Wednesday , October 28 2020

फिर पलटी गैंगस्टर को ला रही यूपी पुलिस की गाड़ी, लोग बोले- स्क्रिप्टराइटर बदलो!

लखनऊ

कुख्यात गैंगस्टर विकास दुबे का एनकाउंटर अभी कोई भूला नहीं होगा। कैसे उज्जैन में सरेंडर करने के बाद यूपी लाए जाने के दौरान पुलिस की गाड़ी पलट गई और उसमें सवार गैंगस्टर विकास दुबे ने भागने की कोशिश की और इसी कोशिश में मारा गया। ऐसा ही एक ‘हादसा’ रविवार को एक बार फिर हुआ है। गैंगस्टर फिरोज खान को मुंबई से पकड़कर ला रही यूपी पुलिस की गाड़ी रविवार सुबह संदिग्ध हालात में मध्य प्रदेश में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में फिरोज की मौत हो गई है।

करीब ढाई महीने बाद ही एक जैसी घटना होने पर लोग सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। सोमवार शाम ट्विटर पर अचानक UP Police ट्रेंड होने लगा। एक तरफ लोग जहां यूपी पुलिस की तारीफ कर रहे हैं, तो वहीं कई यूजर्स ऐसे भी हैं जिन्होंने यूपी पुलिस को गाड़ी और ‘स्क्रिप्टराइटर’ बदलने की सलाह दी है

गैंगस्टर को पकड़ने लखनऊ से मुंबई गई थी पुलिस की टीम
बता दें कि लखनऊ के ठाकुरगंज थाने की पुलिस गैंगस्टर फिरोज खान को पकड़ने मुंबई गई थी। इंस्पेक्टर ठाकुरगंज राजकुमार के अनुसार, बहराइच निवासी फिरोज के खिलाफ साल 2014 में यूपी गैंगस्टर ऐक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके बाद से फिरोज फरार चल रहा था। तलाश में जुटी पुलिस को सर्विलांस की मदद से कुछ दिन पहले फिरोज के मुंबई में होने की सूचना मिली। इसके बाद सब इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद पाण्डेय, कॉन्स्टेबल संजीव सिंह अपने साथ आरोपी के साढ़ू अफजल को लेकर मुंबई गए थे।

मुंबई के नाला सोपारा से गिरफ्तार हुआ था फिरोज खान
फिरोज मुंबई के नाला सोपारा की झुग्गी बस्ती में रह रहा था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस टीम शनिवार रात को लखनऊ के लिए रवाना हुई। रविवार की सुबह मध्य प्रदेश के गुना जिले चांचौड़ा थाना क्षेत्र में पाखरिया पुरा टॉल के पास पुलिस का वाहन पलट गया। हादसे में गैंगस्टर फिरोज की मौत हो गई जबकि अफजल खान का हाथ फ्रैक्चर हुआ है। इसके साथ ही पुलिसकर्मी संजीव, जगदीश प्रसाद और वाहन चालक सुलभ मिश्रा को भी चोटें आई हैं।

पुलिस की लापरवाही, गैंगस्टर को लाने में इस्तेमाल की प्राइवेट गाड़ी
पूरे मामले में पुलिस की एक बड़ी लापरवाही भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि फिरोज को पकड़ने के लिए पुलिस टीम एक प्राइवेट इनोवा से गई थी। सवाल उठ रहा है कि जब पुलिस को आरोपी को पकड़ने के लिए जाना था तो सरकारी वाहन का प्रयोग क्यों नहीं किया गया। नियम के मुताबिक अपराधी को पकड़ने के लिए पुलिस को सरकारी वाहन का प्रयोग करना चाहिए था।

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