Wednesday , September 23 2020

बीजेपी की मंत्रियों को नसीहत : सुर नरम, पांव जमीन पर रखें

लखनऊ

लोकसभा चुनाव करीब आने के साथ ही बीजेपी ने सरकार के मंत्रियों को संगठन के प्रति उनकी जिम्मेदारी याद दिलानी और जवाबदेही तय करनी शुरू कर दी है। मंत्रियों को दफ्तर और बंगले से निकलकर अधिक से अधिक समय संगठनात्मक अभियानों और क्षेत्र में देने को कहा गया है। कार्यकर्ताओं से संवाद के दौरान खास तौर पर सुर नरम रखने और ज्यादा सुनने की नसीहत भी दी गई है।

पिछले महीने के आखिर में संगठन की अगुवाई में हुई सरकार के मंत्रियों की बैठक में शीर्ष नेतृत्व का इस बात पर ज्यादा था कि आप पार्टी के कार्यकर्ता पहले हैं और मंत्री बाद में। इसलिए चुनावी समय में अब अपनी पूरी ऊर्जा 2019 की जमीन तैयार करने में लगाइए। प्रोटोकाल से ज्यादा चुनावी समय में जमीनी रहिए। मंत्रियों को इसके साथ ही 146 बिंदुओं के साथ संगठनात्मक अभियानों की सूची पकड़ा दी गई जिसमें उनकी सक्रिय भूमिका रहनी है।

सूत्रों के अनुसार सूची देखकर कुछ मंत्रियों के माथे पर बल पड़े तो यह भी कह दिया गया कि मुस्कराते हुए बाहर जाइए, जिससे यह न लगे कि आप दबाव महसूस कर रहे हैं। मंत्रियों को अधिक से अधिक समय क्षेत्र और संगठनात्मक कार्यक्रमों में बिताने के लिए कहा गया है। चुनावी समय में अपेक्षा और उलाहना दोनों ही स्वर जनता और कार्यकर्ता की ओर से उठते हैं। मंत्रियों को ऐसे मौके पर खास तौर पर नरम रुख और धैर्य रखने को कहा गया है। जिससे लोगों को सुन और समझा उनकी नाराजगी दूर की जा सके। संगठन के पास पहले भी कुछ मंत्रियों की कार्यकर्ताओं को तवज्जो न देने की शिकायतें आती रहीं हैं। बूथ समिति के 10 से 15 नवंबर तक होने वाले अभिनंदन कार्यक्रम भी निचले स्तर के कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर कर उनकी पीठ थपथपाने की रणनीति का हिस्सा हैं।

संघ से नियमित संपर्क
सूत्रों के अनुसार मंत्रियों को जिन करणीय (किए जाने वाले) कार्यों की सूची थमाई गई है उसमें संघ से नियमित संपर्क भी शामिल है। वजह यह है कि प्रत्यक्ष तौर पर भले ही संघ किनारे रहे लेकिन अप्रत्यक्ष तौर पर संगठन की कार्ययोजना और जमीनी फीडबैक की कमान संघ के ही हाथों में रहती है। इसलिए संघ से नियमित संपर्क को कहा गया है जिससे मंत्रियों को उनके विभाग के काम-काज को लेकर जनता की राय और अपेक्षाएं पता चल सके। इसके बाद तात्कालिक तौर पर जिन समस्याओं का समाधान किया जा सके उस दिशा में मंत्री कदम भी बढ़ा सकेंगे। 1 दिसंबर से शुरू होने वाले पदयात्रा कार्यक्रम के दौरान गांवों में रात्रि विश्राम व चौपाल लगाने के लिए भी कहा गया है जिससे ‘सरकार आपके द्वार’ का संदेश दे पार्टी के लिए माहौल बेहतर किया जा सके।

अजेंडे में मठ, मंदिर, पुजारी भी
मंत्रियों के साथ ही पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को मठों, मंदिरों, आश्रम प्रमुखों और पुजारियों से खास तौर संपर्क करने को कहा गया है। इनके जरिए पार्टी की नजर सांस्कृतिक सरोकारों को साधने और जरूरत पड़ने पर धार्मिक ध्रुवीकरण की जमीन तैयार करने पर भी है। दलितों को साधने के लिए कबीर मठ, रविदास मंदिर और उनसे जुड़े अन्य आस्था के संस्थानों पर भी समय बिताने, संपर्क और चर्चा करने के लिए खास तौर पर कहा गया है।

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