Wednesday , October 21 2020

जिंदगी की जंग हारे आईपीएस अधिकारी सुरेंद्र दास, अस्पताल में तोड़ा दम

कानपुर

जहर खाकर आत्महत्या की कोशिश करने वाले कानपुर के एसपी सुरेंद्र दास ने कई दिन तक जिंदगी और मौत के बीच झूलने के बाद आखिरकार रविवार को दम तोड़ दिया। उनकी हालत शनिवार को बेहद बिगड़ गई थी जिसके बाद डॉक्टरों ने उनका इमरजेंसी ऑपरेशन किया था। ऑपरेशन सफल रहा था लेकिन रविवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। अगस्त में उन्हें कानपुर में एसपी ईस्ट के पद पर पोस्टिंग मिली थी।

रीजेंसी अस्पताल के सीएमओ डॉ राजेश अग्रवाल ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि सुरेंद्र दास को बचाया नहीं जा सका। उन्होंने बताया कि उनके दिल ने काम करना बंद कर दिया और 12:19 मिनट पर उनकी मृत्यु हो गई। डॉ राजेश ने बताया कि सुबह से जद्दोजहद जारी थी कि उनका दिल साथ दे दे लेकिन शरीर से जितना खून चाहिए था, वह नहीं मिल सका।

सीएम ने व्यक्त किया शोक
राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनकी मौत पर शोक व्यक्त किया है। सीएमओ की ओर से किए गए ट्वीट में कहा गया है- ‘सीएम ने दिवंगत आत्मा की शांति की कामना करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।’ यूपी डीजीपी ओपी सिंह ने भी ट्वीट कर सुरेंद्र के देहांत पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने लिखा- ‘युवा और मेहनती आईपीएस ऑफिसर सुरेंद्र दास की असमय और दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु से बेहद दुखी हूं।’ उन्होंने परिवार के साथ भी संवेदना प्रकट की।

शादीशुदा जीवन से परेशान होकर उठाया कदम
गौरतलब है कि शादीशुदा जिंदगी में संतुलन न बैठा पाने के कारण उन्होंने सल्फास खा लिया था। फरेंसिक टीम को उनके कमरे से सल्फास के तीन पाउच मिले थे। जन्माष्टमी के दिन उनकी पत्नी डॉ रवीना ने नॉनवेज बर्गर मंगाकर खाया था। इस पर दोनों में झगड़ा हुआ था। बीते 40 दिनों से दास ने अपनी मां से बात नहीं की थी। उनके पिता फौज में थे। जबकि मां, भाई और भाभी लखनऊ में रहते थे।

मुंबई से आए थे डॉक्टर
उन्होंने करीब 25-30 ग्राम सल्फास खाया होगा। उनके कमरे से एक सूइसाइड नोट भी मिला था जिसमें पति-पत्नी के बीच झगड़े की बात सामने आई थी। उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया था और वेंटिलेटर पर रखा गया था। उनके इलाज के लिए मुंबई से डॉक्टर बुलाए गए थे। दास के शरीर को सहारा देने के लिए एक्मो मशीन लगाई गई थी। यह मशीन फेफड़ों और दिल को आराम देकर मरीज को बाहर से सपॉर्ट करती है।

बैच के साथियों ने उठाया इलाज का खर्च
सल्फास की ज्यादा मात्रा के कारण दास की किडनियों ने भी काम करना बंद कर दिया था। इसके बाद उनकी कई बार डायलिसिस की गई थी। बताते हैं एक्मो मशीन मंगाने में आए करीब 20 लाख रुपये के खर्च को उनके 2014 बैच के साथियों ने उठाया था। यूपी पुलिस से भी काफी आर्थिक मदद भेजी गई थी। हालांकि, कानपुर के एसएसपी अनंत देव ने बताया है कि दास के परिवार ने अब तक किसी तरह का कोई आरोप नहीं लगाया है। उन्होंने बताया है कि सूइसाइड नोट से भी कुछ साफ नहीं है।

इंटरनेट पर सर्च किए थे मौत के तरीके
लगातार गंभीर हालत स्थिर रहने के बाद शनिवार को उनके एक पैर में ब्लड सर्कुलेशन रुक गया था। वहीं उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। डॉक्टरों ने इमरजेंसी ऑपरेशन कर उनके पैर में जमा खून का थक्का निकाल दिया था। इससे पहले कानपुर के एसएसपी अनंत देव ने बताया था कि शादीशुदा जिंदगी में संतुलन बैठाने में दास और उनकी पत्नी को दिक्कतें आ रही थीं। इंटरनेट पर दास ने आत्महत्या के तरीके सर्च किए थे।

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