आखिर मोदी बनाम किसका होगा मुकाबला? विपक्ष में चल रहा ‘मंथन’

वाराणसी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वाराणसी संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ना न सिर्फ तय है बल्कि बीजेपी विधायक व कार्यकर्ता मतदाताओं से संपर्क, संवाद व सरकारी योजनाओं की सौगात गिनाने में जुट गए हैं। उधर विपक्षी खेमे में चुनाव की तारीखों के ऐलान के दो दिन बीत जाने के बाद भी सिर्फ मंथन का दौर चल रहा है। बीजेपी से नरेंद्र मोदी के खिलाफ विपक्ष की ओर से कौन होगा सशक्त उम्मीदवार? इसको लेकर चाय की दुकानों, पान की गुमटियों से लेकर चौराहों तक लोग कयास लगाने में जुटे हैं। मोदी के सामने कोई बीजेपी के बागी शत्रुघ्न सिन्हा तो कोई आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह, संकट मोचन मंदिर के महंत प्रफेसर विश्वंभरनाथ मिश्रा तो कोई कांग्रेस में शामिल हुए हार्दिक पटेल का नाम उछाल रहा है।

बीजेपी जहां पीएम नरेंद्र मोदी को अपना उम्मीदवार मानकर प्रचार की पिच पर उतर चुकी है, वहीं विपक्षी दल अभी आलाकमान के वेट ऐंड वॉच के हुक्म की तामील कर रहे हैं। पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ 2019 में विपक्ष का कोई साझा उम्मीदवार होगा या 2014 की तरह विपक्ष बिखरा ही रहेगा, यह चिंता विपक्षी दलों के नेता पार्टी दफ्तर के बाहर जाहिर कर रहे हैं। बीजेपी को छोड़कर एसपी-बीएसपी, कांग्रेस व आम आदमी पार्टी के नेता अभी अपने आलाकमान के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

गैर बीजेपी दलों को अभी भी उम्मीद है कि मोदी के खिलाफ साझा प्रत्याशी उतारकर विपक्षी मतों का विभाजन रोका जाएगा। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि विपक्षी दल इस बार ऐसे प्रत्याशी की तलाश में हैं जो भगवा ब्रिगेड को जोरदार टक्कर दे सके। कहा जा रहा है एसपी-बीएसपी गठबंधन के साथ कांग्रेस मिलकर वाराणसी में किसी एक प्रत्याशी के नाम पर सहमति बना सकती है। इन दलों के बड़े नेता लखनऊ से दिल्ली तक इसको लेकर मंथन कर रहे हैं।

पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ राजनीतिक गलियारों में विपक्ष के साझा उम्मीदवार के रूप में शत्रुघ्न सिन्हा, गुजरात में पाटीदार आरक्षण के नेता हार्दिक पटेल, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, प्रियंका गांधी, प्रफेसर विश्वंभर नाथ मिश्र के नाम पार्टी के अंदरखाने से उछाले जा रहे हैं। इसके अलावा कांग्रेस से पिछले चुनाव में नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले अजय राय और पूर्व सांसद डॉ. राजेश मिश्र भी इस सीट से दावेदार माने जा रहे हैं।

विपक्ष की बात करें तो एसपी-बीएसपी गठबंधन से वाराणसी संसदीय सीट समाजवादी पार्टी के खाते में आई है। बीएसपी से गठबंधन बनाने में तेजी दिखाने वाली समाजवादी पार्टी वाराणसी से प्रत्याशी तय करने में सुस्त नजर आ रही है। सीटों का ऐलान होने के बाद भी एसपी ने अभी तक अपनी राजनीतिक बिसात छिपाकर रखी है। यही हाल कांग्रेस का भी है। कहने को तो कांग्रेस ने ऐलान किया है कि वह अकेले दम पर चुनाव लड़ेगी लेकिन उसने भी वाराणसी को लेकर कोई ऐलान नहीं किया है।

वाराणसी लोकसभा सीट को बीजेपी का गढ़ माना जाता है, यहां 1952 से अब तक सात बार बीजेपी जीत चुकी है। इस बार भी वह जीत का रेकॉर्ड बनाने में कोई कोरकसर नहीं छोड़ेगी। वाराणसी में मतदान सबसे आखिरी चरण 19 मई को होंगे।

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