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… इसलिए कर्नाटक के विधायक हैं देश में सबसे अमीर

बेंगलुरु

जब इस साल मई में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के वक्त राजनीतिक दलों ने टिकट बांटे, तब रियल एस्टेट, शिक्षा और खनन क्षेत्रों से आने वाले उम्मीदवारों के बीच नजदीकी मुकाबला देखने को मिला था। एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि कर्नाटक में विधायक दूसरे राज्यों के मुकाबले ज्यादा अमीर हैं। असोसिएशन फॉर डेमोक्रैटिक रिफॉर्म्स और नैशनल इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट के मुताबिक, 222 में से 90 प्रतिशत विधायकों की सालाना औसतन आय 1.11 करोड़ है जो देश में सबसे अधिक है।

करीब 65 विधायक रियल एस्टेट, 30 खनन और ग्रैनिट जबकि 25 शिक्षण संस्थानों से जुड़े हुए हैं। बेंगलुरु और आसपास के इलाकों में बढ़ रहा रियल एस्टेट का काम बेल्लारी में खनन के काम से आगे निकल गया है। बेंगलुरु में 28 विधायकों में से 27 रियल एस्टेट बैकग्राउंड से आते हैं। इनमें से इंडस्ट्री मंत्री केजे जॉर्ज, विजयनगर के विधायक और पूर्व मंक्षी कृष्णाप्पा और बोमनहल्ली विधायक सतीश रेड्डी बड़े नाम हैं। बेल्लारी के खनन व्यापारियों में से बीजेपी के नेता बी श्रीरामुलु और कांग्रेस विधायक आनंद सिंह और बी नागेंद्र हैं।

आर्थिक स्थिति पर निर्भर करते हैं टिकट
शिक्षा के क्षेत्र में उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर, मंत्री डीके शिवकुमार, आरवी देशपांडे, पूर्व मंत्री शामानुर शिवशंकरप्पा और बीजेपी अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा और विधान परिषद के चेयरमैन बसवराज होरट्टी आते हैं। राजीतिक विश्लेषक संदीप शास्त्री का कहना है कि टिकटों का बंटवारा उम्मीदार की आर्थिक स्थिति पर निर्भर करता है। इसके अलावा जीत की क्षमता इस बात से तय होती है कि उम्मीदवार कितना खर्च कर सकता है।

अपने बिजनस के लिए लड़ते हैं चुनाव
कर्नाटक इलेक्शन वॉच के गुरुराज बुध्या का हना है कि बेंगलुरु के विधायकों के इस फेहरिस्त में सबसे ऊपर आने से यह पता चलता है कि चुनावों में अमीरों को तरजीह दी जाती है। वहीं, मार्स रियल्टी में पार्टनर प्रशांत संबर्गी ने बताया कि कई बार इन क्षेत्रों के लोग अपनी संपत्ति बचाने के लिए और कभी व्यापार से जुड़ी नीति को प्रभावित करने के लिए चुनाव लड़ते हैं।

शराब के बाद रियल एस्टेट का दबदबा
लंबे समय तक कर्नाटक की राजनीति लिकर लॉबी कंट्रोल करती थी। हालांकि, कर्नाटक स्टेट बेवरेजेस कॉर्पोरेशन लिमिटेड के बनने के बाद साल 2000 से इसका असर कम हो गया। ग्रैनिट, शिक्षा और खनन क्षेत्र का असर बढ़ने लगा लेकिन रेड्डी भाइयों को हुए नुकसान का असर खनन पर भी पड़ा। रियल एस्टेट की कीमतों के बढ़ने से यह लॉबी ताकतवर हो गई है।

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