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‘भाषा सेतु होनी चाहिए, युद्ध का कारण नहीं’, स्टालिन पर भड़के जयंत चौधरी

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नई दिल्ली,

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को लेकर तमिलनाडु सरकार द्वारा हिंदी थोपे जाने का आरोप लगाने पर अब शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने राज्य के मुख्यमंत्री स्टालिन पर पलटवार किया है. उन्होंने कहा, भाषा सेतु होनी चाहिए, युद्ध का कारण नहीं!. केंद्रीय मंत्री ने तमिलनाडु के सीएम के उस बयान की भी आलोचना की है जिसमें उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से युद्ध के लिए तैयार रहने का बयान दिया था.

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को लेकर केंद्र सरकार और तमिलनाडु सरकार के बीच विवाद बढ़ता ही जा रहा है. स्टालिन केंद्र सरकार पर शिक्षा का राजनीतिकरण करने का आरोप लगा रहे हैं. स्टालिन ने अपने कार्यकर्ताओं से कहा था- ‘युद्ध के लिए तैयार रहें”. उनके इस बयान पर जयंत चौधरी ने उनपर तीखा पलटवार किया है.

तमिलनाडु बनाम केंद्र
राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के नेता और शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने स्टालिन को सीधे निशाने पर लेते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पूछा- माननीय मुख्यमंत्री स्टालिन, आप कितनी भाषाएं बोल और समझ सकते हैं? निस्संदेह, बहुभाषावाद ने आपकी सफलता में भूमिका निभाई होगी, फिर तमिलनाडु के युवाओं को इसी अवसर से क्यों वंचित किया जाए? NEP पर बहस सिर्फ हिंदी और तमिल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की भाषाई पहचान, सांस्कृतिक विविधता और शिक्षा नीति के भविष्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है.

जयंत चौधरी ने NEP 2020 के सेक्शन 4.13 का हवाला देते हुए कहा कि बहुभाषी फॉर्मूला भाषाई विविधता को मजबूत करने और राष्ट्रीय एकता को बढ़ाने के लिए है, न कि किसी भाषा को थोपने के लिए. भाषा सेतु होनी चाहिए, युद्ध का कारण नहीं! स्टालिन को दोबारा टैग कर जयंत चौधरी ने लिखा– मुख्यमंत्री स्टालिन ने अब तक जवाब नहीं दिया, लेकिन मैं जानता हूं कि वो 3-4 भाषाएं बोल सकते हैं. दक्षिण भारत के कई महान नेता डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, एचडी देवेगौड़ा, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, पीवी नरसिम्हा राव और केआर नारायणन बहुभाषी थे, फिर तमिलनाडु की नई पीढ़ी को इस लाभ से वंचित क्यों रखा जाए?

DMK का आरोप और केंद्र की सफाई
DMK सरकार का कहना है कि केंद्र सरकार NEP के जरिए हिंदी थोपने की कोशिश कर रही है, जिसे तमिलनाडु कतई स्वीकार नहीं करेगा. स्टालिन ने आरोप लगाया कि हिंदी के बढ़ते प्रभाव के चलते बिहार, यूपी और एमपी में मैथिली, ब्रजभाषा, बुंदेलखंडी और अवधी जैसी क्षेत्रीय भाषाएं कमजोर हो गई हैं. हालांकि, केंद्र सरकार ने इन आरोपों को नकारते हुए स्पष्ट किया कि NEP किसी भी भाषा को थोपने के बजाय बहुभाषावाद को बढ़ावा देती है.

INDIA गठबंधन में फंसी कांग्रेस और सपा?
इस पूरे विवाद में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं. RLD के मीडिया प्रभारी भूपेंद्र चौधरी ने पूछा – ‘DMK खुलेआम हिंदी का विरोध कर रही है, लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगी मौन हैं. क्या वे भी DMK के इस रुख का समर्थन करते हैं, या फिर सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए चुप बैठे हैं? अब देखना होगा कि कांग्रेस और अन्य दल इस मुद्दे पर अपना रुख साफ करते हैं या नहीं. क्या यह सिर्फ हिंदी बनाम तमिल की लड़ाई है, या फिर भाषाई समावेशिता की असली परीक्षा?

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