मुंबईः एक और ‘नटवरलाल’, 500 करोड़ का लगाया चूना

मुंबई

वह शख्स आम लोगों को पांच साल में दोगुनी, सात साल में तीन गुनी और 10 साल में चार गुनी रकम करने का दावा करता था। बस इसी झांसे में धीरे-धीरे लोग उससे जुड़ते गए। इस ठगी के जरिए करीब तीन लाख लोग उसकी जाल में फंस गए और जब तक पुलिस को भनक लगती, वह 500 करोड़ रुपये का चूना लगा चुका था। यह मामला है अथर्व फॉर यू इंफ्रा ऐंड ऐग्रो प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किए गए निवेश धोखाधड़ी का, जिसकी जांच महाराष्ट्र आर्थिक अपराध शाखा (ईडब्ल्यूओ) कर रही है।

ईडब्ल्यूओ ने पाया है गणेश हजारे की कंपनी ने पोंजी स्कीम के जरिए तीन लाख से ज्यादा लोगों से 500 करोड़ रुपये रुपये की धोखाधड़ी की है। इस मामले में पहली गिरफ्तारी पिछले हफ्ते हुई थी। कुछ निवेशकों ने गणेश हजारे को ठाणे के तलाव पाली में मीटिंग के लिए बुलाया। यहां वह एक प्राइवेट कैब से पहुंचा था। पहले से ही तैयार बैठी पुलिस ने यहां पहुंचते ही गणेश को दबोच लिया और उसे लोकल ट्रेन से पुलिस मुख्यालय ले जाया गया। पुलिस ने बताया कि गणेश सिर्फ 12वीं तक पढ़ा है। उसे 13 अगस्त तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है।

30 बैंक अकाउंट सीज
धोखेबाजों ने लोगों को पांच साल में दोगुनी, सात साल में तीन गुनी और 10 साल में चार गुनी रकम करने का दावा किया था। पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘फर्म की ओर से लोगों को बताया गया कि कंपनी कंस्ट्रक्शन, ट्रैवल ऐंड टूरिज्म, शिक्षण संस्थानों, होटेल्स और रेस्तरां के क्षेत्र में काम करती है। निदेशकों की ओर से दावा किया गया कि वे लोग बिजनस के लिए रुपये जमा कर रहे हैं।’ फर्म के खिलाफ जून में एक केस दर्ज हुआ था। पुलिस को इस स्कीम का कंप्यूटर से सर्वर भी मिला है। वहां से सारा डेटा एकत्र कर लिया गया है।

पुलिस ने बताया कि गणेश हजारे के अलावा एफआईआर में शिवाजी निफडे, सचिव गोसावी और मुकेश सुदेश का नाम है। पुलिस ने इन लोगों के 30 बैंक अकाउंट सीज कर दिए हैं। उनके दहिसर के वाणिज्य प्रतिष्ठान, ठाणे और दादर बोरिवली के दफ्तर, दहिसर, वासी और ठाणे, शाहपुर, पालघर और सहित अन्य जगह के फ्लैट्स और दूसरी संपत्तियां अटैच कर ली गई हैं।

अखबारों में भी देते थे विज्ञापन
दहिसर के रहने वाली स्नेहा देवारे ने बताया कि उन्होंने 36 महीने में कंपनी में 36,000 रुपये निवेश किए। कंपनी ने उन्हें 2017 में 49,000 रुपये वापस करने को कहा था लेकिन आज तक उन्हें एक भी रुपया नहीं मिला। पुलिस ने बताया कि निवेशकों को लुभाने के लिए निदेशकों ने पर्चे बांटे, अखबारों में विज्ञापन दिए और सेमिनार भी किए। उनकी फर्म में 40 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं।

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