अयोध्या: राम मंदिर निर्माण के लिए धर्मसभा करेगी वीएचपी

अयोध्या

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) धर्मसभा का आयोजन करने जा रही है। 25 नवंबर को होने वाली इस धर्मसभा में एक लाख कार्यकर्ताओं के जुटने की संभावना है। कार्यक्रम के आयोजन से पहले व्यवस्थाओं का जायजा लेने वीएचपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय अयोध्या पहुंचे। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘सरकार तो यही (बीजेपी) आएगी लेकिन 70 साल से देश को बर्बाद करने वालों की जड़ों में मट्ठा डालना है।’

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय ने कहा कि हमारा उद्देश्य 70 साल से देश को बर्बाद करने वालों की जड़ों में मट्ठा डालना है। सरकार तो यही (बीजेपी) आएगी। उन्होंने कहा, ‘इस देश के अंदर एक भी बुराई बताइए, जो कांग्रेस की देन नहीं है। देश की सभी बुराइयों की पैदाइश कांग्रेस से हुई है।’ फैजाबाद सांसद लल्लू सिंह ने कहा, ‘राकेश सिन्हा प्राइवेट बिल लाने की बात कह रहे हैं। हम लोग संगठन द्वारा तय गाइडलाइन पर काम करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर बनने से पहले अयोध्या को भव्य स्वरूप दिया जा रहा है। पूरी दुनिया चाहती है की भव्य राम मंदिर बने।

वीएचपी ने तय किया नारा- जल्दी सुनो, फैसला करो
वीएचपी नेता चंपत राय ने 25 नवंबर को होने वाली धर्मसभा के मद्देनजर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने के बाद कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। चंपत राय ने कार्यक्रम स्थल पंचकोसी परिक्रमा मार्ग स्थित बड़ा भक्तमाल के ग्राउंड को देखा और उसे फाइनल किया। एनबीटी से बात करते हुए चंपत राय ने कहा, ‘विराट महासभा में नारा होगा जल्दी सुनो फैसला करो।’ उन्होंने यह भी कहा कि 70 साल से न्यायालय में मामला लटका है और 8 साल सर्वोच्च न्यायालय में हो गए। 125 करोड़ हिंदू समाज की प्राथमिकता अगर न्यायालय के लिए गंभीर नहीं है तो समाज को कुछ ना कुछ सोचना पड़ेगा इसीलिए देश के 500 जिलों में सभाओं के माध्यम से जनता अपनी प्राथमिकताओं को बताएगी।

कपिल सिब्बल पर साधा निशाना
चंपत राय ने कहा कि भावनाओं को नजरंदाज करना अच्छी बात नहीं है। कांग्रेस के नेता और वकील कपिल सिब्बल पर निशाना साधते हुए कहा, ‘छल-कपट के जरिए कानून की बुद्धि का दुरुपयोग किया गया।’ यही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि कपिल सिब्बल द्वारा डेट लेने की बात नहीं की होती तो सितंबर तक मामला तय हो जाता। इस्लाम में मस्जिद आवश्यक है कि नहीं इसमें 5 महीने निकाल दिए गए। लोगों ने वकालत का दुरुपयोग किया है। चेतावनी भरे लहजे में उन्होंने कहा, ‘भगवान राम का मंदिर जल्द से जल्द बनना प्रारंभ होना चाहिए और उनकी बाधाएं दूर करने में अगर संवैधानिक संस्थाएं अपने कर्तव्य का निर्वहन करने में सकुचाती हैं तो विधायिका का दायित्व है कि समाज की भावनाओं का आदर करें। लोकतंत्र में समाज की अभिव्यक्ति विधायिका के माध्यम से है।’

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