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तेलंगाना: वोटिंग के दिन अमावस्या, चंद्रशेखर राव के लिए अपशकुन?

हैदराबाद

आंध्र प्रदेश से बंटवारे के बाद अलग राज्य का दर्जा पा चुके तेलंगाना में विधानसभा चुनाव की तारीख का ऐलान चुनाव आयोग कर चुका है। लेकिन चुनाव की इस तारीख से ज्योतिष और शकुन-अपशकुन का खास ध्यान रखने वाले मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के लिए परेशानी बढ़ गई है। 7 दिसंबर को अमावस्या का दिन पड़ रहा है और राव के लिए चिंता का सबब भी यही है।

राजनीतिक विशेषज्ञों और सीएम राव के करीबियों के अनुसार वह ज्योतिष विद्या, अंक शास्त्र और वास्तु में गहरी आस्था रखते हैं। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि सत्तारूढ़ पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति 7 दिसंबर की इस तारीख को शुभ शगुन नहीं मान रही है। बता दें कि तेलंगाना में एक ही चरण में मतदान होगा। मतदान की तारीख 7 दिसंबर है। 11 दिसंबर को नतीजे घोषित किए जाएंगे।

हालांकि टीआरएएस के सांसद बूरा नरसैया गौड़ ने इस बात को खारिज किया। उन्होंने कहा, ‘यह सब तारीखें हमारे लिए मायने नहीं रखती हैं। 11 तारीख को परिणाम आ जाएंगे और प्रदेश की जनता चंद्रशेखर राव के रूप में पूरे चांद का उदय देखेगी।’ चर्चाएं तो यह भी हो रही हैं कि जब केसीआर ने 6 सितंबर को विधानसभा भंग कराने का प्रस्ताव पास किया तो वह तारीख भी ज्योतिषियों द्वारा तय की गई थी। यहां तक कि समय भी उसी हिसाब से निर्धारित किया गया।

इसी तरह केसीआर ने जब 2 जून 2014 को 12:57 मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तब इस समय के अंकों का योग भी छह था। रविवार को जैसे ही चुनाव आयोग ने वोटिंग की तारीख निश्चित की, उसके बाद से ही सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई कि 7 दिसंबर को अमावस्या है और यह दिन टीआरएस के लिए अपशकुन हो सकता है।

क्या बरकरार रहेगी चंद्रशेखर राव की सत्ता?
बता दें कि राज्य के 31 जिलों में विधानसभा की कुल सीटें 119+1 सीटें हैं, जिसमें से 119 पर चुनाव होता है, वहीं 1 ऐंग्लो-इंडियन मनोनीत होता है। इस समय तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) सत्ता में है और के. चंद्रशेखर राव मुख्यमंत्री हैं। राज्य में कांग्रेस मुख्य विपक्षी पार्टी है। अभी TRS के पास 90 सीटें, कांग्रेस के पास 13 और अन्य के पास 16 सीटें हैं। इन दोनों पार्टियों के अलावा असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM और आंध्र की सत्ताधारी पार्टी तेलुगु देशम पार्टी (TDP) को देखना दिलचस्प होगा।

नया राज्य, नई सियासत
तेलंगाना का पिछला विधानसभा चुनाव आंध्र प्रदेश के विधानसभा और देश के लोकसभा चुनाव के साथ हुआ था। इससे कुछ महीने पहले ही आंध्र और तेलंगाना को अलग किया गया था और हैदराबाद संयुक्त राजधानी बनाई गई थी। यहां TRS ने एकतरफा जीत दर्ज की थी और कांग्रेस बड़े अंतर से पीछे रहते हुए दूसरे नंबर पर खिसक गई।

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