Wednesday , September 30 2020

राम मंदिर: ‘मंदिराइटिस से ग्रसित हैं RSS नेता : प्रमोद तिवारी

इलाहाबाद

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा राम मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाए जाने के बयान पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने चुटकी ली है। तिवारी ने कहा कि आरएसएस नेता मंदिराइटिस नाम की बीमारी से ग्रसित हो चुके हैं। इस दौरान भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के महासचिव कैलाश विजय वर्गीय द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की तुलना रावण से किए जाने पर तिवारी ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कैलाश विजय मानसिक रूप से बीमार हैं।

प्रमोद तिवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार से बाहर किए जाने और पार्टी में साइड लाइन होने के बाद से कैलाश विजय वर्गीय अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं। उनके बयान से साफ है कि वह मानसिक रूप से बीमार हैं और उन्हें इलाज की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘बीजेपी को विजय वर्गीय को किसी अच्छे अस्पताल में भर्ती कराकर उनका इलाज कराना चाहिए।’ इसके साथ ही तिवारी ने बीजेपी नेताओं से राहुल गांधी के खिलाफ की गई अपमानजनक टिप्पणी के लिए माफी मांगने को भी कहा।

‘…और मंदिराइटिस नाम की बीमारी से ग्रसित हो जाते हैं’
कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा, ‘विजय वर्गीय को राहुल गांधी को रावण बताने से पहले अपने पीएम के बारे में भी सोचना चाहिए।’ पूर्व सांसद ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा राम मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाए जाने के बयान पर कहा, ‘वह मंदिराइटिस नाम की बीमारी से ग्रसित हो चुके हैं। अकेले मोहन भागवत ही नहीं आरएसएस और बीजेपी के सभी नेताओं को मंदिराइटिस नाम की बीमारी है। देश में जब -जब चुनाव आते हैं, तब -तब आरएसएस और बीजेपी के लोग इस बीमारी से ग्रसित हो जाते हैं।’

‘मकसद मंदिर बनाना नहीं बल्कि सौदेबाजी करना है’
प्रमोद तिवारी ने कहा, ‘आरएसएस के रिमोट से चलने वाली केंद्र की मोदी सरकार साढ़े चार साल के काम में पूरी तरह नाकाम रही है, इसी वजह से पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उन्हें फिर से मंदिर की याद आने लगी है, जबकि इन लोगों का मकसद मंदिर बनाना नहीं, बल्कि उसके नाम पर सौदेबाजी करना है।’

जानिए, क्या बोले थे कैलाश विजय वर्गीय
बता दें कि कैलाश विजय वर्गीय ने मध्य प्रदेश में चल रहे विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष पर तंज कसते हुए कहा था, ‘हमने रामचरितमानस पढ़ी है, जिसमें बताया गया है कि रावण माता सीता का हरण करने साधु के वेश में गया था। यह रावणी मानसिकता है कि प्रजातंत्र की सीता का हरण करने के लिए हम गले में दुपट्टा डाल लें, जनेऊ पहन लें और तिलक लगा लें। हालांकि, जनता सब समझती है और वह इस रावणी प्रवृत्ति के साथ कभी नहीं जा सकती।’

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