नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में जंतर मंतर पर आयोजित रैली में पंजाब के सीएम भगवंत सिंह मान ने भाजपा और मोदी सरकार को आइना दिखाया। उन्होंने कहा कि भारत में तानाशाही राजनीति को बदलने में पंजाब आम आदमी पार्टी के साथ खड़ा है। 2027 मे़ं पंजाब की जनता ‘‘आप’’ को 100 सीटों का तोहफा देगी। अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत पूरी आम आदमी पार्टी चट्टान की तरह डटकर देश की लड़ाई लड़ रही है। भाजपा ने एक साजिश के तहत ‘‘आप’’ को खत्म करने की कोशिश की, लेकिन अब वह साजिश देश के सामने बेनकाब हो चुकी है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार पंजाब विरोधी है। इसलिए आरडीएफ, जीएसटी समेत पंजाबियों के हक का करोड़ों रुपए रोककर बैठी है। हम देश से नफ़रत और झूठ की राजनीति को ख़त्म करने आए हैं और उस तरफ सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहे हैं।
जंतर मंतर पर अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आयोजित रैली को वर्चुअली संबोधित करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि जब भी आम आदमी पार्टी पर कोई मुसीबत आती है, तो वह दोगुनी-चौगुनी ताकत से उभरती है। भगवान हमें हमेशा उसी नीम के पेड़ के नीचे, इसी जंतर-मंतर पर ले आते हैं, जो आम आदमी पार्टी का जन्म स्थान है। यह कार्यक्रम पहले से ही तय था, लेकिन हमें यह नहीं पता था कि जज साहब का यह ऐतिहासिक फैसला इतनी जल्दी आ जाएगा। आज पूरे देश को यह बताने का मौका मिला है कि सच हमेशा सच ही होता है।
भगवंत मान ने कहा कि सच बोलने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि उसे एक बार बोलकर दोबारा याद नहीं रखना पड़ता, जबकि झूठ बोलने वालों को हमेशा याद रखना पड़ता है कि पिछली बार क्या कहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले जीएसटी का विरोध करते थे, लेकिन बाद में उन्हें ही इसे लागू करना पड़ा। पहले वे तेल की बढ़ती कीमतों पर बोलते थे, लेकिन अब जब कीमतें उससे भी ज्यादा बढ़ गई हैं, तो वे इसे मास्टर स्ट्रोक कहते हैं। आम आदमी पार्टी देश की राजनीति को बदलने और उसमें ईमानदारी भरने आई है। अरविंद केजरीवाल ने दूसरी राजनीतिक पार्टियों को मजबूर कर दिया है कि वे नफरत और धर्म की बातों के बजाय अपने घोषणापत्र में स्कूलों, अस्पतालों, बिजली, रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर की बात लिखें।
भगवंत मान ने बताया कि कैसे निजी अस्पताल वालों ने प्रधानमंत्री से शिकायत की होगी कि दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में मुफ्त और अच्छा इलाज होने के कारण उनका धंधा ठप हो गया है, जिसके बाद प्रधानमंत्री ने सत्येंद्र जैन को जेल में डाल दिया। इसी तरह, निजी स्कूल वालों ने शिकायत की होगी कि बच्चे सरकारी स्कूलों में जा रहे हैं और वे अब पार्टी को चंदा नहीं दे पाएंगे, तो प्रधानमंत्री ने मनीष सिसोदिया को जेल में डाल दिया। जब देखा गया कि मुफ्त बिजली, मुफ्त दवाइयां, बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर, बजट 30 करोड़ से बढ़कर 60 हजार करोड़ हो गया और इस कारण चुनाव में जीतना मुश्किल हो जाएगा, तो कोई झूठा मामला ढूंढकर अरविंद केजरीवाल और उनकी पूरी टीम को ही अंदर कर दिया गया। उन्होंने कहा कि हमारे देश में सजा शायद उतनी कड़ी नहीं होती, लेकिन अदालतों के चक्कर काटना ही असल सजा होती है।
भगवंत मान ने उस मुश्किल दौर को याद करते हुए बताया कि जब पार्टी के शीर्ष पांच नेता और पूरा थिंक टैंक जेल में था, तब जालंधर का उपचुनाव आ गया था। फैसला लेने वाली कोई अथॉरिटी बाहर नहीं थी। ऐसे में हमने अपनी बैकअप टीम के साथ मिलकर काम चलाया। जेल में अरविंद केजरीवाल से मुलाकात के दौरान मिले मार्गदर्शन का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि अरविंद केजरीवाल ने हमें हिम्मत दी थी कि भगवान साथ देगा, लोगों के दरवाजे खटखटाओ। इसके बाद हमने जालंधर उपचुनाव और दूसरी सांसद सीट भी बड़े अंतर से जीती, जिससे हमारा हौसला और बढ़ा।
भगवंत मान ने बताया कि जब मैं जेल में अरविंद केजरीवाल से मुलाकात के लिए जाता था, तब भी अरविंद केजरीवाल केवल पंजाब और वहां के लोगों का हाल पूछते थे। वे पूछते थे कि लोगों को मुफ्त बिजली मिल रही है या नहीं, खेतों के लिए पानी का काम चल रहा है या नहीं और क्या कोई दिक्कत तो नहीं है? वे हमेशा यही निर्देश देते थे कि जो भी भ्रष्टाचार करे, जिसकी भी रिपोर्ट आए, उसे अंदर कर दो, क्योंकि हमें देश को सुधारना है।
भगवंत मान ने आगे कहा कि क्रांतिकारियों के लिए जेल घी की तरह काम करती है। उन्होंने शहीद भगत सिंह का उदाहरण देते हुए बताया कि जब असेंबली में बम फेंकने की योजना बनी थी, तब सूची में उनका नाम नहीं था। भगत सिंह ने अपना नाम खुद सूची में जोड़ा था। इस पर चंद्रशेखर आजाद (नौजवान भारत सभा के प्रमुख) ने उन्हें चेतावनी दी थी कि सांडर्स की हत्या के मामले में उन्हें लाहौर ले जाकर फांसी दे दी जाएगी। लेकिन भगत सिंह ने तर्क दिया कि पार्टी की लहर थोड़ी धीमी पड़ गई है और उसे उभारने की जरूरत है। भगत सिंह ने कहा था कि बम फेंकने वालों में केवल वे ही अंग्रेजी बोल सकते हैं, इसलिए वे अपना मुकदमा खुद लड़ेंगे और अदालत में मीडिया को बुलाएंगे, जिससे उनकी बात पूरे देश में जाएगी और पार्टी को ताकत मिलेगी। भगवंत मान ने कहा कि ठीक वैसा ही हुआ और पूरे देश में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के नाम की धूम मच गई।
