Tuesday , September 22 2020

‘आठ साल गुजरात में रहे और एक दिन में सब कुछ उजड़ गया’

लखनऊ

गुजरात में 14 महीने की बच्ची से रेप के मामले के बाद उत्तर भारतीयों पर हमलों से उन में इस कदर डर बैठ गया है कि वे अपने घर लौटने लगे हैं। उत्तर प्रदेश में अपने घरों में लौटे लोगों ने अब राहत की सांस ली है। हालांकि उनके मन की दहशत अब भी कम नहीं हुई है। उन्हें गुजरात में उत्तर भारतीयों के साथ किया जा रहा व्यवहार भूलाए नहीं भूल रहा। ऐसे ही कुछ पीड़ित परिवारों ने अपन दर्द बयां किया। ‘बस जान बचाकर परिवार के साथ भागे’ गांधीनगर से 8 अक्टूबर को देर रात एक परिवार हरदोई पहुंचा। परिवार पिछले 8 साल से गुजरात में काम कर रहा था। हजारों रुपये किराया देकर वह बस से सारे सामान के साथ अपने गांव खेतुई आ गया है।

भोला अपनी पत्नी अर्चना के अलावा नौ लोगों के साथ गांधीनगर में रहता था। भोला इलेक्ट्रिक उपकरणों के पार्ट्स की रीपेयरिंग करता था। आठ साल की मेहनत के बाद काम चल निकला था। भोला बताते हैं कि हम सलतेज गांव में रहते थे। सब कुछ अच्छा चल रहा था लेकिन माहौल अचानक से बदल गया। गुजराती आकर कहते थे कि यूपी-बिहार वाला कोई नहीं चाहिए …। जान बचानी थी, इसलिए लाखों का सामान छोड़कर रातों-रात वहां से भाग आए। बस स्टेशन पर भी डंडे से लोगों को पीटा जा रहा था। पुलिस भी मदद नहीं कर रही है। मैं अपने परिवार के साथ किसी तरह बस से आगरा पहुंचा, तब जाकर जान में जान आई। ऐसा नहीं है कि सारे गुजराती उत्तर भारतीयों को मारने के लिए ही घूम रहे थे, कई भले गुजरातियों की वजह से ही मैं अपने परिवार के साथ घर लौट पाया हूं।

’24 घंटे में गुजरात नहीं छोड़ा तो बुरी तरह पीटेंगे ‘ जैसे- तैसे गुजरात से जान बचाकर चार दिन पहले घर लौटे मीनेश ने बताया कि नौकरी छूटने का दुख तो है, लेकिन मैं ऐसा दुख झेलने वाला अकेला नहीं हूं, मेरे साथ 22 और लोग जान बचाकर यूपी लौट आए हैं। पुलिस के सामने गुजराती हम उत्तर भारतीयों को

बेरहमी से पीटते हैं लेकिन पुलिस मूकदर्शक बनी रहती है। ‘यूपी वापस लौट जाने की धमकी मिली ‘ मीनेश कलौल शहर में मीटर बॉक्स बनाने वाली फैक्ट्री में काम करते थे। फैक्ट्री कैम्पस में ही वह अपने दो भाइयों के साथ रहते थे। उन्होंने बताया कि 28 सितंबर से माहौल बिगड़ना शुरू हुआ। 4 अक्टूबर को हम सभी को 24 घंटे में जगह छोड़कर यूपी वापस लौट जाने की धमकी मिली। कहा कि जो नहीं गए, उन्हें बुरी तरह पीटा जाएगा। उन्होंने बताया कि भय और आतंक का माहौल है। हम सभी ने बसों से यहां तक का सफर तय किया।

‘हमें पुलिस के सामने पीटा जा रहा था, लेकिन वह बचाने नहीं आई ‘ गुजरात से 10 अक्टूबर को सुलतानपुर-अहमदाबाद एक्सप्रेस सैकड़ों मुसाफिरों को लेकर अमेठी के निहालगढ़ स्टेशन आई। इनमें करीब 15 परिवार ऐसे थे, जिनके चेहरे स्टेशन पर उतरते ही खिल उठे। ये सभी वे परिवार थे, जो गुजरातियों के अत्याचार से परेशान होकर वापस अपने घर लौट आए थे। अमेठी के फुलवारी गांव निवासी रामआसरे बोले कि ईश्वर की कृपा से हम बच गए, वहां गुजराती तो भेड़िये बन चुके हैं। केवल इतना पूछते हैं कि तुम उत्तर भारतीय हो या गुजराती, भूल से भी अगर यूपी और बिहार का बता दिया तो मारने लगते हैं। ये सब पुलिस के सामने भी हो रहा है लेकिन वह मदद नहीं कर रही है।

‘एक वक्त ही रोटी खाएंगे… पर दोबारा गुजरात कमाने नहीं जाएंगे’ गौरीगंज के रामकेवल ने बताया कि महिलाओं को भी पीटा जा रहा है। बोले कि एक वक्त ही रोटी खाएंगे, मुफलिसी में जीवन बिता लेंगे, लेकिन अब दोबारा गुजरात कमाने नहीं जाएंगे।

‘नाम बताते ही हमें वो पीटने लगे’ तातोमुरैनी गांव निवासी इकबाल ने बताया कि वह फैक्ट्री से घर आ रहा था, तो सड़क पर भीड़ देखी। एक गुजराती ने उसका नाम पूछा, नाम बताने के बाद उसे पीटने लगे। वह समझ ही नहीं पाया कि उसे क्यों मारा जा रहा है। किसी तरह जान बचाकर वह कमरे पर आया, तो पता चला कि उत्तर भारतीयों को भगाया जा रहा है।

‘यूपी का नाम सुनते ही बसों से उतार दिया’ गुजरात में हिंसक माहौल से यूपी-बिहार के मजदूरों का पलायन जारी है। 10 अक्टूबर की सुबह 8:15 बजे कैंट स्टेशन पर उधना एक्सप्रेस से पूर्वांचल के करीब 500 मजदूर उतरे। उनके चेहरों पर दहशत साफ देखी जा सकती थी। गुजरात के हालात पूछते ही उनकी आंखें भर आईं, बोले- स्थिति बेहद खराब है। शहर से कहीं ज्यादा बाहरी इलाकों में दहशत है। गुजरात के उधना स्टेशन से दानापुर तक जाने वाली उधना एक्सप्रेस पलायन करने वाले मजदूरों से खचाखच भरी रही।

10 साल से गुजरात में मूंगफली बेचने वाले बलिया के अशोक पांडेय ने बताया कि उन्होंने वहां अच्छे दोस्त बनाए और सबके सुख-दुख में साथ रहे, लेकिन कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि ऐसे भी दिन देखने पड़ेंगे। गुजरात के लोग ‘कढ़ुआ (यूपी वाले) भगाओ-देश बचाओ’ का नारा लगा रहे हैं। मुगलसराय के किशोर, अजीत ने बताया कि हालात बिगड़ने पर कुछ कंपनियों के लोग अपने यहां कार्यरत मजदूरों को बसों में भरकर बाहर भेज रहे हैं। इन बसों को जगह-जगह रोककर लोगों को जबरन उतारा जा रहा है। अहमदाबाद में तो ऑटो वाले यूपी का पता चलने पर बैठाने से इनकार कर रहे हैं।

Did you like this? Share it:

About editor

Check Also

बिहार में क्लोन ट्रेनों की शुरुआत, किराया बढ़ने से यात्रियों में नाराजगी

समस्तीपुर, भारतीय रेलवे ने 21 सितंबर से नई क्लोन ट्रेनों को चलाने का ऐलान किया …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)
104 visitors online now
31 guests, 71 bots, 2 members
Max visitors today: 150 at 12:03 am
This month: 227 at 09-18-2020 01:27 pm
This year: 687 at 03-21-2020 02:57 pm
All time: 687 at 03-21-2020 02:57 pm