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रामविलास पासवान को चुनौती देगी बेटी? RJD में जाने की अटकलें

पटना

केन्द्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के प्रमुख रामविलास पासवान के खिलाफ अब उनकी बेटी आशा पासवान ही चुनावी मैदान में उतरेगी. आशा ने राजद के टिकट पर लोकसभा चुनाव में चुनाव लड़ने की घोषणा की है. उन्होंने आरोप लगाया है कि रामविलास पासवान और उनके बेटे चिराग पासवान ने अपनी पहली पत्नी के परिवार के सदस्यों की अनदेखी की है.

उन्होंने कहा कि, ‘मेरे पिता रामविलास पासवान अब दलितों के नहीं सवर्णों के नेता हो गए हैं. उन्होंने सिर्फ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के लोगों का अपमान किया है.’आशा ने पिता रामविलास पासवान पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि, उन्होंने सिर्फ चिराग पासवान को आगे बढ़ाया और उसी का सबसे ज्यादा ख्याल रखा. उन्हें या उनके पति की ओर कभी ध्यान नहीं दिया.’

वहीं, पासवान के दामाद अनिल साधु ने भी कहा कि यदि राजद उन्हें और उनकी पत्नी को टिकट देता है, तो वे निश्चित रूप से पासवान परिवार के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे.गौरतलब है कि राम विलास पासवान ने दो शादियां की हैं. उनकी पहली शादी 1960 में राजकुमारी देवी से तो दूसरी रीना से 1983 में हुई.

1981 में रामविलास पासवान अपनी पहली पत्नी से अलग हो गए थे, उन्हें पहली शादी से दो बेटियां ऊषा और आशा हैं. जबकि आशा के भाई चिराग पासवान राम विलास पासवान की दूसरी पत्‍नी के बेटे हैं. 1983 में रामविलास पासवान ने रीना शर्मा से शादी की जो कि उस समय एयर होस्टेस थीं और पंजाबी हिंदू फैमली में जन्मीं थी. वो मूलत: अमृतसर की रहने वाली हैं.

अनिल साधु ने भी ठोकी थी ताल
आशा पटना में अपने पति अनिल साधु के साथ रहती हैं, जोकि एलजेपी की दलित सेना के प्रदेश अध्यक्ष थे। पासवान से मतभेदों के बाद इसी साल मार्च में उन्होंने एलजेपी से इस्तीफा देकर आरजेडी जॉइन की थी। साधु ने भी बुधवार को कहा था कि वह अपने ससुर के खिलाफ हाजीपुर से चुनाव लड़ना चाहते हैं।

पासवान के दामाद अनिल साधु ने कहा, ‘अगर आरजेडी ने मुझे या मेरी पत्नी आशा पासवान को टिकट दिया, तो निश्चित रूप से हम पासवान परिवार के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरेंगे।’ अनिल ने पासवान पर खुद के अपमान का आरोप लगाते हुए कहा, ‘उन लोगों ने (पासवान परिवार) केवल मेरी बेइज्जती नहीं की है, बल्कि एससी/एसटी (अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति) का भी अपमान किया है। दलित उनके बंधुआ मजदूर नहीं हैं।’

मार्च में आरजेडी में शामिल हुए थे साधु
2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में अनिल साधु ने एलजेपी के टिकट पर मुजफ्फरपुर की बोचहा सीट से चुनाव लड़ा था लेकिन उन्हें शिकस्त झेलनी पड़ी थी। साधु इसी साल मार्च में तेजस्वी यादव की एक जनसभा के दौरान आरजेडी में शामिल हुए थे। आरजेडी का दामन थामते हुए अनिल ने पासवान पर दलितों के हितों की अनदेखी का आरोप लगाया था।

बिहार में एलजेपी का एनडीए के साथ गठबंधन है। 2014 के लोकसभा चुनाव में एलजेपी ने राज्य की 40 में से 6 सीटों पर कामयाबी हासिल की थी। राज्य में इस बार सीटों के बंटवारे पर एनडीए के अंदर तस्वीर साफ नहीं है। जेडीयू के अलावा आरएलएसपी ने भी ज्यादा सीटों की डिमांड को लेकर बीजेपी पर दबाव बनाया हुआ है।

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