Tuesday , October 20 2020

राजस्थानः ‘चुनावी रथ’ लेकर निकलीं वसुंधरा राजे

राजसमंद

चुनावी राज्‍य राजस्‍थान में एक बार फिर कमल खिलाने के लिए मुख्‍यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया की 40 दिन तक चलने वाली ‘राजस्‍थान गौरव यात्रा’ शनिवार को शुरू हो गई। बीजेपी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अमित शाह और वसुंधरा राजे ने राजसमंद जिले में स्थित चारभुजाजी मंदिर में दर्शन-पूजन के साथ ही इस यात्रा की शुरुआत की। बीजेपी का मकसद करीब 165 विधानसभा सीटों से होकर गुजरने वाली इस यात्रा के जरिए राजपूत मतदाताओं को साधना है जो इन दिनों पार्टी से नाराज चल रहे हैं।

राजपूत मतदाताओं का गढ़ समझे जाने वाले राजसमंद में वसुंधरा ने महाराणा प्रताप, राणा कुंभा, भामाशाह, पन्ना धाय को नमन कर अपना मकसद भी साफ कर दिया। वसुंधरा राजे की यह बहुप्रचारित ‘राजस्थान गौरव यात्रा’ अगले 40 दिन तक 165 विधानसभा सीटों से होकर गुजरेगी। बता दें कि राजस्‍थान में विधानसभा की कुल 200 सीटें हैं। इस 6,000 किमी. यात्रा में राजे 135 रैलियों को संबोधित कर सकती हैं।

अमित शाह ने कांग्रेस पर बोला हमला
वहीं यात्रा की शुरुआत करते हुए अमित शाह ने वसुंधरा राजे के काम की प्रशंसा की। उन्‍होंने कहा, ‘राजस्थान में जिस प्रकार से बीजेपी सरकार चली है, उससे मुझे भरोसा है कि यहां की जनता एक बार फिर कमल के फूल की सरकार बनाकर नया इतिहास रचेगी।’ उन्‍होंने कांग्रेस पर भी हमला बोला। शाह ने कहा, ‘राहुल गांधी और कांग्रेस हमसे सवाल पूछती है और हमारे चार साल का हिसाब मांगती है, इस देश की जनता तो आपसे आपके चार पीढ़ी का हिसाब मांग रही है।’
चारभुजाजी मंदिर में दर्शन-पूजन करते अमित शाह

एनआरसी पर अपना स्‍टैंड क्‍लीयर करें राहुल
अमित शाह ने रैली के दौरान असम के एनआरसी ड्राफ्ट का मुद्दा भी उठाया और कांग्रेध्‍य राहुल गांधी से जवाब मांगा। अमित शाह ने कहा, ‘देश की सुरक्षा का सवाल है , लेकिन कांग्रेस को एनआरसी मुद्दे पर वोटबैंक दिखाई दे रहा है। मैं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से पूछना चाहता हूं कि आप एनआरसी के मामले पर अपना स्टैंड क्यों नहीं क्लीयर कर रहे हैं। इसीलिये कि आपको उसमें अपना वोट बैंक नजर आ रहा है।’

इस यात्रा में वसुंधरा की कोशिश जनता के साथ सीधा संवाद साधने की रहेगी। इस दौरान उनका राज्‍य के प्रमुख मंदिरों में दर्शन-पूजन जारी रहेगा। चारभुजाजी मंदिर में दर्शन करने के बाद मुख्यमंत्री कांकरोली स्थित द्वारकाधीश मंदिर में दर्शन करेंगी। इसके बाद नाथद्वारा के लिए रवाना हो जाएंगी। प्रदेश में साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले बीजेपी की इस यात्रा को शक्ति परीक्षण के रूप में देखा जा रहा है।

180 सीटें जीतना बीजेपी का लक्ष्‍य
इस यात्रा के महत्‍व का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि खुद अमित शाह इस रैली को रवाना करने के लिए राजसमंद पहुंचे हैं। बीजेपी की कोशिश राज्‍य में 180 सीटें जीतकर फिर से सत्‍ता में आने की है। बीजेपी को पिछले चुनाव में 163 सीटें मिली थीं। अब तक राज्य में सिर्फ एक बार बीजेपी लगातार सत्ता में आई है। उस समय पूर्व राष्ट्रपति और बीजेपी के दिग्गज नेता भैरों सिंह शेखावत ने 1990-92 तक शासन करने के बाद 1993 में सत्ता में वापसी की थी।

अगर वसुंधरा राजे सफल होती हैं तो यह अलग तरह का रेकॉर्ड होगा, क्योंकि शेखावत की सफलता में 1992-93 तक एक साल का राष्ट्रपति शासन भी शामिल था। उसके बाद से एक बार बीजेपी तो दूसरी बार कांग्रेस सरकार बनाती रही है। कांग्रेस में इन दिनों नेतृत्व को लेकर घमासान मचा हुआ है। बीजेपी इससे चुनावी फायदे की उम्मीद कर रही है।

राजपूतों को साधने के लिए यात्रा
दरअसल, वसुंधरा की इस यात्रा का मकसद राजपूत मतदाताओं का साधना है। राजपूत राज्‍य की कुल जनसंख्‍या का 7 प्रतिशत हैं और हाल के दिनों में हुई घटनाओं की वजह से बीजेपी से नाराज चल रहे हैं। वसुंधरा ने पिछले दिनों जोधपुर से राजपूत समुदाय के प्रभावशाली नेता गजेंद्र सिंह शेखावत को राजस्‍थान बीजेपी का अध्‍यक्ष बनाए जाने का विरोध किया था। इससे राजपूतों में उनकी छवि और ज्‍यादा खराब हो गई है।

रैली स्‍थल पर बीजेपी नेता
यही नहीं राजपूत समुदाय गैंगस्‍टर आनंद पाल सिंह के कथित फर्जी मुठभेड़ से भी नाराज है। यही नहीं देशभर में पद्मावत फिल्‍म दिखाए जाने से भी कई राजपूत बीजेपी से नाराज बताए जा रहे हैं। राजस्‍थान सरकार ने जयपुर के शाही परिवार के राज महल पैलेस को पिछले दिनों सील कर दिया था, इससे उनके राजपूत नेताओं से संबंध और भी ज्‍यादा खराब हो गए।

राजपूत संगठनों ने कांग्रेस को समर्थन का किया है ऐलान
बीजेपी विधायक और शाही परिवार की सदस्‍य दिया कुमारी ने महल सील करने का खुलेआम विरोध किया था। इससे मजबूर होकर वसुंधरा सरकार को पैलेस की सील को खोलना पड़ा। राज्‍य सरकार के इस कदम को राजपूतों ने पूरे समुदाय पर हमले के रूप में लिया था। इसके बाद कई राजपूत संगठनों ने कांग्रेस को समर्थन देने की घोषणा की थी। इसने बीजेपी नेतृत्‍व को चिंता में डाल दिया।

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