पंजाब। पंजाब की राजनीति और धार्मिक गलियारों में उस समय भूचाल आ गया, जब मुख्यमंत्री भगवंत मान ने श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा उन्हें ‘पंथ विरोधी’ और ‘गुरु विरोधी’ घोषित किए जाने के फैसले पर अपनी कड़ी सफाई दी। सीएम मान ने कथित शराब वाले वायरल वीडियो को पूरी तरह से नकारते हुए कहा कि धर्म के सर्वोच्च पदों पर बैठे कुछ लोग अपने सियासी आकाओं के शह पर मुझे बदनाम करने के लिए यह झूठा प्रोपेगेंडा फैला रहे हैं। इससे पहले सोमवार को अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने सिंह साहिबानों की बैठक के बाद सीएम मान के खिलाफ यह बड़ा हुक्मनामा जारी किया था।
इस विवाद के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने भी मान का समर्थन करते हुए कहा कि विरोधी उनके अच्छे कामों से बौखलाकर झूठ का सहारा ले रहे हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने वीडियो की सत्यता पर सवाल उठाते हुए कहा, “जब मुझे अकाल तख्त साहिब में बुलाया गया था, तब भी मैंने स्पष्ट रूप से कहा था कि उस वीडियो में मैं नहीं हूँ। वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति की कद-काठी और शारीरिक बनावट मुझसे बिल्कुल मेल नहीं खाती, मेरा शरीर उस तरह का नहीं है।” उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के प्रधान खुलेआम एक राजनीतिक दल (अकाली दल) के प्रचारक बने हुए हैं। अब बस जत्थेदार साहिब से यह आदेश जारी करवाना बाकी रह गया है कि वोट किसे डालना है, नहीं तो पंथ खतरे में आ जाएगा। सीएम मान ने स्पष्ट किया कि श्री अकाल तख्त साहिब उनके लिए हमेशा सर्वोच्च है और उनका सिर वहां हमेशा झुकता है।
तख्त से टकराने की बात कोई सपने में भी नहीं सोच सकता, लेकिन वहां जिस तरह की राजनीतिक नियुक्तियां हुई हैं और कैसे फैसले लिए जाते हैं, इसे सिख संगत भली-भांति जानती है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब उनकी सरकार ने बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून बनाए, तो पहले यही प्रबंधक पूछते थे कि सरकार कानून क्यों नहीं बनाती, और जब कानून बन गया तो कहने लगे कि हमसे पूछे बिना क्यों बनाया। मान ने तंज कसते हुए कहा कि यहां बिना माफी मांगे लोगों को माफ कर दिया जाता है और फिर माफी रद्द भी कर दी जाती है।
