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तमिलनाडु: 12वीं सदी की बुद्ध की मूर्ति में बांधे जा रहे जानवर

चेन्नै

तमिलनाडु के विल्लूपुरम जिले के कल्लाकुरिचि गांव में 12वीं सदी की बनी गौतम बुद्ध की मूर्ति बदहाल अवस्था में पड़ी है। मूर्ति के ऐतिहासिक महत्व से अनजान लोग इस मूर्ति का उपयोग जानवर बांधन के लिए कर रहे हैं। तीन महीने पहले ऐतिहासिक विरासत पर अध्ययन करने वाले पोन वेंकटेशन जब इस गांव में पहुंचे तो उन्हें यह मूर्ति धान के खेत में दिखी थी। दोबारा जब वह यहां फसल कटने के बाद आए तो देखा कि मूर्ति के गले में रस्सी बांधकर उससे जानवर बांधे गए थे।

12वीं सदी की बनी यह मूर्ति दो प्रसिद्ध मंदिरों अर्धनारीश्वरार और पेरुमल के पास ही है। सलेम हिस्टोरिकल रिसर्च सेंटर के अध्यक्ष वेंकटेशन कहते हैं, ‘जब मुझे यह मूर्ति धान के खेत में छिपी सी मिली तो मुझे बुरा लगा। खड़ी फसल के कारण मैं इसके पास नहीं जा सका। यहां के लोग इस ऐतिहासिक मूर्ति और कला का महत्व नहीं जानते इसलिए इसमें लगातार जानवर बांधते हैं।’

गौरतलब है कि आज के तमिलनाडु में बुद्धिज्म की शुरुआत 300 ईसा पूर्व के आसपास हुई और चोल वंश और 16वीं शताब्दी तक रही। आसपास के मंदिरों में मिले तमिल शिलालेखों के मुताबिक, इस गांव का नाम पोन परासिना मानकोवरयान महाताई नत्तू था। यहां बुद्ध की मूर्ति मिलने से इस बात की आशंका जताई जा रही है कि बौद्ध धर्म यहां काफी समृद्ध रहा होगा।

वेंकटेशन आगे कहते हैं, ‘मूर्ति की इस दशा के लिए गांववालों को दोषी नहीं बता सकते हैं क्योंकि वे इससे अनभिज्ञ हैं। मैं राज्य के पुरातत्व विभाग को एक पत्र लिखूंगा कि वे इसका ध्यान रखें। जरूरत है कि इसपर तुरंत कार्रवाई की जाए।’

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