Tuesday , September 22 2020

IIT से रक्षा मंत्री तक, पर्रिकर का सफरनामा

पणजी

सादगी, ईमानदारी और मुस्कुराहट भरी भाव भंगिमा। मनोहर पर्रिकर की शख्सियत ही कुछ ऐसी थी जो लोगों पर अपनी अलग छाप छोड़ देती थी। कैंसर से जंग लड़ रहे पर्रिकर ने रविवार को आखिरी सांसें लीं। हाल ही में गोवा का बजट पेश करने से पहले मनोहर पर्रिकर ने कहा था, ‘परिस्थितियां ऐसी हैं कि विस्तृत बजट पेश नहीं कर सकता लेकिन मैं बहुत ज्यादा जोश और पूरी तरह होश में हूं।’ इससे उनकी जिजीविषा का अंदाजा लगाया जा सकता है। कभी महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (एमजीपी) की सहयोगी रही बीजेपी को गोवा में मामूली जनाधार से सत्ता तक लाने का श्रेय पर्रिकर को ही दिया जाता है।

पहले आईआईटियन सीएम
13 दिसंबर 1955 को जन्मे पर्रिकर ने 1978 में आईआईटी बॉम्बे से मेटलर्जिकल इंजिनियरिंग में ग्रैजुएशन किया। वह किसी आईआईटी से ग्रैजुएशन की डिग्री हासिल करने के बाद देश के किसी राज्य के मुख्यमंत्री बनने वाले पहले शख्स थे। पर्रिकर पहली बार 1994 में पणजी विधानसभा सीट से निर्वाचित हुए थे। इसके बाद वह लगातार चार बार इस सीट से जीतते रहे। इसके पहले गोवा की सियासत में किसी भी नेता ने यह उपलब्धि नहीं हासिल की थी।

पूर्णकालिक सियासत में उतरने से पहले पर्रिकर का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से भी जुड़ाव था। वह आरएसएस की नॉर्थ गोवा यूनिट में सक्रिय थे। वर्ष 2000 में वह पहली बार गोवा के मुख्यमंत्री बने। उनकी छवि आम आदमी के सीएम के रूप में थी। अकसर स्कूटी से सीएम दफ्तर जाते उनकी तस्वीरें मीडिया में काफी चर्चित रहीं। हालांकि, उनकी पहली सरकार फरवरी 2002 तक ही चल सकी।

गोवा में बीजेपी की जड़ें जमाईं
जून 2002 में गोवा विधानसभा भंग होने के बाद वहां फिर चुनाव हुए और बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। दूसरी छोटी पार्टियों और एक निर्दलीय के सहयोग से पर्रिकर दूसरी बार सीएम बनने में कामयाब रहे। गोवा की राजनीति में बीजेपी की जड़ें जमाने में पर्रिकर का योगदान काफी अहम रहा। 2012 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मार्च में उन्होंने ‘जनसंपर्क यात्रा’ नाम से जनता के बीच बड़ा अभियान चलाया। इसका नतीजा भी दिखा और पर्रिकर राज्य की 40 सीटों में से 21 पर बीजेपी का कमल खिलाने में कामयाब रहे।

चुनाव के बाद पेट्रोल पर वैट हटाने का अपना वादा उन्होंने पूरा किया। गोवा में पेट्रोल की कीमत 11 रुपये तक घटाने के उनके प्रयास की देशभर में चर्चा हुई। बुजुर्गों के लिए दयानंद सामाजिक सुरक्षा योजना, साइबरएज योजना और सीएम रोजगार योजना के लिए उनको काफी प्रशंसा मिली। यही वजह थी कि योजना आयोग के सर्वेक्षण में गोवा लगातार तीन साल तक देश का बेस्ट गवर्निंग स्टेट रहा।

मोदी की पीएम उम्मीदवारी का खुला समर्थन
जून 2013 में पीएम कैंडिडेट के रूप में नरेंद्र मोदी का खुले तौर पर समर्थन करने वाले बड़े बीजेपी नेताओं में उनका नाम था। गोवा में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के दौरान पर्रिकर ने कहा था कि मैं आम जनता के अकसर संपर्क में रहता हूं, जो मोदी को पीएम उम्मीदवार बनाने के पक्ष में है। इसी कार्यकारिणी के दौरान मोदी को बीजेपी प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाया गया था और उनकी पीएम उम्मीदवारी का रास्ता साफ हुआ था। यही नहीं पीएम बनने के बाद मोदी ने सबसे पहले गोवा का ही आधिकारिक दौरा किया था।

पर्रिकर की क्षमताओं से वाकिफ पीएम मोदी ने नवंबर 2014 में उन्हें रक्षा मंत्री जैसी अहम जिम्मेदारी सौंपी थी। इस दौरान वह यूपी से राज्यसभा के लिए चुने गए। हालांकि, 2017 के विधानसभा चुनाव में गोवा में सियासी रस्साकशी के बाद उन्हें दोबारा गोवा भेजा गया। संख्याबल कम होने के बावजूद बीजेपी ने दूसरी छोटी पार्टियों के सहयोग से सरकार बना ली। 13 मार्च 2017 को राज्यपाल मृदुला सिन्हा ने पर्रिकर ने गोवा के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई। बतौर सीएम यह उनका चौथा कार्यकाल था।

विवादों में आखिरी कार्यकाल
पर्रिकर का आखिरी कार्यकाल विवादों में भी रहा। विपक्षी कांग्रेस ने उन पर जनमत की उपेक्षा करते हुए जोड़तोड़ की बदौलत सरकार बनाने का आरोप लगाया। वहीं, राफेल मामले को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पर्रिकर के बहाने पीएम को घेरने की कोशिश की। राहुल ने गोवा विधानसभा जाकर पर्रिकर से मुलाकात भी की थी। इसके बाद 30 जनवरी को ट्वीट करते हुए राहुल ने अपनी चिट्ठी में लिखा, ‘मैं पर्रिकरजी से मिला था। पर्रिकरजी ने स्वयं कहा है कि डील बदलते समय पीएम ने हिंदुस्तान के रक्षा मंत्री से नहीं पूछा था।’

हालांकि, पर्रिकर ने इस चिट्ठी के ठीक बाद राहुल को नसीहत देते हुए कहा कि कांग्रेस नेता को एक अस्वस्थ व्यक्ति से अपनी मुलाकात का इस्तेमाल राजनीतिक मौकापरस्ती के लिए नहीं करना चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष को लिखे जवाबी खत में पर्रिकर ने कहा, ‘मुझे दुख हो रहा है कि आपने इस मुलाकात का इस्तेमाल अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए किया। मेरे साथ बिताए गए पांच मिनट में, आपने न तो राफेल पर कुछ कहा और न ही हमने इसके संबंध में कोई चर्चा की।’

राहुल गांधी इसके बाद भी नहीं रुके थे। इसी महीने राहुल ने कहा, ‘पर्रिकर ने कैबिनेट में साफ तौर पर कहा था कि उनके पास राफेल से जुड़ी फाइलें हैं। यह उस ऑडियो टेप में है। उन्होंने कहा था कि उन्हें मुख्यमंत्री के पद से नहीं हटाया जा सकता है क्योंकि जिस दिन ऐसा हुआ उसी दिन वह राफेल से जुड़ी सारी फाइलें जारी कर देंगे।’ राहुल ने कहा, ‘पर्रिकर ने इंटरनैशनल मीडिया के सामने कहा कि उन्हें नए कॉन्ट्रैक्ट के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। दस्तावेज कहते हैं कि चौकीदार ने एक समानांतर डील की थी।’

Did you like this? Share it:

About editor

Check Also

उप्र में अधूरा कुछ नहीं, देंगे ‘पूर्ण’ फिल्मसिटी का उपहार, बोले सीएम योगी

नई दिल्ली, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जबसे यूपी में नए फिल्म सिटी के बनाने का …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)
55 visitors online now
6 guests, 49 bots, 0 members
Max visitors today: 150 at 12:03 am
This month: 227 at 09-18-2020 01:27 pm
This year: 687 at 03-21-2020 02:57 pm
All time: 687 at 03-21-2020 02:57 pm