आसमान छूती ऊंचाइयां, बर्फ…आसान नहीं वोटिंग

शिमला

हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई पर स्थित पोलिंग स्‍टेशनों तक पहुंचना पोलिंग स्‍टाफ के लिए बहुत मुश्किल साबित होगा। इतनी ऊंचाई पर ईवीएम, वीवीपैट मशीनों और दूसरी चुनाव सामग्री को यहां तक पहुंचाने में उनकी फिजिकल फिटनेस और दमखम की जबर्दस्‍त परीक्षा हो जाएगी।यहां पोलिंग 19 मई को होनी है। यहां कुल चार सीटें हैं हमीरपुर, शिमला, कांगड़ा और मंडी। इनमें कुल पोलिंग स्‍टेशन हैं 7,723, जबकि 2014 में इनकी संख्‍या 7385 थी।

वोटरों तक ईवीएम पहुंचाने के लिए पोलिंग कराने वाले कर्मचारियों को 10 पोलिंग स्‍टेशनों पर 10 किलोमीटर से ज्‍यादा चलना होगा। 27 पोलिंग स्‍टेशनों तक पहुंचने के लिए 7 से 10 किलोमीटर चलना होगा। 63 ऐसे पोलिंग स्‍टेशन हैं जहां 5 से 7 किलोमीटर चलना होगा।

सबसे मुश्किल चढ़ाई वाले पोलिंग स्‍टेशन:-
शक्ति और मरोर गांव, कुल्‍लू
यह इलाका ग्रेट हिमालयन नैशनल पार्क के तहत आता है। यहां इलेक्‍शन कमिशन की टीमों को सतलज नदी के किनारे-किनारे घने जंगल में 20 किलोमीटर तक चलना पड़ेगा। यह पार्क हिमालयन काले भालू, एशियाटिक भूरे भालुओं, कस्‍तूरी मृग, और हिमालयी तहर (जंगली बकरी) का घर है। सामान्‍य तेंदुए और बर्फ में पाए जाने वाले तेंदुए भी पेड़ों पर छिपे रहते हैं।

कांगड़ा का बारा भंगल गांव
कांगड़ा का यह गांव सड़क से जुड़े आखिरी गांव से 74 किलोमीटर दूर है। पोलिंग पार्टियों को सड़क के जरिए यहां तक पहुंचने में तीन से चार दिन लगते हैं इसलिए इन्हें हेलिकॉप्‍टर से पहुंचाया जाता है। लेकिन खराब मौसम की स्थिति में पहले कांगड़ा के बैजनाथ से चंबा के नयाग्राम तक सड़क यात्रा करनी पड़ती है। इसके बाद आखिरी के 22 किलोमीटर पैदल चढ़ाई है।

चंबा में चास्‍क-भटोरी
यह पोलिंग स्‍टेशन 11,708 फीट की ऊंचाई पर है। पोलिंग कराने वालों को सच दर्रे से 15 किलोमीटर यात्रा करनी होती है। मुख्‍य सड़क से यह खड़ी चढ़ाई है।

लाहौल स्‍पीति में कुरछेड
उदयपुर और टिंडी के बीच में मौजूद इस पोलिंग स्‍टेशन पर पहुंचने के लिए दो घंटों से ज्‍यादा की चढ़ाई करनी पड़ती है।

लाहौल स्‍पीति में हिक्किम
14,567 फीट की ऊंचाई पर यह राज्‍य का सबसे ऊंचाई पर स्थित पोलिंग बूथ है। 86 वोटरों के लिए यहां चुनाव कर्मियों को 20 किलोमीटर की चढ़ाई करनी पड़ती है।

शिमला में काशा
शिमला और कल्‍लू की सीमा पर मौजूद यह गांव रामपुर तहसील में आता है। नजदीकी सड़क से यहां तक पहुंचने के लिए 15 किलोमीटर की चढ़ाई करनी पड़ती है।

डोडरा और क्‍वार इलाके में पंडार गांव
साफ मौसम में यह 14 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई है। फिलहाल तो यह पोलिंग स्‍टेशन बर्फ की वजह से पूरी तरह बंद है। एक बार बर्फ साफ हो जाए तो पोलिंग टीम को रोहरू से सड़क के जरिए क्‍यार तक पहंचना होगा। यहां रात में रुकने के बाद अगले दिन पंडार तक की मुश्किल चढ़ाई करनी होती है। डोडरा और क्‍वार के ही जाखा और जिस्‍कुन पोलिंग स्‍टेशन पहुंचने के लिए 7.8 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है।

चढ़ाई को और मुश्किल बनाती है बर्फ
चंबा जिले के पंगी-भरमौर, शिमला के डोडरा-क्‍वार इलाके और लाहौल-स्‍पीति में चुनाव कराने के लिए रोहतांग दर्रे (13,050 फीट) और सच दर्रे (14,500 फीट) की बर्फ हटानी होगी।

Did you like this? Share it:

About editor

Check Also

J-K: LoC पर ड्रग्स रैकेट का खुलासा, BSF ने जब्त किए हथियार

श्रीनगर, जम्मू कश्मीर में पाकिस्तान से लगती सीमा पर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को बड़ी …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)
150 visitors online now
4 guests, 146 bots, 0 members
Max visitors today: 195 at 12:10 pm
This month: 227 at 09-18-2020 01:27 pm
This year: 687 at 03-21-2020 02:57 pm
All time: 687 at 03-21-2020 02:57 pm