां खिलाड़ियों ने सबको चौकाते हुए 7 स्वर्ण, 10 रजत और 2 कांस्य के साथ कुल 19 पदक अपने नाम किए। अगर यह पदक भी भारत की झोली में आता, तो फिर ऐथलेटिक्स से 3 कांस्य समेत भारत के कुल पदकों की संख्या 70 होती। इसके अलावा अगर लक्ष्मणन डिस्क्वॉलिफाइ नहीं हुए होते, तो 10,000 मीटर रेस में 20 साल बाद ब्रॉन्ज जीतने वाले वह पहले खिलाड़ी होते। इससे पहले 1998 बेंककॉक एशियाई खेलों में गुलाब चंद ने यह पदक अपने नाम किया था।

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