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राजस्थान : RTO ऑफिस में बिना रिश्वत नहीं होता कोई काम, एजेंटों के भरोसे चल रहा पूरा तंत्र!

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जयपुर:

राजस्थान के जयपुर आरटीओ प्रथम कार्यालय में भ्रष्टाचार इस कदर बढ़ चुका है कि बिना रिश्वत दिए कोई भी काम होना लगभग नामुमकिन हो गया है। ऑफिस में कार्य कराने आने वाले लोगों को जानबूझकर दस्तावेज़ों में कमियां बताकर लौटा दिया जाता है। ऐसे में आम जनता मजबूरी में ऑफिस के बाहर मौजूद एजेंटों की शरण में पहुंच जाती है।

आरटीओ ऑफिस में करीब दो से तीन दर्जन कर्मचारी तैनात हैं, जो अलग-अलग शाखाओं में कार्यरत हैं। हैरानी की बात यह है कि इन कर्मचारियों ने अपनी-अपनी सीटों पर दो से तीन निजी व्यक्तियों को बैठा रखा है, जो एजेंटों के संपर्क में रहते हैं। ये प्राइवेट लोग ही अधिकांश कार्य करते हैं और अधिकारी केवल दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भर करते हैं। यह स्थिति कार्यालय में गहराते भ्रष्टाचार की तस्वीर पेश करती है। बता दें कि यह हालात तब हैं जब दो दिन पहले ही यानी शुक्रवार को ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने परिवहन विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक लेकर परिवहन सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार पर सख्ती की बात कही थी।

ऑनलाइन स्लॉट के बावजूद घंटों इंतजार, सीट से नदारद मिला स्टाफ
सोमवार, 2 जून को ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यूअल के लिए एक आवेदनकार्त को 4 से 5 बजे का स्लॉट मिला। इस एक घंटे में डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और फोटो अपलोड की प्रक्रिया पूरी होनी थी। लेकिन दस्तावेजों में कमी बताकर उसे लौटा दिया गया और जब दोबारा मांगे गए दस्तावेज दिए गए तो फोटो खिंचवाने के लिए घंटों इंतजार करवाया गया।

इस दौरान खिड़की पर बैठा बाबू सीट पर ही मौजूद नहीं था। डीटीओ रमेश पांडे से संपर्क करने पर बताया गया कि वे छुट्टी पर हैं। अन्य अधिकारी रमेश मीणा भी सीट से गायब मिले। आखिरकार एक घंटे की मशक्कत के बाद फोटो लिया जा सका। यह घटनाक्रम इस बात को स्पष्ट करता है कि आरटीओ ऑफिस में बिना पैसे दिए कोई काम सुचारू रूप से नहीं हो सकता।

डीटीओ रमेश पांडे छुट्टी पर हैं, उनके स्थान पर प्रभारी डीटीओ लोक सेवा परिवहन के बस डिपो के निरीक्षण के लिए गई हुई थीं। यदि ड्यूटी के दौरान कोई कार्मिक गैरहाजिर रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
राजेंद्र सिंह शेखावत, आरटीओ प्रथम, जयपुर

करोड़ों के भ्रष्टाचार के मामले पहले भी उजागर
हाल ही में जयपुर आरटीओ प्रथम में बेकलॉग कार्यों में गड़बड़ी का बड़ा मामला सामने आया था। बिना अनुमति विंटेज नंबर बांटने और करीब 8-10 करोड़ की हेराफेरी के आरोप लगे थे। मामले में आरटीओ प्रथम राजेंद्र सिंह शेखावत ने कर्मचारी सुरेश तनेजा और प्रोग्रामर रामजीलाल मीणा को निलंबित करने की अनुशंसा की थी।

गडकरी की टिप्पणी: ‘आरटीओ, चंबल से बड़ा डकैत’
राज्य में आरटीओ ऑफिसों की कार्यप्रणाली को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी तल्ख टिप्पणी कर चुके हैं। उन्होंने कभी आरटीओ को ‘चंबल से भी बड़ा डकैत’ बताया था। आम जनता का कहना है कि सड़क पर जितनी तेजी से यह विभाग चालान और वसूली में सक्रिय है, दफ्तरों में उतनी ही धीमी गति से जनता के काम होते हैं।

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