रियल लाइफ ‘न्यूटन’, नक्सल गढ़ में कराई वोटिंग

दंतेवाड़ा

राजकुमार राव के अभिनय वाली फिल्म ‘न्यूटन’ आपने देखी होगी, तो याद होगा उसमें लीड किरदार ‘न्यूटन’ अपने नक्सल प्रभावित पोलिंग स्टेशन में ज्यादा से ज्यादा मतदान कराने के लिए कितनी मुश्किलें झेलता है। छत्तीसगढ़ के सत्यनारायण देवांगन (49) एक स्कूल हेडमास्टर हैं और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के पहले चरण के दौरान उनकी ड्यूटी भी बाकी पोलिंग ऑफिसर्स की तरह मतदान के लिए लगाई गई थी। हालांकि उनका पोलिंग स्टेशन कोई सामान्य जगह नहीं, बल्कि नक्सलियों के गढ़ अबुजमाद में था। यहां एक स्कूल को पोलिंग स्टेशन बनाया गया था और पोलिंग से एक रात पहले 200 सीआरपीएफ जवानों के पहरे के बीच सत्यनारायण देवांगन ने अपने पोलिंग स्टेशन में रात गुजारी।

अगले दिन सफलतापूर्वक मतदान कराने के बाद लौटे सत्यनारायण देवांगन के चेहरे पर संतुष्टि का भाव था। उनके पोलिंग स्टेशन पर 326 लोग वोट डालने आए और करीब 43 फीसदी मतदान हुआ। दिखने में यह आंकड़ा बहुत कम लग सकता है, लेकिन जिस इलाके में 2013 विधानसभा चुनाव में महज 3 फीसदी वोट पड़े हों, वहां इस बार 43 फीसदी वोटिंग होना बड़ी बात है। गांववाले नक्सलियों की धमकी के बावजूद इंद्रावती नदी को नाव पर बैठ पार किया और वोट करने आए।

इनके अलावा 40 वर्षीय लिंगराम मरकम ने तीन अन्य पोलिंग एजेंट्स के साथ दंतेवाड़ा के किदिरस पोलिंग स्टेशन पर वोटिंग करवाई, जहां आज तक वोट नहीं पड़े थे। मरकम के गांववालों को समझाने के बाद 6 वोटर्स ने हिम्मत जुटाई और वोट करने आए।

नक्सली इलाकों में हुई ज्यादा वोटिंग
बता दें कि सोमवार को 18 सीटों पर हुए मतदान में 76.28 फीसदी वोटिंग दर्ज की गई थी। इसमें मोहला-मानपुर में 80 फीसदी मतदाताओं ने, अंतागढ़ में 74.45 प्रतिशत, भानुप्रतापपुर में 76.77 प्रतिशत, कांकेर में 78.54 प्रतिशत, केशकाल में 81.32 प्रतिशत, कोण्डागांव में 82.84 प्रतिशत, नारायणपुर में 74.40 प्रतिशत, दंतेवाड़ा में 60.62 प्रतिशत, बीजापुर में 47.35 प्रतिशत, कोंटा में 55.30 प्रतिशत, खैरागढ़ में 84.31 प्रतिशत, डोंगरगढ़ में 82.53 प्रतिशत, राजनांदगांव में 78.66 प्रतिशत, डोंगरगांव में 85.15 प्रतिशत, खुज्जी में 84.48 प्रतिशत, बस्तर में 83.51 प्रतिशत, जगदलपुर में 78.24 प्रतिशत और चित्रकोट में 80.31 प्रतिशत मतदान हुआ था।

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी सुब्रत साहू ने बताया कि नक्सल प्रभावित इलाकों में ज्यादा मतदान हुआ है जबकि मैदानी क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत कम रहा है। दंतेवाड़ा के डीएम ने बताया, ‘इस बार दंतेवाड़ा में एक भी पोलिंग बूथ ऐसा नहीं था जहां जीरो वोटिंग दर्ज की गई हो। तुमरीगुंडा, पाडमेटा, और पौरनार जैसे बेहद संवेदनशील गांवों के वोटर्स इंद्रावती नदी को पारकर वोट डालने आए।

2013 में जीरो वोटिंग, इस बार 55 फीसदी मतदान
वोटिंग कराने के बाद सभी टीमें सुरक्षित सीआरपीएफ कैंप वापस लौट आईं। एक अन्य पोलिंग एजेंट सुधराम ताती ने ईटी को बताया कि उन्हें दंतेवाड़ा में जो पोलिंग स्टेशन दिया गया था, वहां इस बार 55 फीसदी मतदान हुआ। यहां साल 2013 में जीरो वोटिंग दर्ज की गई थी।

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