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महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में अकेले लड़ सकती है बीजेपी, पार्टी करवा रही है आंतरिक सर्वे, जानें

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मुंबई:

2024 लोकसभा चुनावों के बाद से महाराष्ट्र में उथल-पुथल की अटकलें लग रही है। अब सामने आया है कि लोकसभा चुनावों में करारी शिकस्त का सामना करने के बाद बीजेपी विधानसभा चुनावों में अकेले चुनाव लड़ सकती है। सूत्रों के अनुसार पार्टी ने राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने की संभावनाओं का आकलन करने के लिए एक आंतरिक सर्वेक्षण कर रही है। यह सर्वेक्षण लोकसभा चुनावों में अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ मिलकर निराशाजनक प्रदर्शन के बाद हो रहा है। उत्तर प्रदेश के बाद महाराष्ट्र में लोकसभा की सीटों की संख्या सबसे ज्यादा है। उत्तर प्रदेश में 80 और महाराष्ट्र में 48 सीटें हैं। इनमें बीजेपी को सिर्फ 9 पर जीत मिली है। बीजेपी के आंतरिक सर्वे करवाने की चर्चा ऐसे वक्त पर सामने आई है जब आरएसएस से जुड़े रहे एक नेता ने अजित पवार से गठजोड़ करने पर सवाल खड़े किए हैं।

क्या है बीजेपी की तैयारी?
लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने 28 सीटों पर कैंडिडेट उतारे थे। इनमें उसे सिर्फ 9 पर जीत मिली है। राज्य में इस साल अक्टूबर में विधानसभा प्रस्तावित है। ऐसे में पार्टी आगे की रणनीति बनाने में जुटी है। सूत्रों के अनुसार बीजेपी ने 2019 के विधानसभा चुनावों में राज्य की 106 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी। पार्टी ने आगे की रणनीति को तय करने के लिए इन्हीं 106 विधानसभा क्षेत्रों में एक आंतरिक सर्वेक्षण शुरू किया है। सूत्रों की मानें पार्टी ने अभी तक अजित पवार को छोड़ने पर फैसला नहीं किया है, लेकिन पार्टी मौजूदा मूड और सीटों को अकेले ही बरकरार रखने की चुनौतियों का आकलन कर रही है। अगर पार्टी विधानसभा चुनावों में अकेले जाने का फैसला करती है, तो जमीनी हकीकत का अध्ययन करने के लिए जल्द ही शेष 182 विधानसभा क्षेत्रों में भी इसी तरह के सर्वेक्षण शुरू किए जाएंगे। महाराष्ट्र में विधानसभा की कुल 288 सीटें है। सरकार बनाने के लिए 145 सीटें चाहिए।

सर्वेक्षण में क्या-क्या है?
बीजेपी के एक सूत्र ने कहा कि ये सर्वेक्षण यह पता लगाने के लिए शुरू किए गए हैं कि पार्टी अकेले कैसे बहुमत हासिल करेगी। इसके अलावा सर्वेक्षण में यह भी सामने आए कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ गठबंधन में भाजपा कैसा प्रदर्शन करेगी? सर्वेक्षण यह भी पता लगाएगा कि क्या एनसीपी के साथ गठबंधन जारी रहना चाहिए या फिर नहीं। 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा की सीटें 23 के मुकाबले घटकर 9 पर आ गईं, जबकि शिवसेना ने 7 और एनसीपी ने एक सीट जीती, जिससे महायुति की कुल ताकत 17 हो गई, जबकि महा विकास आघडी को 31 सीटें मिली हैं। सूत्रों कहा कहना है कि यह सर्वेक्षण आरएसएस पत्रिका द ऑर्गनाइजर द्वारा यह सुझाव दिए जाने से बहुत पहले शुरू किए गए थे कि अजीत पवार को एनडीए में शामिल करने के बीजेपी के कदम ने पार्टी के प्रदर्शन को प्रभावित किया है। द ऑर्गनाइजर में प्रकाशित एक लेख में आरएसएस के वरिष्ठ नेता रतन शारदा ने लिखा था कि महाराष्ट्र बीजेपी और एकनाथ शिंदे के पास राज्य में आराम से बहुमत था। उन्होंने लिखा था कि पार्टी ने अजित पवार को साथ लेकर अपनी ब्रैंड वैल्यू खो दी।

लेख पर क्या बाेले नेता?
महाराष्ट्र भाजपा प्रवक्ता केशव उपाध्याय का कहना है कि द ऑर्गेनाइजर स्वतंत्र विचारों की पत्रिका है। बीजेपी हर अखबार के संपादकीय का सम्मान करती है। बीजेपी हर जीत और हार के बाद मंथन करती है और उसके आधार पर पार्टी आगे की रणनीति तय करती है। उन्होंने विधानसभा चुनाव में बीजेपी के एनसीपी से अलग होने की संभावना पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। अजित पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि यह लेख भाजपा का आधिकारिक रुख नहीं है। इसके किसी भी पदाधिकारी ने कोई बयान नहीं दिया है। यह एक व्यक्तिगत विचार है। हर एक बात पर हमें स्पष्टीकरण या प्रतिक्रिया की जरूरत नहीं है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पिछले सप्ताह पार्टी की हार की जिम्मेदारी लेते हुए सरकार से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। तब उन्होंने कहा था कि महायुति को 43.6 प्रतिशत वोट मिले हैं, जबकि महा विकास अघाड़ी को 43.9 प्रतिशत वोट मिले हैं। बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद उपमुख्यमंत्री बने रहने का फैसला किया था।

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