नई दिल्ली
महाराष्ट्र और झारखंड के विधानसभा चुनावों में मतदान खत्म हो चुके हैं। अब 23 नवंबर को नतीजे आने का इंतजार है। इससे पहले, बुधवार शाम छह बजे दोनों प्रदेशों में वोटिंग खत्म होने के बाद एग्जिट पोल रिजल्ट्स आ गए। लेकिन इस बार एग्जिट पोल्स को लेकर उत्साह उस स्तर का नहीं रहा जैसा पहले हुआ करता था। पहले लोकसभा चुनाव, फिर हरियाणा विधानसभा चुनाव में एग्जिट पोल्स के फेल होने के बाद इसकी विश्वसनीयता पर संदेह का घेरा मजबूत हो गया है। लेकिन अगर महाराष्ट्र और झारखंड तक ही सीमित रहें तो पिछले चुनावों में इन दोनों प्रदेशों को लेकर आए एग्जिट पोल्स कितने सही थे या गलत?
2019 में हुए थे महाराष्ट्र-झारखंड के चुनाव
दोनों ही राज्यों में 2019 में पिछले विधानसभा चुनाव हुए थे। तब महाराष्ट्र में सात एग्जिट पोल्स के औसत ने बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के खाते में 207 सीटें दी थीं। लेकिन चुनाव आयोग ने रिजल्ट घोषित किए तो एनडीए 161 सीटों पर सिमट गया। यानी, एग्जिट पोल्स में एनडीए को 46 सीटें ज्यादा दी थीं। तब एनडीए में बीजेपी के साथ शिवसेना थी जो बंटी नहीं थी।
2019 के महाराष्ट्र चुनाव में कितने सटीक थे एग्जिट पोल्स?
तब शिवसेना चीफ उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर बीजेपी से नाता तोड़कर कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन का दामन थाम लिया था। लेकिन गठबंधन के बीच सत्ता-साझेदारी पर सहमति नहीं बनने के बाद सरकार बनाने में असमर्थ रहा। शिवसेना ने तब कांग्रेस और NCP के साथ हाथ मिलाया, जिनकी कुल संख्या 98 थी, और महा विकास अघाड़ी सरकार बनाई। दूसरी तरफ, कांग्रेस-एनसीपी को एग्जिट पोल्स ने कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन को 65 सीटों पर समेटकर शेष के खाते में 16 सीटें दी थीं। लेकिन असली रिजल्ट आए तो कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन को 33 सीटें अधिक आईं।
2019 के महाराष्ट्र चुनाव में News18-IPSOS पोल ने सबसे अलग अनुमान जताया था। उसने एनडीए के लिए 243 सीटों और कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के लिए सिर्फ 41 सीटों की भविष्यवाणी की थी। लेकिन एग्जैक्ट रिजल्ट के सबसे करीब इंडिया टुडे-एक्सिस माई इंडिया पहुंचा था जिसने बीजेपी-शिवसेना के लिए कम-से-कम 166 सीटों जबकि कांग्रेस-एनसीपी के लिए अधिकतम 90 सीटों का अनुमान लगाया गया था।
झारखंड के पिछले चुनाव में क्या था एग्जिट पोल्स का हाल?
पिछली बार झारखंड के लिए पेश अनुमानों में पोलस्टर्स ने बेहतरीन प्रदर्शन किया था। तीन एग्जिट पोल्स के औसत में जेएमएम-कांग्रेस-आरजेडी गठबंधन की राज्य की कुल 81 में से 41 सीटों पर जीत की भविष्यवाणी की गई थी। वहीं, बीजेपी के खाते में 29 सीटें दी गई थीं जिसने अकेले चुनाव लड़ा था। तब एनडीए से अलग होकर चुनावी मैदान में दम दिखाने वाली ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (AJSU) चार और बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व वाली तत्कालीन झारखंड विकास मोर्चा (JVM) के खाते में तीन सीटें दी गई थीं।
आजसू ने इस बार एनडीए में वापसी कर ली जबकि जेवीएम का 2020 में बीजेपी में विलय हो गया। शेष चार सीटें निर्दलीय और अन्य दलों को जाने की भविष्यवाणी की गई थी। जेएमएम के नेतृत्व वाला गठबंधन 47 सीटों पर जीत के साथ एग्जिट पोल से थोड़ा बेहतर प्रदर्शन करने में सफल रहा, जबकि बीजेपी ने 25, आजसू ने दो और जेवीएम ने तीन सीटें जीतीं। आजसू और जेवीएम के साथ गठबंधन के बिना बीजेपी बहुमत से काफी पीछे रह गई और हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाले गठबंधन ने उसे सत्ता से बाहर कर दिया।
इस एक एग्जिट पोल्स ने दिए थे सबसे करीबी नतीजे
झारखंड में भी इंडिया टुडे-एक्सिस माई इंडिया का पोल ही सबसे सटीक निकला था। उसने बीजेपी को कम से कम 22 सीटें दी थीं जो असल नतीजों में 25 सीटें लेकर आई थी। इसी तरह, जेएमएम के गठबंधन को उसने अधिकतम 50 सीटें दी थीं और असल में 47 सीटें आईं। टाइम्स नाउ पोल ने जेएमएम गठबंधन को 44 सीटें मिलने का अनुमान जताया था। बाबूलाल मरांडी की जेवीएम को तीनों एग्जिट पोल्स में तीन सीटें दी गई थीं और असल परिणाम में भी यही हुआ था। हालांकि, सभी एग्जिट पोल्स ने आजसू को थोड़ा कम आंका था।
