Wednesday , September 23 2020

राजभर BJP से तोड़ सकते हैं नाता? 27 को लखनऊ रैली में करेंगे फैसला

लखनऊ,

लोकसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में बीजेपी को बड़ा झटका लग सकता है. योगी सरकार में पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री और एनडीए में सहयोगी दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर बीजेपी से नाता तोड़कर अलग हो सकते हैं!

ओमप्रकाश राजभर 27 अक्टूबर को पार्टी के 16वें स्थापना दिवस पर लखनऊ के रमाबाई अंबेडकर मैदान में रैली करने जा रहे हैं. माना जा रहा है कि इस रैली में बीजेपी के खिलाफ उनका गुस्सा फूट सकता है.

राजभर इस रैली में अपने समर्थकों से राय लेंगे कि एनडीए में रहें कि नहीं. ऐसे में उनके समर्थकों अगर कहते हैं कि एनडीए में हिस्सा बने रहे तो वो रहेंगे और अगर कहते हैं कि नहीं तो फिर मंत्री पद से इस्तीफा देने के साथ-साथ एनडीए से भी अलग हो जाएंगे.

बता दें कि उन्होंने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से आरक्षण में अति पिछड़ों और अति दलितों का कोटा निर्धारित करने के तय समय सीमा दे रखी है. ऐसे में अगर उनकी ये मांगें 27 अक्टूबर से पहले पूरी नहीं की जाती हैं तो वो अपनी रैली में बीजेपी का कच्चा चिट्ठा खोलेंगे और गठबंधन में रहेंगे या नहीं इस पर विचार करेंगे.

सूत्रों की मानें तो राजभर इसी रैली में योगी सरकार के मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने और बीजेपी का साथ छोड़ने का एलान कर भी सकते हैं. पार्टी नेताओं को लगता है कि अब समझौते की गुंजाइश नहीं बची है. पिछड़ों और अति पिछड़ों के हितों से जुड़े कई मुद्दों पर बीजेपी का रवैया लगातार उपेक्षापूर्ण है.

बता दें कि ओमप्रकाश राजभर लगातार अति पिछड़ों और गरीबों को आरक्षण का लाभ देने के लिए इसमें बंटवारे का मुद्दा उठाते रहे हैं. लेकिन अभी तक कोई हल नहीं निकला है. ऐसे में उन्होंने रैली के दिन मंच से अपनी सियासी जमीन मजबूत करने के लिए सरकार से अलग होने का ऐलान कर सकते हैं.

ओमप्रकाश राजभर योगी सरकार में दिव्यांग कल्याण विभाग का कैबिनेट मंत्री बनने के बाद से ही लगातार नाराजगी जाहिर करते रहे हैं. योगी सरकार के खिलाफ खुले आम बयान बाजी शुरू से कर रहे हैं. गाजीपुर के तत्कालीन डीएम रहे संजय कुमार खत्री के रवैये को लेकर भी उन्होंने बगावती तेवर दिखाए थे. मंत्री होते हुए भी उन्होंने सरकार पर हमले का कोई मौका नहीं छोड़ा.

2017 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी के 4 विधायक जीतने में सफल रहे थे. राजभर का जनाधार पूर्वांचल के बलिया, गाजीपुर, मऊ और बनारस के इलाके में है. ऐसे में अगर वो लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी से नाता तोड़कर अलग होते हैं, तो पार्टी के लिए बड़ा झटका हो सकता है.

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