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वसुंधरा सरकार को आबादी घटने का डर, अब 2 बच्चे नहीं रहे अच्छे

देश भर में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर चल रहे अभियान में अब तक नारा रहा करता था, ‘हम दो, हमारे दो’. लेकिन राजस्थान सरकार की मानें तो अब यह नारा हो गया है ‘हम दो हमारे अनेक’. दरअसल पिछले दो साल से विभागीय सर्कुलरों के जरिए राज्य में सरकारी पदों पर नियुक्ति के लिए दो बच्चों की सीमा के कानून को निष्क्रिय किया जा रहा था. लेकिन अब राजस्थान सरकार ने कैबिनेट से प्रस्ताव पारित कर जनसंख्या नियंत्रण के सरकारी नौकरी से जुड़े प्रवाधानों को ही खत्म कर दिया है.

बता दें कि राजस्थान सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के तीन बच्चों से ज्यादा पैदा करने पर निलंबन संबंधी कानून को खत्म कर दिया है. इससे पहले दो बच्चों के पिता होने पर सरकारी नौकरी से रोक का कानून वसुंधरा सरकार ने वापस लिया था. जिसके बाद नवंबर 2016 में सरकारी नौकरी मिलने के बाद दो बच्चों से ज्यादा पैदा करने पर प्रमोशन और इंक्रीमेंट रोकने के नियम को खत्म किया गया था.

इस मामले में राजस्थान के कानून मंत्री राजेंद्र राठौड़ का कहना है कि राजस्थान में जनसंख्या ठीक से नहीं बढ़ पा रही है. इसलिए इन प्रतिबंधात्मक कानूनों को खत्म किया जा रहा है. बुधवार को कैबिनेट ने प्रस्ताव पारित कर सिविल सेवा अधिनियम में संशोधन कर दो बच्चों के कानून को खत्म कर दिया है. पूर्व उपराष्ट्रपति भैरो सिंह शेखावत ने जनसंख्या नियंत्रण का कानून बनाया था मगर कई सालों से राजस्थान की जनसंख्या नहीं बढ़ पा रही थी.

सरकार के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस की प्रवक्ता अर्चना शर्मा का कहना है कि इस जमाने में सरकारी नौकरी के लिए तीन बच्चों से ज्यादा पैदा करने पर रोक हटाना पीछे जाने की सोच है.

बता दें कि राजस्थान अपने जनसंख्या नियंत्रण के प्रवाधानों के लिए एक प्रगतिशील राज्य के तौर पर जाना जाता है. जहां पूर्व मुख्यमंत्री भैरो सिंह शेखावत से लेकर अशोक गहलोत ने कई कदम उठाए थे. 1992 में दो बच्चों से ज्यादा बच्चों के पिता को सरकारी नौकरी में रोक का कानून बना था. उसके बाद 2002 में सरकारी नौकरी में रहते हुए दो से ज्यादा बच्चों पर प्रमोशन और इंक्रीमेंट रोकने का कानून बना. फिर तीन बच्चों से ज्यादा पर निलंबन का कानून बना. लेकिन आरएसएस और संघ से जुड़े संगठन लगातार हिंदू जनसंख्या बढ़ाने पर जोर दे रहे थे.

सरकार जनसंख्या नियंत्रण के प्रचार-प्रसार पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है. पिछले तीन सालों में जनसंख्या नियंत्रण के प्रचार-प्रसार में 25 करोड़ रुपए सरकार ने खर्च किए गए हैं. आबादी कम करने के लिए नसंबदी जैसे कार्यक्रमों पर खर्च जोड़े तो तीन सालों में 110 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं.

ऐसे में राजस्थान सरकार के इस फैसले से क्या यह मान लिया जाए कि अब तक सरकार का जनसंख्या नियंत्रण को लेकर ‘बच्चे दो ही अच्छे’ का नारा हो गया है ‘अब नहीं अच्छे-दो ही बच्चे!

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