Thursday , October 22 2020

होटल लक्ष्मी विलास मामले में कोर्ट का फैसला, गिरफ्तारी वारंट पर लगाई रोक

जोधपुर

राजस्थान हाईकोर्ट ने उदयपुर के होटल लक्ष्मी विलास मामले में फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने सीबीआई की ओर से जारी गिरफ्तारी वारंट पर रोक लगा दी है। याचिकाकर्ताओं को 8 अक्टूबर से पहले कोर्ट में पेश होकर 5 लाख का जमानती मुचलके भरने का आदेश दिया है। बिना अनुमति याचिकाकर्ताओं के देश छोड़कर बाहर जाने पर रोक लगा दी है। केंद्र को नोटिस जारी कर आगामी 15 अक्टूबर तक जवाब मांगा है। होटल पर रिसीवर नियुक्त करने के सीबीआई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाई गई है। साथ ही मामले के निस्तारण तक सम्पत्ति के बेचने, लीज पर देने और किसी को शेयर देने पर भी कोर्ट ने रोक लगा दी है। मामले में 15 अक्टूबर को अगली सुनवाई होगी।

मंगलवार को जस्टिस दिनेश मेहता की अदालत में उदयपुर के लक्ष्मी विलास होटल से जुड़े मामले को लेकर दायर ज्योत्सना सूरी, आशीष गुहा और प्रदीप बैजल की विविध आपराधिक याचिका 482 पर सुनवाई पूरी हो गई। जिसके बाद कोर्ट ने फैसला सुनाया, इसमें सीबीआई की ओर से जारी गिरफ्तारी वारंट पर रोक लगा दी है। केंद्र को नोटिस जारी कर आगामी 15 अक्टूबर तक जवाब मांगा है। इस सुनवाई के दौरान देश के कई जाने-माने वकील शामिल हुए। इनमें हरीश साल्वे, पीपी चौधरी, मुकुल रोहतगी और सीबीआई की ओर से आरडी रस्तोगी भी शमिल थे।

मामले में करीब एक घंटे तक वर्चुअल सुनवाई के दौरान बहस चली। जिसमें कहा गया कि सीबीआई कोर्ट इस मामले में सीधे गैर जमानती वारंट के आदेश नहीं दे सकती है। क्योंकि मामला 18 वर्ष पुराना है और इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1981 में साल 2018 में हुए संशोधन के बाद धारा 19 के तहत लोक सेवक को सेवानिवृति के बाद बिना अनुमति के दोषी नहीं बनाया जा सकता। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि 2002 में हुई विनिवेश की प्रक्रिया में तत्कालीन प्रधानमंत्री स्तर पर निर्णय हुए थे ऐसे में किसी एक पर आरोप लागाना ठीक नहीं।

बहस के दौरान यह बात भी सामने आई कि उदयपुर कलेक्टर ने बतौर सीबीआई की ओर से उन्हें रिसिवर बनाने जाने पर एक पत्र लिखा है कि उनके पास इतने संसाधन नहीं जिससे कि होटल का संचालन किया जा सके। एक घंटे तक चली बहस में कोर्ट इस बात पर सहमत हुई कि गैर जमानती आदेश जो सीबीआई कोर्ट ने दिए उन्हें जमानती वारंट रूप में परिवर्तित किया जाए। लेकिन इसके लिए सभी आरोपियों को कोर्ट में अपने बेल बांड भरने होंगे। साथ ही यह मांग की गई कि सीबीआई कोर्ट की ओर से जो कलेक्टर को रिसिवर नियुक्त किया गया है उसे स्थगित किया जाए।

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