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Wednesday, February 11, 2026
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‘मुंबई की बोली-भाषा अब हिंदी बन गई है’, परिवहन मंत्री के बयान पर भड़की उद्धव सेना, मनसे-कांग्रेस ने भी घेरा

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मुंबई:

महाराष्ट्र में हिंदी को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। शिंदे सेना के प्रमुख नेता व परिवहन मंत्री प्रताप सरनाई के हिंदी वाले बयान को लेकर मनसे और उद्धव सेना ने नाराजगी प्रकट की है, तो कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आरोप लगाया कि वे बीजेपी के एजेंडा को चला रहे हैं। सरनाईक मराठी को मिटाना चाहते है। वे हिंदी वे हिंदी राष्ट्र थोपना चाहते हैं।

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने क्या कहा था
मुंबई हिंदी पत्रकार संघ के कार्यक्रम में परिवहन मंत्री सरनाईक ने कहा था कि हिंदी अब सचमुच मुंबई की बोलीभाषा बन गई है। हिंदी हमारी लाडली बहन है। हम मराठी को अपनी मातृभाषा कहते हैं, लेकिन हमारे मुंह से कभी हिंदी निकलती है, तो कभी अंग्रेजी, इसलिए हिंदी अब हमारी बोलचाल की भाषा बन चुकी है। ठाणे और मीरा-भायंदर मेरा चुनाव क्षेत्र है, जब मैं जनता से बात करता हूं, तो शुद्ध मराठी बोलता हूं, परंतु जब मैं मीरा-भायंदर की ओर जाता हूं तो अपने आप ही मेरे मुंह से हिंदी निकलने लगती है। आजकल हम कहते हैं कि मराठी हमारी मातृभाषा है, हमारी मां है। लेकिन हिंदी हमारी लाडली बहन है, क्योंकि इसी प्यारी बहन की वजह से हम आज 237 से भी आगे निकल गए हैं।

संजय राउत ने परिवहन मंत्री को घेरा
उद्दव सेना के प्रवक्ता संजय राउत ने परिवहन मंत्री सरनाईक के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि बालासाहेब ठाकरे ने मराठी लोगों के उत्थान और कल्याण के लिए शिवसेना की स्थापना की, ताकि वे मराठी लोगों के रूप में आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़ सकें और यही लोग अब कहते हैं कि हम बालासाहेब ठाकरे के वारिस हैं। उनके नेताओं से पूछें कि क्या उनकी कोई भूमिका है ? क्या मराठी संदर्भ में यही आपकी मुख्य भूमिका है? वे जो सोचते हैं, वही बीजेपी की सोच है। मैं बार-बार कहता हूं कि उनकी पार्टी के नेता और प्रमुख अमित शाह हैं क्योंकि ये लोग वही बात कहते हैं जो शाह कहते हैं।

मनसे ने की आलोचना
परिवहन मंत्री सरनाईक के बयान पर मनसे की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया आई है। मनसे नेता यशवंत किलेदार ने कहा कि मेरे राजा, राज्य, मुंबई और मेरे पिता के पूर्वजों की भाषा मराठी है। क्या प्रताप सरनाईक को पता है कि मुंबई भी मराठी लोगों की है। इससे पहले उनके मंत्री हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिए जाने की बात करते रहे थे। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को अपने मंत्रियों को समझाना चाहिए। हम यह स्वीकार नहीं कर सकते हैं कि वोटों की खातिर मराठी और मुंबई को कलंकित किया जाएगा और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के रूप में हम महाराष्ट्र और मराठी लोगों के लिए लड़ते रहेंगे।

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