5 सालों से थी हथियार की फैक्ट्री, पुलिस अनजान

नई दिल्ली

अभी तक अवैध रूप से बनाए जाने वाले कट्टे और सेमी ऑटोमेटिक पिस्टल बिहार के मुंगेर और मध्यप्रदेश के कुछ गांवों से ही दिल्ली-एनसीआर में सप्लाई किए जाते थे। लेकिन अब इन हथियारों को बनाने वाले मुंगेर के कुछ कारीगरों ने वहां से निकलकर मेरठ में भी अवैध हथियार बनाने की अपनी मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट लगा ली हैं। लिसाड़ी गेट पर जो हथियार बनाने की फैक्ट्री पकड़ी गई, उसमें चार कारीगर मुंगेर से आकर मेरठ के लड़कों को इन्हें बनाने की ट्रेनिंग दे रहे थे। शक है कि अभी मेरठ में इस तरह से हथियार बनाने की एक-दो फैक्ट्रियां और पकड़ी जा सकती हैं। साथ में गाजियाबाद, लोनी और दिल्ली में भी कुछ जगहों पर इनके लगे होने की आशंका है।

मेरठ में यह फैक्ट्री एक घर के बेसमेंट में पिछले पांच सालों से चलाई जा रही थी। लेकिन इस दौरान न तो मेरठ पुलिस और न ही अन्य किसी इंटेलिजेंस को इसकी भनक तक लग पाई। माना जा रहा है कि अभी तक इस फैक्ट्री से पांच हजार से अधिक अवैध हथियार बनाकर बदमाशों को सप्लाई किए जा चुके हैं। सेल से एक सवाल पूछा गया था कि क्या इस फैक्ट्री में इसी साल पांच राज्यों में होने वाले चुनावों के लिए बड़ी संख्या में हथियार बनाने का काम तो नहीं किया जा रहा था? जवाब में सेल ने कहा कि अभी तक की जांच में ऐसा कुछ सामने नहीं आया है।

हथियार बनाने वाले मुख्य कारीगर मोहम्मद शाहदुल्ला ने पूछताछ में बताया कि मुंगेर से हथियार बनाकर दिल्ली-एनसीआर में बेचने के लिए लाने में रिस्क बहुत अधिक रहता था। इसलिए इस खतरे को पूरी तरह से खत्म करने के लिए सेमी ऑटोमेटिक पिस्टल बनाने के लिए मेरठ में ही रॉ मैटीरियल बनाया जाने लगा और इसे यहीं असेंबल करके पिस्टल बनाई जाने लगी। रॉ मैटीरियल में भी पिस्टल की स्प्रिंग, बैरल और मैगजीन समेत अन्य हिस्सों को अलग-अलग जगह बनवाकर फैक्ट्री में लाया जाता था।

अगर स्प्रिंग लाई जाती थी तो उसे एक पिस्टल की सिंगल स्प्रिंग के तौर पर न लाकर लंबी-लंबी स्प्रिंग लाई जाती थी। लंबी स्प्रिंगों को फैक्ट्री में लाकर काटा जाता था। ताकि पुलिस को शक न हो। इसी तरह से बैरल भी छोटी न लाकर लंबी लाई जाती थी। शाहदुल्ला के साथ तीन और कारीगर थे, जिन्हें एक पिस्टल बनाने का 2000 रुपये मिलता था। पुलिस ने बताया कि एक कारीगर महीने में 15 पिस्टल बना लेता था। इसके आगे का काम नसीम का होता था, जो इन्हें बेचता था। पुलिस को शक है कि अब इसी तरह से बड़े स्तर पर अवैध रूप से हथियार बनाए जाने लगे हैं। इसे दिल्ली-एनसीआर में होते क्राइम के लिए खतरनाक माना जा रहा है।

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