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Wednesday, April 15, 2026
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सचिन अपने खराब दौर में भी तोप थे, विराट कोहली उनसे ये 5 चीजें सीख कर सकते हैं कमबैक

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क्रिकेट की दुनिया के किंग कहे जाने वाले भारतीय रन मशीन विराट कोहली खराब दौर से गुजर रहे हैं। यह ऐसा वक्त है, जो हर किसी की जिंदगी में आता है। एक बार नहीं, कई बार आता है। इस तरह के दौर से महान सचिन तेंदुलकर भी गुजरे, लेकिन उन्होंने इस तरह के फेज को इस तरह से संभाला, जिससे उनके ऊपर कभी ऐसे सवाल नहीं उठे कि उन्हें टीम से बाहर करने की कोई मांग करे या उनके क्रिकेट करियर के अंत की बात की जाय। वह अपने खराब दौर में भी खतरनाक थे।

यह अलग बात है कि महान सचिन तेंदुलकर इस बात को समझ रहे थे कि यह उनका सबसे खराब दौर है। यही वजह है कि उन्होंने उससे निकलने के लिए कई वर्कआउट अपनाए। खुद पर काम किया। अब कोहली की तुलना महान सचिन से होती है। ऐसे में सबसे पहले तो समझते हैं कि सचिन तेंदुलकर मुश्किल वक्त में भी कितने रन बनाए और विराट कोहली उनके आगे कहां हैं।

सचिन तेंदुलकर के लिए 2003-04 से 2006-07 सबसे मुश्किल दौर था। 2005-06 और 2006-07 यही दो मौके थे उनका टेस्ट औसत 50 से ड्रॉप हुआ। इस दौरान उन्होंने क्रमश: 27.91 और 33.16 की औसत से रन बनाए। विराट कोहली 2011 से 2019 तक पावरहाउस थे। उन्होंने 84 टेस्ट में 7202 रन ठोके। लेकिन 2020 के बाद से 33 मैचों में 1833 रन ही बनाए हैं।

दूसरी ओर, महान सचिन तेंदुलकर ने अपने खराब दौर में भी सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर नाबाद 241 रन ठोक डाले थे। उनके नाम साउथ अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में भी शतक थे। विराट कोहली के नाम पिछले चार सालों में दो शतक हैं। खैर, आइए समझने की कोशिश करते हैं कि जब सचिन तेंदुलकर मुश्किल वक्त से गुजर रहे थे तो किस तरह से वापस लौटे थे और विराट कोहली उनसे क्या कुछ सीख कर वापसी कर सकते हैं…

मुश्किल वक्त में धैर्य जरूरी, पिच पर वक्त बिताएं
विराट कोहली के साथ ऐसा नहीं है कि वह शॉट्स मिस कर रहे हैं। उनके बल्ले से अभी भी जो शॉट्स निकल रहे हैं वो क्लीन हैं। हालांकि, सवाल उनके शॉट सिलेक्शन पर जरूर हो सकता है। महान सचिन तेंदुलकर की कवर ड्राइव का भला कौन दिवाना नहीं है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया में उन्होंने दोहरा शतक लगाने के दौरान एक भी कवर ड्राइव नहीं लगाए। वह शॉट उनकी कमजोरी साबित हो रहा था। कोहली को भी कुछ शॉट्स को छोड़ना होगा। मैदान पर वक्त बिताना होगा। बेंगलुरु में खेली गई दूसरी पारी में 70 रनों की पारी खेली थी। मैदान पर अगर वह वक्त बिताएंगे तो इसमें कोई शक नहीं की बड़ी पारी खेल सकते हैं।

खेल में बदलाव करना, नए शॉट्स पर काम करना
महान सचिन तेंदुलकर ने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर बाउंस से बचने के लिए अपर कट खेलना शुरू किया था। पैडल स्वीप (बैक में दिक्कत के दौरान) भी उनके खराब दिनों की ही इजात है। उसी तरह से विराट को उन शॉट्स पर काम करने की जरूरत है, जो विपक्षी टीम के गेंदबाजों को हैरान करे। ऐसा नहीं है कि वह नहीं कर सकते हैं। शायद ही कोई क्रिकेट बुक शॉट हो, जो वो नहीं खेलते हैं। उन्हें प्रेडिक्टेबल होने की जगह विपक्षी टीम के लिए थोड़ा सरप्राइज पैकेज बनना होगा।

किसी ऐसे व्यक्ति से बात करें तो सही सलाह दे सके
महान सचिन तेंदुलकर ने बताया था कि वह 2007 में क्रिकेट से रिटायर होना चाहते थे, लेकिन विवियन रिचर्ड्स ने उनसे करीब आधा घंटा फोन पर बात की। उन्होंने अपने क्रिकेट करियर को उदाहरण देते हुए सचिन को समझाया। इस बातचीत के बाद सचिन अपने करियर को न केवल लंबा करने में कामयाब रहे, बल्कि 2011 विश्व कप जीता। 2010 में वनडे में पहला दोहरा शतक लगाने वाले पुरुष बल्लेबाज बने। यहां कोहली को भी किसी ऐसे से बात करनी होगी, जो उन्हें समझता हो। वह सही सलाह दे सके। संभव है कि महान सचिन बेहतर हों। हो सकता है कोहली खुद भी बात कर रहे हों।

अच्छे दिनों को कंपेयर करें, पता करें कहां गलती हो रही
विराट कोहली ऐसे बल्लेबाज हैं, जो गेंदबाज को डॉमिनेट करने की कोशिश करते हैं। हाल-फिलहाल में भी उन्होंने इस काम को बखूबी अंजाम दिया है, लेकिन ये सरप्राइज वाले मौके कम रहे हैं। उन्हें अपने अच्छे दिनों से सीखना होगा कि वह तब क्या करते थे और आज उसे करने में कहां गलती कर रहे हैं। उनके पास जब सही सवाल होंगे तो जवाब आसान होगा। ये वो सवाल हैं, जो संभव है कि किसी रिकॉर्डिंग से उन्हें पता नहीं चले। जैसे सचिन तेंदुलकर को एक वेटर ने सलाह दी थी कि एल्बो गार्ड की वजह से उन्हें बैट घुमाने में दिक्कत हो रही है। इसके बाद सचिन ने एल्बो गार्ड को रिडिजाइन कराया था। वह आज भी उस वेटर के कर्जदार हैं।

विपक्षी टीम को समझें, गलतियों को दोहराने से बचें
सचिन तेंदुलकर ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज शुरू होने पहले प्लास्टिक की गेंद से प्रैक्टिस करते थे और पैड अप होकर धूप में खड़े रहते थे। इस बारे में जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा था कि वह ऐसा कंडीशन को समझने के लिए कर रहे हैं। कोहली को भी समझना होगा कि विपक्षी टीम के खिलाफ उसके गेंदबाजों की प्लानिंग का सटीक अंदाजा लगाकर खुद को दो कदम आगे रखना होगा। उन गलतियों को दोहराने से बचना होगा, जो वो अक्सर कर जाते हैं।

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