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Friday, April 24, 2026
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‘मेरी टिप्पणी की गलत व्याख्या हुई…’, इंदिरा गांधी को ‘मदर ऑफ इंडिया’ कहने पर सुरेश गोपी ने दी सफाई

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नई दिल्ली,

केरल से बीजेपी के सांसद और केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बारे में अपनी टिप्पणी पर विवाद होने के बाद रविवार को स्पष्टीकरण दिया. उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी की गलत व्याख्या की गई और उसके संदर्भ को नहीं समझा गया. इंदिरा गांधी के बारे में उन्होंने जो कुछ कहा, उसमें कुछ भी गलत नहीं है. दरअसल, केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को ‘मदर ऑफ इंडिया’ और कांग्रेस नेता व केरल के मुख्यमंत्री रहे दिवंगत के. करुणाकरण को ‘साहसी प्रशासक’ बताया था. उनकी इस टिप्पणी से सियासत में हलचल मच गई है.

मेरी टिप्पणी की गलत व्याख्या हुईः सुरेश गोपी
केंद्रीय मंत्री ने रविवार को कहा कि, उन्होंने दिवंगत नेता को देश में कांग्रेस पार्टी की जननी कहा था और इस टिप्पणी की गलत व्याख्या की गई. राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि वह अपने दिल की भावनाओं के मुताबिक बात करने वाले व्यक्ति हैं और उनका दृढ़ विश्वास है कि इंदिरा गांधी के बारे में उन्होंने जो कुछ कहा, उसमें कुछ भी गलत नहीं है. बीजेपी नेता ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि, किसी बात में भाषा के प्रासंगिक अर्थ को समझना चाहिए.

क्या बोले सुरेश गोपी?
सुरेश गोपी ने कहा कि, ‘यह एक प्रासंगिक संदर्भ था. मैं नेता करुणाकरण के वास्तविक महत्व के बारे में बात कर रहा था. जैसे कि केरल के कांग्रेस और गैर-कांग्रेसी लोगों के लिए, भले ही संस्थापक और सह-संस्थापक कोई भी हों, करुणाकरण को केरल में कांग्रेस का जनक होना चाहिए. उस संदर्भ में, मैंने इंदिरा गांधी को भारत में कांग्रेस की मां के रूप में संदर्भित किया था.’ उन्होंने कहा कि अगर इस बात को भटकाना चाहते हैं तो आप इसे अगले लोकसभा चुनाव तक जारी रखेंगे.

इंदिरा गांधी के लिए कही ये बात
मैंने उनके स्मारक का दौरा किया. यह मेरे पिता और माँ की पार्टी है. मैं अपना जीवन भावनात्मक रूप से सभी वर्गों के लिए जीऊंगा. यह मेरी परंपरा है. यही सनातन धर्म का सार है. मुझे वो सारे गुण निभाने हैं. सिर्फ इसलिए कि इंदिरा गांधी कांग्रेस से हैं और उनका क्रूर कृत्य है, मैं उन्हें जिम्मेदार ठहराने से बच नहीं सकता. मैं उनकी मृत्यु तक उन्हें आजादी के बाद का असली वास्तुकार कहूंगा.’ दरअसल, सुरेश गोपी ने करुणाकरण और मार्क्सवादी दिग्गज ईके नायनार को अपना ‘राजनीतिक गुरु’ बताया था.उन्होंने गोपी पुन्कुन्नाम स्थित करुणाकरण के स्मारक ‘मुरली मंदिरम’ का दौरा भी किया था.

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