नई दिल्ली
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट सीरीज का दूसरा मैच दिल्ली में खेला जा रहा है। मैच के पहले दिन ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी 263 रनों पर सिमट गई। मेहमान टीम के कप्तान पैट कमिंस ने पहली बल्लेबाजी करने का फैसला किया। उनके बल्लेबाजों ने अच्छी शुरुआत की। लेकिन मोहम्मद शमी के साथ ही रविचंद्रन अश्विन और रविंद्र जडेजा ने विकेट लेकर उनकी पारी को समेट दिया।
जडेजा के हाथ से गया विकेट
वैसे तो रविंद्र जडेजा ने ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी में 3 विकेट लिये। लेकिन उनके 4 विकेट हो सकते थे। ऑस्ट्रेलिया की आखिरी जोड़ी क्रीज पर थी। जडेजा की गेंद पर अश्विन ने पीटर हैंड्सकॉम्ब का कैच लपक लिया। भारतीय खिलाड़ी पवेलियन की तरफ जाने लगे। लेकिन इसी बीच अंपायर माइकल गॉफ ने नो-बॉल का इशारा कर दिया। जडेजा का पैर क्रीज से आगे था और इसी वजह से हैंड्सकॉम्ब बच गए। उस समय ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 256 रन था। हैंड्सकॉम्ब ने अगली ही गेंद पर चौका मार दिया।
पिछले मैच में भी हुआ ऐसा
यह पहला बार नहीं है जब नो बॉल की वजह से रविंद्र जडेजा विकेट लेने से चूके हैं। नागपुर टेस्ट में भी ऐसा हुआ था। तब भी ऑस्ट्रेलिया की आखिरी जोड़ी क्रीज पर थी। जडेजा ने स्मिथ को बोल्ड किया लेकिन अंपायर ने उसे नो बॉल करार दे दिया। हालांकि इसका असर मैच के नतीजे पर नहीं पड़ा। लेकिन अगर मैच की परिस्थिति अलग होती तो यह गलती भारत पर भारी पड़ सकती थी।
टीम पर कई बार पड़ चुका भारी
गेंदबाजों का नो-बॉल फेंकना भारतीय टीम पर कई बार भारी पड़ चुका है। 2017 चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल में जसप्रीत बुमराह ने फखर जमान को आउट किया था लेकिन उनका पैर क्रीज से आगे निकल गया। फखर ने शतक जड़ा और भारत मैच हार गया। उससे पहले 2016 टी20 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में भी नो बॉल की वजह से भारत विकेट लेने का मौका चूका था।
