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ब्रिगेडियर ने दी आतंकी को श्रद्धांजलि, लिखा- ऐसा लगा जैसे किसी करीबी को खो दिया

जम्मू

सेना में काम कर रहे एक ब्रिग्रेडियर ने एक आतंकी की मौत पर भावभीनी श्रद्धांजलि दी है। सेना के एक सीनियर अधिकारी द्वारा एक आतंकी की मौत पर श्रद्धांजलि देना आपको कुछ अटपटा लग सकता है। दरअसल ऐसा ही सवाल श्रद्धांजलि देने वाले ऑफिसर के मन में भी उठा था। उन्होंने फेसबुक पोस्ट पर इस श्रद्धांजलि से जुड़े सवाल, श्रद्धांजलि की वजह को विस्तार से बताया है। जम्मू कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट का कमांडर गुलाम हसन मलिक उर्फ नूर खान (70 साल) की मंगलवार (17 जुलाई) को जम्मू के कोट बलवल जेल में मौत हो गई थी। नूर खान को इस साल जनवरी में गिरफ्तार किया गया था। नूर हसन पर राज्य में आतंकी गतिविधियों में शामिल रहने का आरोप था। पुलिस ने उस पर पब्लिक सेफ्टी एक्ट लगाया था।

आतंकी नूर खान की मौत पर श्रद्धांजलि देने वाले सैन्य अधिकारी का नाम है पीएस गोथारा। पीएस गोथरा की पोस्टिंग जम्मू-कश्मीर से बाहर है। अपने फेसबुक पेज पर श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने लिखा है कि नूर खान की मौत पर उन्हें ऐसा लग रहा है जैसे उन्होंने अपने किसी करीबी को खो दिया। दरअसल पीएस गोथरा के पिता जी एस गोथारा को आतंकियों ने 1993 में उरी से किडनैप कर लिया था। मेजर जीएस गोथरा (रिटा,) उस वक्त उरी स्थित नेशनल हाइडल पॉवर कॉरपोरेशन में चीफ इंजीनियर थे। उस वक्त ब्रिगेडियर पीएस गोथरा की अपील पर नूर खान ने उनके पिता को आतंकियों से मुक्त कराया था।

पीएस गोथरा अपने फेसबुक पोस्ट में लिखते हैं, “कई लोगों को आश्चर्य हो सकता है कि एक आर्मी ऑफिसर आजादी की पैरवी करने वाले एक एक्टिविस्ट की मौत पर दुखी क्यों है?” गोथरा अपने पिता के किडनैप हो जाने के बाद के घटनाक्रम को बताते हैं, “कुछ लोगों ने नूर खान की मदद लेने की सोची, नूर खान ने अपने नेटवर्क के जरिये शेरी नाम के एक गांव में मेरे पिता का पता लगाया, प्रोजेक्ट का एक स्थानीय ट्रक ड्राइवर नूर खान के साथ उस गांव में जाने को राजी हुआ, नूर खान ने खतरा मोल लेकर उन आतंकियों से बात की, आधी रात तक मेरे पिता को सुरक्षित वापस ले आया गया।”

डीएनएइंडिया डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिगेडियर गोथरा बताते हैं कि नूर खान से उनका रिश्ता व्यक्तिगत स्तर का था। उन्होंने फेसबुक में लिखा, “अपनी ओर से उसने भी कभी मदद के लिए नहीं कहा, सिर्फ एक बार को छोड़कर जब उसका पोता जल गया था, उस वक्त उसने मेडिकल हेल्प मांगा था, उसके विचारों को सुनना अच्छा था।” ब्रिगेडियर कहते हैं, “हमारी विचारधारा अलग हो सकती है, लेकिन हम अच्छे दोस्त थे, हम एक दूसरे से बात करते थे, हालांकि वह मुझसे ज्यादा उम्र का था, वह कई बार मुझे सलाह दिया करता था जैसे सेना को ऐसी चीजें नहीं करनी चाहिए।” नूर खान के परिवार वाले उसकी मौत पर यकीन नहीं कर पा रहे हैं उन्होंने मामले में जांच की मांग की है।

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