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हलाला: हमले से डरी नहीं, लड़ाई जारी रखेगी शबनम

मेरठ

तीन तलाक, बहुविवाह और निकाह हलाला के खिलाफ लड़ने वाली शबनम खुद पर तेजाब से हुए हमले के बाद डरी नहीं है। हमला शबनम के मजबूत इरादे को नहीं हिला सका है। उन्होंने कहा कि वह अपनी लड़ाई जारी रखेगी।

शबनम ने टीओआई को बताया, ‘हमारी शादी को तीन साल भी नहीं हुए थे कि हमें तलाक दे दिया गया। हमारा कुसूर सिर्फ इतना था कि अन्य महिला से अपने पति के अनैतिक संबंध का पर्दाफाश कर दिया था। पिछले साल जब सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया तो मेरे लिए चीजें बदलीं। मैं एक एनजीओ की मदद से सुप्रीम कोर्ट गई और तलाक को चुनौती दी। तबसे मेरे सास-ससुर मुझ पर अपने देवर के साथ हलाला करने के लिए दबाव बना रहे हैं। मैं ऐसा कभी नहीं करूंगी।’

शबनम की 2010 में मुजम्मिल से शादी हुई थी और उनको 2013 में तलाक दे दिया गया था। तलाक के बाद उनको पति के घर से निकाल दिया गया। इस साल मई में शबनम की मुलाकात स्थानीय ऐक्टिविस्ट समीना बेगम से हुई। 37 वर्षीय समीना बेगम एक ही बार में तीन तलाक पीड़िताओं को न्याय दिलाने के लिए मिशन तलाक नाम से एक एनजीओ चलाती हैं। उसके बाद शबनम को अपने साथ हुई नाइंसाफी के खिलाफ लड़ने की प्रेरणा मिली और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

शबनम के इरादे को देखकर उनके ससुराल के लोग घबरा गए और उन पर अपनी याचिका को वापस लेने का दबाव बनाया । इस पर भी जब शबनम नहीं झुकीं तो उन पर देवर ने तेजाब फेंक दिया। शबनम ने कहा, ‘कोर्ट का हस्तक्षेप मेरे लिए आशा की किरण है लेकिन पता नहीं मेरी आजमाइश कब खत्म होगी।’

सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता के वकील द्वारा दाखिल की गई एक याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि पीड़िता को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराई जाए और उनके इलाज का उचित बंदोबस्त किया जाए। सुप्रीम कोर्ट को उत्तर प्रदेश के अडिशनल ऐडवोकेट जनरल ऐश्वर्य भाटी ने बताया था कि याचिकाकर्ता को पहले ही सुरक्षा मुहैया करा दी गई है। इस पर शबनम के वकील राजीव शर्मा ने आरोप लगाया कि उनको इतनी पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिली है कि दिल्ली में अपने माता-पिता से मिलने के लिए भय के बगैर यात्रा कर सके।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया, ‘निर्देश दिया जाता है कि और सुरक्षा की जरूरत पड़ने पर आवेदक पुलिस अधीक्षक को याचिका दे सकती हैं जो याचिका पर गौर करने के बाद मामले में जरूरी कार्रवाई करेंगे। इसके अलावा पीड़िता को पर्याप्त इलाज मुहैया कराया जाए। मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी को बगैर विलंब जरूरी कार्रवाई करनी होगी।’ जब शर्मा ने अपनी क्लायंट को मुआवजा देने के बारे में जानना चाहा तो बेंच ने कहा, ‘अगर मुआवजे की कोई स्कीम उपलब्ध है और उसके लिए आवेदन जमा किया गया है तो उस पर दो हफ्ते के अंदर कानून सम्मत कार्रवाई की जाएगी।’

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