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दुती बोलीं- लोग कहते थे मैं लड़की नहीं हूं, लेकिन नहीं मानी हार

नई दिल्ली,

इंडिया टुडे माइंडरॉक्स-2018 के दौरान भारतीय खिलाड़ी का उत्साह देखते ही बना. शनिवार को स्पोर्ट्स सेशन ‘Ready, Steady, Aim : The Gold Rush’ के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का परचम लहराने वाले खिलाड़ियों ने अपने अनुभव साझा किए. इस मौके पर एक ही मंच पर टेबल टेनिस स्टार मनिका बत्रा, बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन, शूटर मेहुली घोष और उनके मेंटर और कोच जॉयदीप कर्माकर के अलावा मशहूर स्प्रिंटर दुती चंद की मौजूदगी बेहद रोमांचक रही.

पूरे सेशन को सीनियर एग्जीक्यूटिव एडिटर स्पोर्ट्स विक्रांत गुप्ता ने संचालित किया. मनिका बत्रा ने कहा, ‘पिछले एक-दो साल में हमारे भारतीय टेबल टेनिस खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया है. स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) से हमें बहुत स्पोर्ट मिला. एशियन गेम्स कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद सबसे मुश्किल टूर्नामेंट है और उसमें किसी एशियन को हराने का मतलब है ओलंपिक के लिए हम तैयार हैं.’

आईएएएफ ने 2014 में अपनी हाइपरएंड्रोगेनिजम नीति के तहत दुती को निलंबित कर दिया था, जिस वजह से उन्हें उस साल के राष्ट्रमंडल खेलों के भारतीय दल से बाहर कर दिया गया था. उन्होंने खेल पंचाट में यह मामला उठाया और आखिर में उनके पक्ष में फैसला आया.

दुती ने कहा, ‘2014 मेरे लिए बहुत बुरा साल था. लोग मेरे बारे में तरह-तरह की बातें करते थे. लोग कहने लगे थे दुती चंद लड़की नहीं है. और अब उसी लड़की ने वापसी की और देश के लिए पदक जीतने में सफल रही. यह मेरे लिए बड़ी सफलता है.’ अपने अगले लक्ष्य टोक्यो ओलंपिक-2020 के बारे में दुती ने कहा, ‘देश के लोगों का आशीर्वाद रहा, तो मैं जरूर पदक लेकर लौटूंगी.’

मेहुली घोष ने अभिनव बिंद्रा और अपने कोच जॉयदीप कर्माकर को अपना रोल मॉडल बताया. जॉयदीप ने कहा, ‘शूटिंग में रियो ओलंपिक के बाद काफी बदलाव आए. उन्होंने कहा, सोशल मीडिया को बंद करके लगातार प्रैक्टिस करना बहुत मुश्किल होता है, लेकिन फिर भी खिलाड़ी खुद पर काबू रखकर अपना काम करते हैं.’

दुती ने इंडिया टुडे से बातचीत के दौरान कहा, ‘मैंने कभी हार मानना नहीं सीखा है. बचपन से अभी तक लगातार चुनौतियों से लड़कर आगे बढ़ी हूं और हर परिस्थिति में प्रशिक्षण पर ध्यान देती हूं. यही वजह है कि मुझे एक के बाद एक सफलता मिलती रही हैं.’

दुती ने कहा, ‘विदेशों में प्रशिक्षण लेना इसलिए जरूरी है, क्योंकि 100 और 200 मीटर दौड़ में सबसे ज्यादा प्रतिस्पर्धा होती है और छोटी-छोटी तकनीकी चीजों से काफी फर्क पड़ता है जिसमें मुझे सुधार करना होगा.’

दुती ने कहा, ‘सौ मीटर दौड़ में पदक हासिल करने के बाद ओडिशा के मुख्यमंत्री ने डेढ़ करोड़ रुपये इनामी राशि की घोषणा की जिससे मेरा हौसला बढ़ा और मैंने सोचा कि 200 मीटर में जीत गई, तो इनामी राशि में और बढ़ जाएगी. इसलिए मैंने इसमें और अधिक जोर लगाया.’

17 साल के लक्ष्य सेन ने कहा, ‘चाइना बैडमिंटन का पावर हाउस है, लेकिन हाल में भारत के खिलाड़ियों ने पुरुष और महिला सिंगल्स में उन्हें काफी टक्कर दी है. अब चीजें काफी बदल चुकी हैं और उन्हें विश्वास है कि वे चीन के खिलाड़ियों को हरा सकते हैं.

सिंधु और साइना खेल के प्रति काफी समर्पित हैं. साइना ट्रेनिंग के दौरान किसी से बात नहीं करतीं. सिंधु दीदी की फाइटिंग स्पिरिट काफी अच्छी है. मनिका बत्रा ने कहा कि सरकार से मदद, सिंधु और साइना जैसा दृढ़संकल्प हमें चीन और एशियाई खिलाड़ियों से मुकाबले के लिए प्रेरित करता है. हमें फिटनेस पर काम करना होगा.

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