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Tuesday, March 10, 2026
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जेल में बंद कैदियों को छाई ‘मस्ती’, बंद कमरे में महिला मित्रों से मिलने पहुंचे, फिर…

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जयपुर

जयपुर की सेंट्रल जेल में अजीब ही खेल चल रहा है। जेल में बंद कैदियों की मिलीभगत कई कर्मचारियों और अफसरों तक है। मिलीभगत का एक ताजा खेल भी सामने आया है। हुआ यूं कि जेल में बंद चार कैदियों ने तबीयत खराब होने का बहाना बनाया। डॉक्टर से एसएमएस अस्पताल रेफर होने की पर्चियां बना ली। एसएमएस अस्पताल में पहुंचने के बजाय ये कैदी अपनी महिला मित्रों से मिलने अलग-अलग होटलों में पहुंच गए। एक कैदी अपनी पत्नी से मिलने चला गया। कुछ घंटों बाद जब यह हरकत उजाकर हुई तो पुलिस ने धरपकड़ शुरू की। होटलों से इन कैदियों को पकड़ा गया और फिर जेल में दाखिल कराया गया।

5 कैदी निकले, सिर्फ 1 ही वापस लौटा
डीसीपी ईस्ट तेजस्वनी गौतम का कहना है कि पुलिस को सूचना मिली थी कि 5 कैदियों को जयपुर सेंट्रल जेल से एसएमएस अस्पताल के लिए रेफर किया गया। उनमें से एक कैदी ही अस्पताल पहुंचा और फिर जेल लौट गया लेकिन चार कैदी गायब हैं। वे इलाज कराने के लिए एसएमएस अस्पताल पहुंचे ही नहीं। उनके फरार होने की सूचना मिलने पर पुलिस ने स्पेशल टीमों का गठन किया और छापेमारी शुरू की। छापेमारी के दौरान दो कैदी एयरपोर्ट के पास स्थित एक होटल में ठहरे हुए मिले जबकि दो कैदी सिंधी कैंप और जालूपुरा की होटलों में मिले। एक कैदी अपनी पत्नी से मिलने गया हुआ था और अन्य तीन कैदी अपनी महिला मित्रों के साथ होटल में रुके हुए पाए गए।

हत्या, दुष्कर्म और धोखाधड़ी के हैं आरोपी
इलाज का बहाना बनाकर जो पांच कैदी जयपुर सेंट्रल जेल से बाहर निकले। उनमें जोगेंद्र सिंह, रफीक खान, भंवर सिंह, अंकित और करण शामिल हैं। जोगेंद्र को एसएमएस अस्पताल जाकर वापस लौट आया लेकिन रफीक, भंवर, अंकित और करण वापस नहीं लौटे। जानकारी के मुताबिक रफीक हत्या के आरोप में जेल में बंद है जबकि कैदी भंवर के खिलाफ दुष्कर्म का केस है। कैदी अंकित और करण धोखाधड़ी के आरोपी हैं और पिछले कुछ महीनों से जेल में बंद हैं।

डॉक्टर, जेल प्रहरी सहित कई कर्मचारियों की मिलीभगत
जब कोई कैदी जेल से इलाज के लिए एसएमएस अस्पताल जाते हैं तो पहले डॉक्टर उनकी पर्ची बनाकर अनुमति देता है। पुलिस लाइन से चालानी गार्डों को बुलाया जाता है। चालानी गार्डों की निगरानी में इलाज के लिए भेजा जाता है। शनिवार को जब पांच कैदी इलाज के लिए एसएमएस रवाना हुए तब उनके साथ सुरक्षा के लिए चालानी गार्ड मौजूद थे। कैदियों ने इन चालानी गार्डों से मिलीभगत कर ली। अस्पताल पहुंचने के बजाय वे होटलों में पहुंच गए। चालानी गार्ड भी साथ थे। पुलिस ने जब छापेमारी की तो कैदियों के साथ चालानी गार्डों (पुलिस लाइन के पुलिसकर्मियों) को भी हिरासत में ले लिया। उनके खिलाफ दो अलग-अलग पुलिस थानों में मुकदमे दर्ज किए गए हैं।

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