मंदिर-मस्जिद में फूल बेचकर नैशनल लेवल तक पहुंचे कबड्डी प्लेयर ललित

फरीदाबाद

अपने हौसले और लगन की बदौलत परेशानियों को पीछे छोड़ते हुए फूलों से रंगत चुराकर कबड्डी खिलाड़ी ललित कुमार अपने सपनों में रंग भर रहे हैं। ग्रेटर फरीदाबाद के गांव मवई के ललित 11वीं में पढ़ रहे हैं और परिवार का पेट भरने के लिए फूल भी बेचते हैं। इसके बाद भी मात्र 4 महीने की कबड्डी प्रैक्टिस में वह नैशनल स्तर पर खेल चुके हैं। उनके शानदार खेल को देखकर कबड्डी कोच विजयपाल शर्मा भी हैरत में पड़ गए। ललित कुमार ने घरेलू कार्य, पढ़ाई, खेल सब में सामंजस्य कायम रखा है। वह इंटरनैशनल स्तर पर खेलकर देश का नाम रोशन करना चाहते हैं, इसलिए प्रैक्टिस में वह कभी पीछे नहीं रहते।

बचपन से था कबड्डी का शौक
17 वर्षीय ललित कुमार ओल्ड फरीदाबाद के सीनियर सेकंडरी स्कूल में 11वीं के छात्र हैं। ग्रेटर फरीदाबाद के गांव मवई की महेंद्र कॉलोनी में रहने वाले ललित कुमार को बचपन से ही कबड्डी का शौक था, लेकिन बेहतर प्लैटफॉर्म देने वाला कोई नहीं मिला। करीब 4 महीने पहले उन्हें किसी के माध्यम से पता चला कि सेक्टर-12 खेल परिसर में इंटरनैशनल स्तर पर खेल चुके विजयपाल शर्मा निशुल्क कुश्ती व कबड्डी का प्रशिक्षण देते हैं। वह विजयपाल शर्मा से मिलने पहुंचे तो विजयपाल उनकी लगन व मेहनत को देखते हुए ट्रेनिंग देने के लिए तैयार हो गए।

फूल बेचकर करते हैं परिवार की मदद
कोच को जब पता चला कि ललित अपने बुजुर्ग ममी-पापा की मदद के लिए मंदिर, मस्जिद व पीरबाबा पर फूल, अगरबत्ती व प्रसाद बेचते हैं और पढ़ाई भी करते हैं तो उन्होंने प्रशिक्षण देने के लिए हामी भर ली। फरवरी 2018 में ललित ने ट्रेनिंग लेनी शुरू कर दी। जून में मेरठ में आयोजित नैशनल कबड्डी चैंपियनशिप में ललित को हरियाणा टीम की ओर से खेलने का मौका मिला। ललित बेहतरीन रेड करने के साथ राइट कॉर्नर भी खेलने वाले खिलाड़ी हैं। हरियाणा टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में जगह बनाई और हरियाणा टीम का यूपी की टीम से मुकाबला हुआ। इसमें ललित का शानदार प्रदर्शन रहा। उन्होंने अकेले ही 8 पाइंट लेकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया, लेकिन टीम को दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा।

ललित 3 दिन लगाते हैं दुकान
ललित कुमार बताते हैं, मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को परिवार के साथ प्रसाद, अगरबत्ती और फूल की दुकान लगाता हूं। इस दिन स्कूल की छुट्टी करता हूं। ममी-पापा बुजुर्ग हो चुके है, इसलिए पढ़ाई करने के साथ ही उनकी मदद भी करता हूं। फूल बेचकर सेक्टर-12 खेल परिसर तक आने-जाने का खर्चा निकालता है। मैं अपने परिवार पर बोझ बनना नहीं चाहता।

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