शिरडी की तर्ज पर विकसित किया जाएगा काशी विश्वनाथ मंदिर

वाराणसी

बीजेपी सांसद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रॉजेक्‍ट काशी विश्‍वनाथ कॉरिडोर बदलती काशी की तस्वीर को उकेरेगा। पौराणिक स्‍वरूप की अभिव्‍यक्ति के लिए अत्‍याधुनिक तकनीकों के इस्‍तेमाल से जहां मंदिर परिसर को नया रूप मिलेगा, तो शिरडी धाम की तर्ज पर श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं उपलब्‍ध होंगी। काशी के आध्यात्मिक स्वरूप को बयां करने वाले इस कॉरिडोर का स्वरूप आगामी वर्ष की शुरुआत में आम लोगों के बीच रखा जाएगा।

उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक विश्‍वनाथ कॉरिडोर को सोमनाथ मंदिर और शिरडी धाम की तर्ज पर विकसित करने का प्‍लान है। कॉरिडोर के ब्‍लू प्रिंट पर काम शुरू होने से इसका खाका सामने आने लगा है। सकरी गलियों में स्थित पुराने मकान भले ही नहीं होंगे लेकिन गंगा तट के ललिता घाट और महाश्‍मशान मणिकर्णिका घाट से 40-40 फीट चौड़े दो कॉरीडोर में वह सबकुछ दिखेगा जो काशी की पहचान से जुड़ा है। ठीक वैसे ही जैसे 12 वीं सदी के आसपास काशी विश्‍वनाथ या अविमुक्‍तेश्‍वर या फिर आदित्‍येश्‍वर मंदिर का वैभव और विस्‍तार था।

पौराणिक पद्धति का खास ध्यान
कॉरिडोर के रूप में मंदिर परिसर के विस्‍तार के साथ प्राचीन वैभव को लौटाने की कवायद के क्रम में अति प्राचीन काशी मुमुक्ष भवन, धर्मराज यु‍धिष्ठिर द्वारा स्‍थापित धर्मकूप, संत सिद्धगिरी बाबा की समाधि, प्रख्‍यात संत बाबा निर्मल दास की साधना स्‍थली निर्मल मठ, जैन तीर्थंकर की प्राचनी मूर्ति, विष्‍णु मंदिर, पशुपतिनाथ मंदिर, तारा देवी मंदिर, राज राजेश्‍वरी देवी मंदिर को हेरिटेज के रूप में विकसित करने का प्‍लान है। इसमें उन मंदिरों को भी शामिल किया गया है जिनका उल्‍लेख काशी खंड में किया गया है।

मंदिर में होगी शिरडी जैसी व्‍यवस्‍था
मंदिर के मुख्‍य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह के मुताबिक कॉरिडोर की जद में आने वाले प्राचीन मंदिर और धरोहरों को संरक्षित करने के अलावा मंदिर जाने वाले सभी मार्गों का सुंदरीकरण होगा। इन पर जगह-जगह वैसी ही व्‍यवस्‍थाएं होंगी जैसी शिरडी धाम में श्रद्धालुओं के लिए की गई है। लाइन में लगे रहने के दौरान बैठने के लिए स्‍टील की बेंच, शेड और पंखे, शुद्ध पेयजल,एलईडी स्‍क्रीन पर गर्भगृह से लाइव प्रसारण और जानकारी देने के लिए इलेक्‍ट्रानिक संकेतक लगाए जाएंगे। माला, फूल, प्रसाद और पूजन सामग्री के लिए एक जैसी दुकानों के निर्माण तथा विरासत संजोने को संग्रहालय प्रस्‍तावित है। कॉरिडोर बनने के बाद विश्‍वनाथ मंदिर देश का एकमात्र ऐसा मंदिर होगा जिसके छह प्रवेश मार्ग होंगे।

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